भारतीय रिज़र्व बैंक की स्विच नीलामी | 26 Feb 2026

स्रोत: बिज़नेस स्टैंडर्ड

ऋण परिपक्वता का प्रबंधन करने और वित्त वर्ष 2027 में मोचन दबाव (रिडेंपशन प्रेशर) को कम करने के उद्देश्य से भारतीय रिज़र्व बैंक ने ₹25,000 करोड़ की सरकारी प्रतिभूतियों (G-Secs) की स्विच नीलामी की घोषणा की है। इससे पहले केंद्रीय बैंक कुल ₹84,804 करोड़ की दो ऐसी नीलामियाँ आयोजित कर चुका है।

  • जब बड़ी मात्रा में बॉण्ड या ऋण साधन एक ही समय पर परिपक्व हो जाते हैं और उनके पुनर्भुगतान या पुनर्वित्तपोषण की आवश्यकता होती है, ऐसी स्थिति में सरकार पर पड़ने वाले वित्तीय बोझ को मोचन दबाव कहा जाता है।
  • स्विच नीलामी: यह भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा प्रयुक्त एक ऋण प्रबंधन उपकरण है, जिसके माध्यम से सरकार अपने पुनर्भुगतान के बोझ को संतुलित करती है। इस प्रक्रिया में परिपक्वता के निकट अल्पकालिक बॉण्डों को नए दीर्घकालिक बॉण्डों से बदल दिया जाता है, जिससे भुगतान की बाध्यता आगे के वर्षों के लिये स्थगित हो जाती है।
  • परिपक्वता प्रोफाइल में परिवर्तन: हालिया ₹25,000 करोड़ की स्विच नीलामी का उद्देश्य वित्त वर्ष 2027 में देय ₹5.47 लाख करोड़ के बॉन्डों से उत्पन्न होने वाले मोचन दबाव को कम करना है।
    • वित्त वर्ष 2032 के बाद तक परिपक्वता अवधि को बढ़ाकर भारतीय रिज़र्व बैंक सरकार की ऋण संरचना को संतुलित करने, पुनर्वित्तपोषण जोखिम को कम करने तथा राजकोषीय स्थिरता बनाए रखने में सहायता करता है।
  • प्रभावी राजकोषीय प्रबंधन: सरकार का सकल बाज़ार उधार पहले ही ₹17.2 लाख करोड़ के उच्च स्तर पर निर्धारित होने के कारण स्विच नीलामी परिपक्वता प्रोफाइल को सुचारु रूप से संतुलित करती है और पुनर्भुगतान दायित्वों का प्रबंधन इस प्रकार संभव बनाती है कि तात्कालिक रूप से बड़ी नकद चलनिधि की आवश्यकता न पड़े।

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