लोकसभा अध्यक्ष को पद से हटाना | 14 Feb 2026
चर्चा में क्यों?
सांसदों (MPs) ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पद से हटाने की मांग करते हुए एक नोटिस प्रस्तुत किया है। बताया जा रहा है कि इस नोटिस पर 100 से अधिक सांसदों ने हस्ताक्षर किये हैं। इसमें ‘पक्षपातपूर्ण आचरण’ और नेता प्रतिपक्ष (LoP) को बोलने की अनुमति न दिये जाने को मुख्य कारण बताया गया है।
- इस कदम से लोकसभा अध्यक्ष को हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया एक बार फिर चर्चा में आ गई है।
लोकसभा अध्यक्ष को पद से हटाने की प्रक्रिया क्या है?
- संवैधानिक प्रावधान: संविधान का अनुच्छेद 94 उन परिस्थितियों को निर्दिष्ट करता है, जिनमें लोकसभा के अध्यक्ष या उपाध्यक्ष पद त्याग देते हैं।
- अनुच्छेद 94(a) के तहत, यदि वे लोकसभा के सदस्य नहीं रहते हैं तो वे स्वतः ही पद धारण करना छोड़ देते हैं।
- अनुच्छेद 94(b) उन्हें लिखित त्यागपत्र प्रस्तुत करके किसी भी समय इस्तीफा देने की अनुमति प्रदान करता है।
- अनुच्छेद 94(c) के तहत, उन्हें सदन के तत्कालीन सभी सदस्यों के बहुमत द्वारा पारित प्रस्ताव से हटाया जा सकता है।
- यह प्रावधान केवल लोकसभा पर लागू होता है, राज्यसभा पर नहीं।
- प्रक्रियात्मक आवश्यकताएँ: विशिष्ट चरण लोकसभा में कार्य संचालन और प्रक्रिया नियमों के नियम 200-203 द्वारा नियंत्रित होते हैं।
- 14 दिन का नोटिस: निष्कासन का प्रस्ताव कम-से-कम 14 दिन का नोटिस देने के बाद ही पेश किया जा सकता है।
- यह सूचना लोकसभा के महासचिव को लिखित रूप में दी जानी चाहिये, जिस पर कम-से-कम एक सदस्य के हस्ताक्षर होने चाहियें।
- प्रस्ताव की स्वीकृति: यदि प्रस्ताव विधिवत है तो उसे कार्यसूची में दर्ज किया जाता है।
- पीठासीन अधिकारी सदन को नोटिस पढ़कर सुनाते हैं कि किसी प्रस्ताव पर चर्चा के लिये उसे स्वीकार किये जाने हेतु सदन में कम-से-कम 50 सदस्यों का समर्थन आवश्यक है।
- यदि 50 से कम सदस्य खड़े होते हैं, तो प्रस्ताव को सदन की अनुमति नहीं मिलती और उसे रद्द कर दिया जाता है।
- प्रस्ताव के लिये सख्त दिशा-निर्देश: प्रस्ताव में लगाए गए आरोप विशिष्ट, स्पष्ट रूप से व्यक्त और सटीक होने चाहियें।
- इसमें तर्क-वितर्क, अनुमान, व्यंग्यात्मक अभिव्यक्ति, आरोप या मानहानि कारक बयान शामिल नहीं होने चाहियें।
- चर्चा को केवल प्रस्ताव में बताए गए आरोपों तक ही सीमित रखा जाना चाहिये।
- 14 दिन का नोटिस: निष्कासन का प्रस्ताव कम-से-कम 14 दिन का नोटिस देने के बाद ही पेश किया जा सकता है।
- प्रस्ताव पारित करना: निष्कासन के सफल होने के लिये, सदन के सभी सदस्यों के बहुमत से प्रस्ताव पारित होना आवश्यक है। तकनीकी रूप से इसे प्रभावी बहुमत कहा जाता है।
- परिणाम: यदि प्रस्ताव प्रभावी बहुमत से पारित हो जाता है, तो अध्यक्ष को तत्काल पद से हटा दिया जाएगा।
- विशेष रूप से, लोकसभा के भंग होने पर अध्यक्ष अपना पद नहीं छोड़ते हैं। अध्यक्ष नव निर्वाचित लोकसभा की पहली बैठक से ठीक पहले तक अपने पद पर बने रहते हैं।
