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SCO रक्षा मंत्रियों की बैठक

  • 30 Apr 2026
  • 13 min read

स्रोत: पीआईबी 

किर्गिस्तान के बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) रक्षा मंत्रियों की बैठक में, भारत के रक्षा मंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर को इस बात के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया कि आतंकवाद के केंद्र अब उचित दंड से अछूते नहीं रहेंगे, जिससे भारत की “ज़ीरो टॉलरेंस” नीति और अधिक मज़बूत होती है।

  • जवाबदेही की अपील: भारत ने SCO से उन देशों के विरुद्ध कार्रवाई करने का आग्रह किया जो आतंकवादियों को शरण देते हैं या समर्थन करते हैं तथा आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद जैसी “बुराइयों” के खिलाफ बिना किसी राजनीतिक दोहरे मानदंड के एकजुट संघर्ष पर बल दिया। 
    • भारत ने आतंकवाद-रोधी कार्रवाई को SCO के मूलभूत सिद्धांत के रूप में रेखांकित करते हुए तियानजिन घोषणा (2025) का उल्लेख किया, जिसमें क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद की निंदा और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को बढ़ावा देने पर बल दिया गया है। साथ ही भारत ने यह भी कहा कि आतंकवाद की कोई राष्ट्रीयता या धर्म नहीं होता तथा इसके विरुद्ध निरंतर एवं सामूहिक कार्रवाई की आवश्यकता है।
    • भारत ने कट्टरपंथ का सामना करने और क्षेत्रीय सुरक्षा बनाए रखने में SCO (शंघाई सहयोग संगठन) के क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी संरचना (RATS) की महत्त्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया।
  • नियम-आधारित विश्व व्यवस्था: भारत ने ऐसे "व्यवस्थित" विश्व की वकालत की, जहाँ सह-अस्तित्व, सह-निवास और करुणा अराजकता व संघर्ष से ऊपर हों, इसके साथ ही भारत ने नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था पर भी बल दिया।
    • भारत ने बल के बजाय संवाद और कूटनीति के लिये अपनी प्रतिबद्धता तथा SCO के भीतर शांति और एकता को बढ़ावा देने के लिये "वसुधैव कुटुम्बकम्" (विश्व एक परिवार है) के दर्शन की पुष्टि की।

और पढ़ें: 25वाँ शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन 

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