सेला झील और सेला दर्रा | 29 Jan 2026

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

हाल ही में अरुणाचल प्रदेश के तवांग ज़िले में सेला दर्रे के पास स्थित एक उच्च ऊँचाई वाली हिमनद झील सेला झील अपने भौगोलिक, पारिस्थितिक और रणनीतिक महत्त्व के कारण चर्चा में रही है।

सेला झील

  • परिचय: सेला झील एक उच्च ऊँचाई वाली हिमनद झील है (13,000 फीट से अधिक), जो पूर्वी हिमालय में तवांग क्षेत्र के सेला दर्रे के उत्तरी भाग में स्थित है।
    • एक हिमनद झील जल का वह निकाय है जो हिमनद (ग्लेशियर) के पिघले हुए पानी से बनता है। यह पानी बर्फ, मोरेन (ग्लेशियर द्वारा लाए गए मलबे) या ग्लेशियर के कटाव से बनी चट्टानी दरारों में जमा हो जाता है।
  • भौगोलिक विशेषताएँ: अत्यधिक विषम जलवायु परिस्थितियों के कारण यह क्षेत्र विरल अल्पाइन वनस्पतियों से घिरा हुआ है और इसका उपयोग गर्मियों में याक के चरागाह के रूप में किया जाता है।
    • इसका पानी नूरानांग नदी में गिरता है, जो तवांग नदी की एक सहायक नदी है।
  • सांस्कृतिक महत्त्व: अपनी प्राकृतिक सुंदरता के कारण इसे "पैराडाइज़ लेक" (स्वर्ग की झील) के नाम से जाना जाता है। यह तिब्बती बौद्ध धर्म की पवित्र झीलों में से एक है और स्थानीय मोनपा समुदायों के लिये इसका गहरा आध्यात्मिक महत्त्व है।

सेला दर्रा

  • परिचय: यह तवांग में स्थित एक उच्च ऊँचाई वाला पर्वतीय दर्रा है, जो तवांग को असम के मैदानी इलाकों से जोड़ने वाले एक रणनीतिक लॉजिस्टिक कॉरिडोर (सामरिक गलियारे) के रूप में कार्य करता है।
    • यह भारत के सबसे ऊँचे मोटर-योग्य (वाहनों के चलने योग्य) दर्रों में से एक है और सीमा सड़क संगठन (BRO) द्वारा पूरे वर्ष इसका रख-रखाव किया जाता है।
  • सामरिक महत्त्व: वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के निकट स्थित होने के कारण इसने वर्ष 1962 के भारत-चीन युद्ध में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और आज भी यह सैन्य रसद और सैनिकों की आवाजाही के लिये एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण मार्ग बना हुआ है।
    • सेला सुरंग सेला दर्रे के माध्यम से हर मौसम में कनेक्टिविटी प्रदान करती है, जो असम के तेजपुर को चीन के साथ लगी वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के निकट स्थित तवांग से जोड़ती है।
    • इसके समीप स्थित ‘जसवंत सिंह युद्ध स्मारक’ वर्ष 1962 में चीनी सेना से लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए भारतीय सैनिकों की स्मृति में स्थापित किया गया है।

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