साउंड-बेस्ड हीलियम लीक सेंसर | 30 Jan 2026
शोधकर्त्ताओं ने टोपोलॉजिकल पदार्थों (ऐसे पदार्थ जो सतह और अंदरूनी हिस्से में भिन्न व्यवहार करते हैं) का उपयोग करते हुए एक नवीन साउंड-बेस्ड सेंसर विकसित किया है, जो हीलियम के रिसाव का पता लगाने में सक्षम है। यह एक महत्त्वपूर्ण प्रगति को दर्शाता है क्योंकि हीलियम रासायनिक रूप से निष्क्रिय, दुर्लभ और औद्योगिक रूप से अत्यंत आवश्यक गैस है।
- नवोन्मेषी तंत्र: यह सेंसर कागोमे लैटिस संरचना के माध्यम से अपने त्रिकोणीय कोनों पर ध्वनि तरंगों को अवरुद्ध करता है, जिससे यह किसी रासायनिक प्रतिक्रिया के बगैर हीलियम का पता लगा सकता है।
- पता लगाने का सिद्धांत: हीलियम सेंसर में ध्वनि की गति को बदल देता है, जिससे फँसी हुई ध्वनि तरंगों की आवृत्ति (frequency) में परिवर्तन होता है। इस परिवर्तन को मापा जाता है ताकि तुरंत हीलियम की सांद्रता की गणना की जा सके।
हीलियम
- परिचय: हीलियम एक रासायनिक रूप से निष्क्रिय उदात्त गैस है, जो रंगहीन, गंधहीन, स्वादहीन और सामान्य परिस्थितियों में गैर-विषैली होती है। यह हाइड्रोजन के बाद ब्रह्मांड में दूसरा सबसे अधिक पाया जाने वाला तत्त्व है।
- पृथ्वी पर दुर्लभता और उत्पत्ति: पृथ्वी के वायुमंडल में हीलियम अति दुर्लभ है। यह यूरेनियम और थोरियम जैसे रेडियोधर्मी तत्त्वों के अल्फा क्षय से बनती है और आमतौर पर प्राकृतिक गैस के साथ उप-उत्पाद के रूप में निष्कर्षित होती है।
- महत्त्वपूर्ण अनुप्रयोग: MRI स्कैनर (अतिचालक चुंबकों के कूलिंग), एयरोस्पेस क्षेत्र में (रॉकेट प्रणालियों की शुद्धीकरण प्रक्रिया), रिसाव पता लगाने, गुब्बारे और उत्थापन प्रयोजनों (जैसे– वायुयान), गहरे समुद्र में गोताखोरी हेतु श्वसन मिश्रणों तथा विशेष वेल्डिंग (जैसे– एल्यूमिनियम, टाइटेनियम) में एक परिरक्षी गैस के रूप में आवश्यक है जिसमें उच्च ऊष्मा की आवश्यकता होती है।
- भू-राजनीतिक एवं आपूर्ति संबंधी चिंताएँ: यह सीमित भंडार, उत्पादन संबंधी बाधाओं और बढ़ती मांग के कारण वैश्विक कमी का सामना कर रही हैं। भारत का राजमहल ज्वालामुखीय बेसिन (विशेष रूप से बकरेश्वर-तांटलोइ भू-तापीय क्षेत्र) एक संभावित घरेलू स्रोत है, जबकि अमेरिका, अल्जीरिया और रूस के पास प्रमुख वैश्विक भंडार हैं।
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