- हालाँकि, यदि किसी व्यक्ति को प्रस्ताव द्वारा हटाया जाता है, तो वह तुरंत प्रभावी हो जाती है।
- कार्यवाही के दौरान अध्यक्ष की भूमिका: अध्यक्ष सदन की अध्यक्षता तब तक नहीं कर सकते, जब तक उनके निष्कासन के लिये कोई प्रस्ताव विचाराधीन हो (अनुच्छेद 96)।
- अध्यक्ष को सदन में बोलने और कार्यवाही में भाग लेने का अधिकार है। वे प्रथम दृष्ट्या (एक साधारण सदस्य के रूप में) मतदान कर सकते हैं, लेकिन मतों की समानता (टाई) की स्थिति में निर्णायक मत का प्रयोग नहीं कर सकते।
- ऐतिहासिक मामले: अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव केवल तीन बार ही पेश किये गए हैं:
- वर्ष 1954: जी.वी मावलंकर (प्रथम अध्यक्ष) के विरुद्ध।
- वर्ष 1966: हुकम सिंह के विरुद्ध।
- वर्ष 1987: बलराम जाखड़ के विरुद्ध।
- परिणाम: तीनों प्रस्ताव असफल रहे और इस प्रक्रिया के माध्यम से आज तक किसी भी अध्यक्ष को पद से नहीं हटाया गया है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. लोकसभा अध्यक्ष को किस अनुच्छेद के तहत हटाया जा सकता है?
अनुच्छेद 94(c) के तहत, सदन के उस समय के कुल सदस्यों के बहुमत से पारित प्रस्ताव द्वारा अध्यक्ष को हटाया जा सकता है।
2. ‘प्रभावी बहुमत’ (Effective Majority) का क्या अर्थ है?
इसका अर्थ है- लोकसभा के उस समय के कुल सदस्यों का बहुमत (रिक्त सीटों को छोड़कर), न कि केवल उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों का।
3. हटाने का प्रस्ताव लाने के लिये नोटिस की क्या प्रक्रिया है ?
नियम 200–203 के तहत महासचिव (सेक्रेटरी जनरल) को कम-से-कम 14 दिन पहले लिखित सूचना देना अनिवार्य है।
4. क्या अध्यक्ष हटाने की कार्यवाही के दौरान पीठासीन हो सकते हैं ?
नहीं। अनुच्छेद 96 के अनुसार, अध्यक्ष इस कार्यवाही के दौरान पीठासीन नहीं हो सकते, लेकिन वे भाग ले सकते हैं और पहली बार मतदान कर सकते हैं।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न
प्रश्न. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2017)
- लोकसभा अथवा राज्य की विधानसभा के चुनाव में जीतने वाले उम्मीदवार को निर्वाचित घोषित किये जाने के लिये किये गए मतदान का कम-से-कम 50 प्रतिशत मत पाना अनिवार्य है।
- भारत के संविधान में अधिकथित उपबंधों के अनुसार, लोकसभा में अध्यक्ष का पद बहुमत वाले दल को जाता है तथा उपाध्यक्ष का पद विपक्ष को जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर: (D)
प्रश्न. लोकसभा अध्यक्ष के पद के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2012)
- वह राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करता है।
- यह आवश्यक नहीं कि अपने निर्वाचन के समय वह सदन का सदस्य हो, परंतु अपने निर्वाचन के छह माह के भीतर सदन का सदस्य बनना होगा।
- यदि वह त्यागपत्र देना चाहे तो उसे अपना त्यागपत्र उपाध्यक्ष को संबोधित करना होगा।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 3
(c) 1, 2 और 3
(d) कोई नहीं
उत्तर: (b)