मणिपुर, मेघालय और त्रिपुरा का राज्य स्थापना दिवस | 22 Jan 2026

स्रोत: DD 

मणिपुर, त्रिपुरा और मेघालय ने 21 जनवरी को अपना राज्य स्थापना दिवस मनाया। इसी दिन वर्ष 1972 में उत्तर-पूर्वी क्षेत्र (पुनर्गठन) अधिनियम, 1971 के तहत ये तीनों पूर्ण राज्य बने।

मणिपुर, मेघालय और त्रिपुरा की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि एवं पुनर्गठन क्या है?

  • मणिपुर: स्वतंत्रता से पहले मणिपुर एक स्वतंत्र रियासत था, जिसने वर्ष 1947 में अधिग्रहण पत्र (इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन) के माध्यम से भारत में विलय किया, जिसमें आंतरिक स्वायत्तता बनी रही।
    • वर्ष 1948 में मणिपुर ने सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के आधार पर भारत का पहला चुनाव कराया और एक संवैधानिक राजतंत्र बना।
    • वर्ष 1949 में महाराजा ने निर्वाचित विधानसभा से परामर्श किये बिना विलय समझौते पर हस्ताक्षर किये, जिसके बाद विधानसभा को भंग कर दिया गया।
    • मणिपुर का प्रशासन पार्ट-C राज्य (1949–56) के रूप में किया गया, वर्ष 1956 में यह केंद्रशासित प्रदेश बना और अंततः वर्ष 1971 के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र (पुनर्गठन) अधिनियम के तहत 1972 में पूर्ण राज्य का दर्जा प्राप्त हुआ, साथ ही पहाड़ी क्षेत्रों के लिये अनुच्छेद 371C के अंतर्गत विशेष संरक्षण प्रदान किया गया।
  • त्रिपुरा: त्रिपुरा माणिक्य वंश द्वारा शासित एक रियासत था और वर्ष 1949 में रानी कंचन प्रभा देवी के संरक्षक शासन के दौरान भारतीय संघ में विलय हुआ।
    • प्रारंभ में इसे पार्ट-C राज्य के रूप में प्रशासित किया गया और वर्ष 1956 में यह केंद्रशासित प्रदेश बना।
    • क्षेत्रीय आकांक्षाओं और प्रशासनिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए वर्ष 1971 के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र (पुनर्गठन) अधिनियम के माध्यम से 1972 में त्रिपुरा को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया गया, साथ ही छठी अनुसूची के अंतर्गत त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त ज़िला परिषद के माध्यम से जनजातीय स्वशासन सुनिश्चित किया गया।
  • मेघालय: मेघालय को राज्य का दर्जा खासी, जयंतिया और गारो पहाड़ियों द्वारा अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक एवं भाषायी पहचान की सुरक्षा हेतु की गई स्वायत्तता की मांग के परिणामस्वरूप मिला, विशेषकर असम की भाषा नीति के विरोध के संदर्भ में।
    • इसे 1969 के 22वें संविधान संशोधन अधिनियम के तहत पहले असम के भीतर एक स्वायत्त राज्य के रूप में गठित किया गया।
    • इसके बाद 1971 के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र (पुनर्गठन) अधिनियम के माध्यम से 1972 में मेघालय को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया गया, जिससे यह भारत का 21वाँ राज्य बना, साथ ही पूरे राज्य का शासन छठी अनुसूची के अंतर्गत स्वायत्त ज़िला परिषदों के माध्यम से किया गया।

उत्तर-पूर्वी क्षेत्र (पुनर्गठन) अधिनियम, 1971 का महत्त्व:

  • उप-राष्ट्रीयतावाद की पूर्ति: इस अधिनियम ने पहाड़ी जनजातियों (खासी, गारो, जयंतिया, मिज़ो) की लंबे समय से चली आ रही स्वायत्तता की मांगों को संबोधित किया, जो स्वयं को असम-प्रधान मैदानी क्षेत्रों से सांस्कृतिक और भाषायी रूप से भिन्न मानती थीं।
    • केंद्रशासित प्रदेशों को राज्यों में उन्नत करके इस अधिनियम ने स्थानीय जनसंख्या को अपनी स्वयं की विधानसभाएँ प्रदान कीं, जिससे वे अपनी विशिष्ट जनजातीय परंपराओं और आवश्यकताओं के अनुरूप नीतियाँ बना सकें।
  • रणनीतिक और सुरक्षा आवश्यकताएँ: यह अधिनियम बांग्लादेश के निर्माण (1971 का युद्ध) के तुरंत बाद लागू किया गया। भारत को उत्तर-पूर्व की आंतरिक स्थिरता मज़बूत करने की आवश्यकता थी ताकि "चिकन नेक" कॉरिडोर और अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
    • उत्तर-पूर्वी सीमा एजेंसी (NEFA) को अरुणाचल प्रदेश के केंद्रशासित प्रदेश में परिवर्तित करके इस अधिनियम ने इस रणनीतिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र (चीन से सटा हुआ) को भारतीय राजनीतिक मुख्यधारा में औपचारिक रूप से एकीकृत किया और इसे ‘फ्रंटियर एजेंसी’ की अस्पष्ट स्थिति से सुस्पष्ट संवैधानिक दर्जा दिलाया।
      • यह अरुणाचल प्रदेश को 1987 में 55वें संविधान संशोधन के माध्यम से पूर्ण राज्य का दर्जा प्राप्त करने से पहले का संक्रमणात्मक कदम था।
  • उत्तर-पूर्वी परिषद (NEC): यह एक सांविधिक निकाय है, जिसे पूर्वोत्तर परिषद अधिनियम, 1971 के तहत स्थापित किया गया है।
    • NEC उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास के लिये मुख्य समन्वय एजेंसी के रूप में कार्य करती है, जिसमें अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिज़ोरम, नगालैंड, सिक्किम, और त्रिपुरा शामिल हैं।
    • यह उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय (MDoNER) के प्रशासनिक नियंत्रण के तहत कार्य करता है और इसमें इन राज्यों के राज्यपाल और मुख्यमंत्री के साथ-साथ राष्ट्रपति द्वारा नामित तीन सदस्य शामिल होते हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. मणिपुर, मेघालय और त्रिपुरा को राज्य का दर्जा कब प्राप्त हुआ?
ये राज्य 21 जनवरी, 1972 को , पूर्वोत्तर क्षेत्र (पुनर्गठन) अधिनियम, 1971 के तहत, पूर्ण राज्य बने।

2. किस अधिनियम ने पूर्वोत्तर को पुनर्गठित किया और इन राज्यों को राज्य का दर्जा दिया?
 पूर्वोत्तर क्षेत्र (पुनर्गठन) अधिनियम, 1971 ने इस क्षेत्र को पुनर्गठित किया और मणिपुर, मेघालय एवं त्रिपुरा को राज्य का दर्जा दिया।

3. मणिपुर पर कौन-से विशेष संवैधानिक प्रावधान लागू होते हैं?
अनुच्छेद 371C मणिपुर हिल एरिया के लिये विशेष सुरक्षा प्रदान करता है।

4. त्रिपुरा और मेघालय में आदिवासी स्वायत्तता कैसे सुनिश्चित होती है?
संविधान की छठी अनुसूची के तहत स्वायत्त ज़िला परिषदों के माध्यम से।

5. पूर्वोत्तर क्षेत्र (पुनर्गठन) अधिनियम, 1971 की रणनीतिक महत्ता क्यों थी?
इससे 1971 के युद्ध के बाद उत्तर-पूर्व की आंतरिक स्थिरता सुदृढ़ हुई, अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं की सुरक्षा हुई तथा संवेदनशील सीमा क्षेत्रों को भारतीय राजनीतिक ढाँचे में एकीकृत किया गया।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न

प्रिलिम्स 

प्रश्न. पूर्वोत्तर परिषद् (NEC) की स्थापना पूर्वोत्तर परिषद् अधिनियम, 1971 द्वारा की गई थी। वर्ष 2002 में NEC अधिनियम में संशोधन के बाद परिषद में निम्नलिखित में से किन-किन सदस्यों को शामिल किया गया है?  (2024)

1. संघटक राज्य का राज्यपाल

2. संघटक राज्य का मुख्यमंत्री

3. भारत के राष्ट्रपति द्वारा नामनिर्दिष्ट तीन सदस्य

4. भारत का गृ मंत्री

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:

(a) केवल 1,2 और 3

(b) केवल 1,3 और 4

(c) केवल 2 और 4

(d) 1,2,3 और 4

उत्तर: (a)