ग्रीन अमोनिया और ग्रीन मेथनॉल के लिये मानक | 10 Mar 2026

स्रोत: द हिंदू 

नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) ने 'राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन' (NGHM) के तहत हरित हाइड्रोजन डेरिवेटिव्स (जैसे– अमोनिया और मेथनॉल) के व्यापार में तेज़ी लाने के लिये 'ग्रीन अमोनिया' और 'ग्रीन मेथनॉल' हेतु विशिष्ट उत्सर्जन मानकों को अधिसूचित किया है।

  • राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन: वर्ष 2023 में अनुमोदित इस मिशन का उद्देश्य भारत को स्वच्छ हाइड्रोजन के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करना है। वर्ष 2030 तक इसका लक्ष्य हाइड्रोजन उत्पादन के लिये 125 गीगावाट (GW) की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता विकसित करना है, इसके तहत कुल 8 लाख करोड़ रुपए से अधिक का निवेश कर 6 लाख नौकरियाँ सृजित करना अपेक्षित है। इसके अतिरिक्त इसके परिणामस्वरूप जीवाश्म ईंधन के आयात में 1 लाख करोड़ रुपए से अधिक की शुद्ध कमी के साथ-साथ वार्षिक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में लगभग 50 मीट्रिक टन की कमी आएगी।
  • ग्रीन हाइड्रोजन: यह वह हाइड्रोजन है जिसे सौर या पवन जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों की सहायता से जल इलेक्ट्रोलिसिस द्वारा उत्पन्न किया जाता है। 
    • भारत सरकार के मानकों के अनुसार, यदि उत्पादित हाइड्रोजन के प्रति किलोग्राम पर उत्सर्जन 2 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) समतुल्य से अधिक नहीं होता, तो उसे “ग्रीन” माना जाता है।
    • यदि उत्सर्जन इस निर्धारित सीमा के भीतर रहता है, तो इसे बायोमास (जैसे– कृषि अपशिष्ट) से भी उत्पादित किया जा सकता है।
  • ग्रीन अमोनिया थ्रेशहोल्ड: किसी अमोनिया को आधिकारिक रूप से “ग्रीन” वर्गीकृत करने के लिये कुल गैर-जैविक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन प्रति किलोग्राम अमोनिया पर अधिकतम 0.38 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य से अधिक नहीं होना चाहिये, जिसकी गणना पिछले 12 महीनों की अवधि के औसत के आधार पर की जाती है।
    • ग्रीन अमोनिया एक कार्बन-न्यूट्रल, नवीकरणीय ईंधन और उर्वरक फीडस्टॉक है, जिसे पवन या सौर ऊर्जा से इलेक्ट्रोलिसिस द्वारा उत्पन्न ग्रीन हाइड्रोजन को नाइट्रोजन के साथ मिलाकर तैयार किया जाता है।
    • यह जीवाश्म ईंधन आधारित “ग्रे” अमोनिया का एक सतत विकल्प प्रदान करता है, जो शिपिंग, बिजली उत्पादन और कृषि जैसे क्षेत्रों के डीकार्बोनाइज़ेशन के लिये महत्त्वपूर्ण है।
  • ग्रीन मेथनॉल थ्रेशहोल्ड: उत्सर्जन की सीमा प्रति किलोग्राम मेथनॉल पर अधिकतम 0.44 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य निर्धारित की गई है, जिसकी गणना पिछले 12 महीनों की अवधि के औसत के आधार पर की जाती है।
  • ग्रीन मेथनॉल की सीमा: उत्सर्जन की सीमा 0.44 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड समकक्ष ($CO_2$ eq) प्रति किलोग्राम मेथनॉल से अधिक नहीं निर्धारित की गई है, जिसकी गणना पिछले 12 महीनों की अवधि के औसत के आधार पर की जाती है।
    • ग्रीन मेथनॉल एक कम-कार्बन और नवीकरणीय तरल ईंधन तथा रासायनिक फीडस्टॉक है, जिसे बायोमास (बायो-मेथनॉल) या ग्रीन हाइड्रोजन से तैयार किया जाता है।
    • ग्रीन मेथनॉल एक कम कार्बन, नवीकरणीय तरल ईंधन और रासायनिक फीडस्टॉक है, जो बायोमास (बायो-मेथनॉल) या ग्रीन हाइड्रोजन से उत्पादित किया जाता है।
    • यह पारंपरिक जीवाश्म ईंधन आधारित मेथनॉल के स्थान पर एक सतत और नेट-ज़ीरो विकल्प के रूप में कार्य करता है, जो ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को लगभग 60–95% तक कम करने में सक्षम है।
  • पात्र कार्बन स्रोत: ग्रीन मेथनॉल के उत्पादन के लिये कार्बन डाइऑक्साइड को बायोजेनिक स्रोतों, 'डायरेक्ट एयर कैप्चर' या मौजूदा औद्योगिक स्रोतों से प्राप्त किया जा सकता है।
  • रणनीतिक महत्त्व: ये नए निर्धारित मानक निवेशकों को नियामक स्पष्टता प्रदान करेंगे और उर्वरक, शिपिंग, बिजली तथा भारी उद्योग जैसे हार्ड-टू-अबेट क्षेत्रों के डीकार्बोनाइज़ेशन की सुविधा प्रदान करेंगे।

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