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सांता मार्टा जलवायु सम्मेलन

  • 04 May 2026
  • 48 min read

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस 

चर्चा में क्यों?

वैश्विक GDP के लगभग 50% का प्रतिनिधित्व करने वाले 50 से अधिक देशों के प्रतिनिधि, जीवाश्म ईंधनों से दूर संक्रमण पर आयोजित प्रथम अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में भाग लेने हेतु सांता मार्टा, कोलंबिया में एकत्र हुए।

सांता मार्टा जलवायु सम्मेलन क्या है?

  • पृष्ठभूमि: जीवाश्म ईंधनों से दूर संक्रमण पर आयोजित प्रथम अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन की सह-मेज़बानी कोलंबिया और नीदरलैंड्स द्वारा की गई।
    • इसे ऐसे कोलिशन ऑफ द विलिंग/इच्छुक देशों का गठबंधन के लिये एक ‘सुरक्षित मंच’ के रूप में परिकल्पित किया गया, जो पारंपरिक संयुक्त राष्ट्र जलवायु शिखर सम्मेलनों के राजनीतिक गतिरोधों से आगे बढ़ते हुए जीवाश्म ईंधनों की चरणबद्ध समाप्ति हेतु निर्णायक कार्रवाई करने के लिये तैयार हैं।
  • उद्देश्य: जीवाश्म ईंधनों के उपयोग को समाप्त करने तथा नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियों की ओर संक्रमण के लिये व्यावहारिक राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय रोडमैप विकसित करना, साथ ही व्यापार एवं वित्तीय नीतियों को हरित संक्रमण के अनुरूप बनाना।
  • सम्मेलन की प्रमुख विशेषताएँ: आपूर्ति-पक्षीय शासन संबंधी कमियों को दूर करने हेतु, विशेषकर लघु द्वीपीय विकासशील राज्यों (SIDS) की ओर से, जीवाश्म ईंधन अप्रसार संधि के समर्थन में गति बढ़ती हुई देखी गई।
    • प्रतिभागियों ने हरित संक्रमण लक्ष्यों के अनुरूप व्यापार, वित्त तथा कार्बन मूल्य निर्धारण को संरेखित करने पर बल दिया, जिसमें जीवाश्म ईंधन सब्सिडी को चरणबद्ध रूप से समाप्त करना भी शामिल है। साथ ही, विकासशील देशों को ज़ीरो-कार्बन मार्ग की ओर न्यायसंगत संक्रमण सुनिश्चित करने हेतु वित्तीय एवं तकनीकी सहायता प्रदान करने की आवश्यकता पर भी ज़ोर दिया गया।
    • फ्राँस ने यूरोप का पहला ईंधन-वार जीवाश्म ईंधन निष्क्रमण रोडमैप प्रस्तुत किया है, जिसके अनुसार कोयले का उपयोग वर्ष 2030 तक, तेल का वर्ष 2045 तक तथा गैस का वर्ष 2050 तक समाप्त कर दिया जाएगा।
  • सीमाएँ:
    • शीर्ष उत्सर्जकों की अनुपस्थिति: इस सम्मेलन की सबसे बड़ी सीमा यह रही कि विश्व के तीन प्रमुख ग्रीनहाउस गैस (GHG) उत्सर्जक अमेरिका, चीन और भारत सांता मार्टा बैठक में प्रतिनिधित्व नहीं कर रहे थे।
    • सार्वभौमिक बाध्यकारी प्राधिकार का अभाव: चूँकि यह UNFCCC के बाहर कार्यरत एक ‘इच्छुक देशों का गठबंधन’ है, इसलिये इसके निष्कर्ष स्वाभाविक रूप से ऐसे नए अंतर्राष्ट्रीय कानूनी ढाँचे या तंत्र को अनिवार्य नहीं बनाते, जो वैश्विक स्तर पर लागू हों।
    • वित्तीय चुनौती: यद्यपि कई प्रतिबद्धताएँ की गईं, किंतु अपेक्षाकृत गरीब देशों में बड़े आर्थिक परिवर्तन को समर्थन देने हेतु आवश्यक वित्तीय तंत्रों का वास्तविक विकास अब भी एक गंभीर चुनौती बना हुआ है।
  • अगला कदम: सहभागी देशों ने इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की है। इसके अंतर्गत दूसरा अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन वर्ष 2027 की शुरुआत में तुवालु (प्रशांत महासागर स्थित द्वीपसमूह देश) में आयोजित किया जाएगा, जिसकी सह-मेज़बानी आयरलैंड द्वारा की जाएगी।

UNFCCC का पक्षकार सम्मेलन (COP)

