भारत के खाद्य सुरक्षा ढाँचे में सुधार | 18 Mar 2026

स्रोत: बीएल

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) ने खाद्य क्षेत्र में बड़े सुधारों को मंज़ूरी दी है। ये सुधार नीति आयोग की गैर-वित्तीय नियामक सुधारों पर गठित उच्च स्तरीय समिति की सिफारिशों के अनुरूप हैं। इन सुधारों का मुख्य उद्देश्य व्यापार सुगमता और मज़बूत खाद्य सुरक्षा के बीच एक उचित संतुलन स्थापित करना है।

भारत के खाद्य सुरक्षा ढाँचे में सुधार

  • लाइसेंस की शाश्वत वैधता: FSSAI ने समय-समय पर होने वाले नवीनीकरण (periodic renewals) की आवश्यकता को समाप्त कर दिया है, अब पंजीकरण और लाइसेंस 'शाश्वत वैधता' के होंगे। इससे खाद्य व्यवसाय संचालकों (FBOs) के लिये अनुपालन लागत और कागज़ी कार्रवाई में उल्लेखनीय कमी आएगी।
    • लाइसेंसिंग सीमाओं का युक्तीकरण राज्य अधिकारियों की भूमिका को मज़बूत करने के लिये किया गया है, जिससे वे नियमित नवीनीकरण के बजाय प्रवर्तन, निगरानी और क्षमता निर्माण पर संसाधनों को केंद्रित कर सकें।
  • संशोधित कारोबार सीमा: 1 अप्रैल, 2026 से पंजीकरण के लिये कारोबार की सीमा को 12 लाख रुपये से बढ़ाकर 1.5 करोड़ रुपये कर दिया गया है। लाइसेंसिंग के संबंध में 50 करोड़ रुपये तक के वार्षिक कारोबार वाले व्यवसायों के लिये राज्य लाइसेंसिंग लागू होगी। जिन व्यवसायों का कारोबार इस सीमा से अधिक है, उनके लिये केंद्रीय लाइसेंसिंग का प्रावधान किया गया है।
  • स्ट्रीट वेंडर्स के लिये डीम्ड रजिस्ट्रेशन: दोहरे अनुपालन को समाप्त करने के लिये स्ट्रीट वेंडर्स (आजीविका संरक्षण और स्ट्रीट वेंडिंग विनियमन) अधिनियम, 2014 के तहत पंजीकृत स्ट्रीट वेंडर्स को अब FSSAI के तहत डीम्ड रजिस्टर्ड माना जाएगा, जिससे 10 लाख से अधिक विक्रेताओं को लाभ होगा।
    • सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिये, ये उपाय तत्काल पंजीकरण, पूर्व-निरीक्षण की समाप्ति और लाइसेंसिंग अधिकारियों के साथ बातचीत में पर्याप्त कमी सुनिश्चित करते हैं।
  • जोखिम-आधारित निरीक्षण प्रणाली: खाद्य वस्तुओं की प्रकृति और खाद्य व्यवसाय संचालकों (FBO) के अनुपालन के पिछले रिकॉर्ड को ध्यान में रखते हुए निरीक्षण को प्राथमिकता देने के लिये एक नए  प्रौद्योगिकी-सक्षम और गतिशील जोखिम-आधारित निरीक्षण ढाँचे को लागू किया गया है।

भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI)

  • परिचय: FSSAI (भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण), खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के अंतर्गत स्थापित एक सर्वोच्च स्वायत्त वैधानिक निकाय है। इसका मुख्य कार्य खाद्य संबंधी कानूनों को समेकित करना और एक ही कमान के तहत सार्वजनिक स्वास्थ्य सुनिश्चित करना है।
    • यह स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) के अधीन कार्य करता है, जिसके अध्यक्ष का पद भारत सरकार के सचिव के समान होता है।
  • नियामक कार्य: इसे खाद्य उत्पादों के लिये नियम और मानक बनाने, लाइसेंस प्रदान करने और खाद्य सुरक्षा पर वैज्ञानिक अनुसंधान और जोखिम मूल्यांकन करने का अधिकार प्राप्त है।
  • प्रमुख अभियान: प्रमुख अग्रणी कार्यक्रमों में ईट राइट इंडिया, स्टेट फूड सेफ्टी इंडेक्स, RUCO (रीपर्पज़ यूज़्ड कुकिंग ऑयल) और फूड सेफ्टी मित्र योजना शामिल हैं।

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