RBI लीड बैंक स्कीम (LBS) में संशोधन | 21 Feb 2026
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने लीड बैंक स्कीम (LBS) के संचालन को सुव्यवस्थित करने, समन्वय तंत्र को मज़बूत बनाने और इसकी प्रभावशीलता को बढ़ाने के उद्देश्य से इसमें संशोधन के लिये मसौदा दिशा-निर्देश जारी किये हैं।
- संशोधन का उद्देश्य: इसका मुख्य उद्देश्य राज्य स्तरीय बैंकर्स समितियों (SLBCs) और लीड डिस्ट्रिक्ट मैनेजर (LDM) कार्यालयों को मज़बूत बनाना है, ताकि बैंकों, सरकारी निकायों और विकास एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सके।
- क्रेडिट-डिपॉज़िट (CD) अनुपात की निगरानी: बैंकों को CD अनुपात की निगरानी करनी होगी, जिसके लिये मसौदा दिशा-निर्देशों में देश भर की ग्रामीण और अर्द्ध-शहरी शाखाओं के लिये 60% का मानक निर्धारित किया गया है।
लीड बैंक स्कीम (LBS)
- परिचय: लीड बैंक योजना (LBS), जिसे RBI द्वारा दिसंबर 1969 में शुरू किया गया था, एक महत्त्वपूर्ण संस्थागत व्यवस्था है। इसका प्राथमिक उद्देश्य ‘क्षेत्रीय दृष्टिकोण’ के माध्यम से ज़िला स्तर पर समन्वित बैंकिंग विकास, प्राथमिकता क्षेत्र ऋण को बढ़ावा देना और वित्तीय समावेशन को प्रोत्साहित करना है।
- शुरुआत: इसकी शुरुआत वर्ष 1969 की दो समितियों की सिफारिशों के आधार पर हुई थी: गाडगिल स्टडी ग्रुप (जिसने ‘क्षेत्रीय दृष्टिकोण’ का समर्थन किया) और नरिमन समिति (जिसने इसका समर्थन किया और बैंकों को विशिष्ट ज़िलों को अपनाने की सिफारिश की)।
- इसे ‘सामाजिक बैंकिंग’ की अवधारणा को क्रियान्वित करने के लिये शुरू किया गया था, जिसमें सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के लिये विकासात्मक भूमिकाओं को वाणिज्यिक उद्देश्यों के साथ एकीकृत किया गया था।
- मुख्य उद्देश्य: प्राथमिकता वाले क्षेत्रों (कृषि, लघु एवं मध्यम उद्यम, कमज़ोर वर्ग) को बैंक ऋण का प्रवाह बढ़ाना, ऋण अंतराल को कम करने के लिये बैंकों और सरकारी एजेंसियों के प्रयासों में समन्वय स्थापित करना आदि।
- प्रमुख विशेषताएँ:
- बुनियादी इकाई: ऋण नियोजन के लिये ज़िला प्राथमिक इकाई के रूप में कार्य करता है (प्रारंभिक कार्यान्वयन में मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे प्रमुख महानगरों को छोड़कर)।
- लीड बैंक: RBI द्वारा प्रत्येक ज़िले के लिये एक वाणिज्यिक बैंक (आमतौर पर सार्वजनिक क्षेत्र का) को लीड बैंक के रूप में नामित किया जाता है।
- लीड डिस्ट्रिक्ट मैनेजर (LDM): लीड बैंक का एक समर्पित अधिकारी कार्यान्वयन की देखरेख करता है।
- सर्विस एरिया अप्रोच (SAA): इसकी शुरुआत अप्रैल 1989 में की गई थी। यह ग्रामीण ऋण वितरण को सुव्यवस्थित करने के लिये एक रणनीतिक दृष्टिकोण था, इसके तहत प्रत्येक ग्रामीण/अर्द्ध-शहरी बैंक शाखा को 15-25 गाँव का एक निश्चित समूह आवंटित किया गया था। इसका उद्देश्य नियोजित विकास सुनिश्चित करना, अतिव्यापीकरण (overlapping) को रोकना और क्रेडिट (ऋण) कवरेज की अपर्याप्तता को दूर करना था।