  • परिचय: COP, संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन रूपरेखा अभिसमय (UNFCCC) का सर्वोच्च निर्णय-निर्माण निकाय है। इसके सदस्य देश प्रतिवर्ष बैठक कर जलवायु प्रगति की समीक्षा करते हैं, समझौतों पर वार्ता करते हैं तथा राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित अंशदान (NDC) जैसी प्रतिबद्धताओं को अद्यतन करते हैं।
    • संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन रूपरेखा अभिसमय (UNFCCC) को वर्ष 1992 के रियो पृथ्वी शिखर सम्मेलन में जलवायु प्रणाली में मानवजनित जोखिमपूर्ण हस्तक्षेप को रोकने के उद्देश्य से अपनाया गया था। बाद में इसे क्योटो प्रोटोकॉल (1997) तथा पेरिस समझौते (2015) के माध्यम से और सुदृढ़ किया गया।
    • COP-1 का आयोजन वर्ष 1995 में बर्लिन में हुआ था और COP-30 (2025) तक इसमें 198 देशों की भागीदारी हो चुकी है, जिससे यह संयुक्त राष्ट्र के अंतर्गत सबसे बड़े बहुपक्षीय मंचों में से एक बन गया है।
    • COP को कार्यान्वयन हेतु सहायक निकाय (SBI) तथा वैज्ञानिक एवं प्रौद्योगिकीय सलाह हेतु सहायक निकाय (SBSTA) का समर्थन प्राप्त है।
    • COP, क्योटो प्रोटोकॉल के लिये CMP तथा पेरिस समझौते के लिये CMA के रूप में भी कार्य करता है।
      • क्योटो प्रोटोकॉल के पक्षकारों की बैठक के रूप में कार्यरत पक्षकार सम्मेलन (CMP), क्योटो प्रोटोकॉल के कार्यान्वयन की निगरानी करता है।
      • पेरिस समझौते के पक्षकारों की बैठक के रूप में कार्यरत पक्षकार सम्मेलन (CMA), पेरिस समझौते के कार्यान्वयन की निगरानी करता है।
  • COP की मेज़बानी: COP बैठकों का आयोजन संयुक्त राष्ट्र द्वारा निर्धारित पाँच भौगोलिक क्षेत्रों अफ्रीका, एशिया-प्रशांत, पूर्वी यूरोप, लैटिन अमेरिका एवं कैरेबियन तथा पश्चिमी यूरोप एवं अन्य के बीच रोटेशन के आधार पर किया जाता है।
    • देश स्वेच्छा से मेज़बानी के लिये प्रस्ताव रखते हैं और यदि एक से अधिक उम्मीदवार सामने आते हैं, तो संबंधित क्षेत्र सर्वसम्मति से एक देश का चयन करता है।
    • तुर्की COP-31 (नवंबर 2026) की मेज़बानी करेगा, जबकि इथियोपिया वर्ष 2027 में अदीस अबाबा में COP-32 का आयोजन करेगा।

और पढ़ें: बेलेम, ब्राज़ील में आयोजित UNFCCC COP 30

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. सांता मार्टा जलवायु सम्मेलन क्या है?
यह UNFCCC प्रक्रिया से बाहर जीवाश्म ईंधनों को चरणबद्ध रूप से समाप्त करने हेतु कार्रवाई योग्य रोडमैप विकसित करने वाली "इच्छुक देशों की गठबंधन" की अंतर्राष्ट्रीय पहल है।

2. यह धीमी, आम सहमति आधारित सीओपी वार्ताओं से उत्पन्न हताशा के कारण है, जिन्होंने जीवाश्म ईंधन चरणबद्ध समाप्ति पर सहमति बनाने में कठिनाई का सामना किया है।

3. जीवाश्म ईंधन गैर-प्रसार संधि प्रस्ताव क्या है?
यह जीवाश्म ईंधन आपूर्ति को सीमित करने और वैश्विक जलवायु शासन में कमियों को दूर करने के लिये बाध्यकारी प्रतिबद्धताओं की मांग करता है।

4. सांता मार्टा सम्मेलन की एक प्रमुख सीमा क्या है?
अमेरिका, चीन और भारत जैसे प्रमुख उत्सर्जकों की अनुपस्थिति इसकी वैश्विक प्रभावशीलता एवं प्रभाव को कम कर देती है।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा, पिछले वर्ष के प्रश्न (PYQ)

प्रश्न. "मोमेंटम फॉर चेंज: क्लाइमेट न्यूट्रल नाउ" यह पहल किसके द्वारा प्रवर्तित की गई है? (2018)

(a) जलवायु परिवर्तन पर अंतर-सरकारी पैनल

(b) UNEP सचिवालय

(c) UNFCCC सचिवालय

(d) विश्व मौसमविज्ञान संगठन

उत्तर: (c)

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