RBI की मौद्रिक नीति समिति की अपरिवर्तित रेपो दर | 07 Feb 2026
चर्चा में क्यों?
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने फरवरी 2026 की बैठक में रेपो दर को 5.25% पर अपरिवर्तित रखने का निर्णय लिया है। इससे पहले दिसंबर 2025 में इसमें 25 आधार अंकों की कटौती की गई थी।
- इस निर्णय का तात्पर्य ऋण और जमा दरों में तत्काल कोई बदलाव नहीं है। रेपो-लिंक्ड ऋणों (होम, पर्सनल लोन) पर EMI के स्थिर रहने की उम्मीद है।
RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) द्वारा की गई प्रमुख घोषणाएँ क्या हैं?
- मौद्रिक नीति का रुख: समिति ने "तटस्थ" (Neutral) मौद्रिक नीति रुख को बनाए रखने का निर्णय लिया है। इसका तात्पर्य है कि RBI भविष्य में ब्याज दरों को बढ़ाने या घटाने के लिये अभी प्रतिबद्ध नहीं है और यह निर्णय आने वाले आर्थिक आँकड़ों पर आधारित होगा।
- GDP वृद्धि का अनुमान (वित्त वर्ष 2025-26): RBI ने वित्त वर्ष 2025-26 (FY 26) के लिये सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि के अपने अनुमान को 7.3% से बढ़ाकर 7.4% कर दिया है।
- खुदरा मुद्रास्फीति का अनुमान (वित्त वर्ष 2025-26): RBI ने वित्त वर्ष 2026 के लिये खुदरा मुद्रास्फीति के अनुमान को भी पहले के 2.0% से मामूली रूप से बढ़ाकर 2.1% कर दिया है।
सकारात्मक घरेलू परिस्थितियाँ (नीति विराम को समर्थन देने वाली)
- मज़बूत और बढ़ती हुई वृद्धि: वित्त वर्ष 2026 में खपत लगभग 7% बढ़ने की उम्मीद के साथ, अर्थव्यवस्था में एक मज़बूत गति दिखाई दे रही है, जिसका अनुमानित विकास दर 7.4% (संशोधित) है। इस सकारात्मक रुझान को बजट में घोषित प्रोत्साहन (वित्त वर्ष 2026 में आयकर कटौती, GST का युक्तीकरण), पिछले 125 आधार अंकों की दर कटौती और नियंत्रित महंगाई जैसे कारकों का समर्थन मिल रहा है।
- आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 के अनुसार, वित्त वर्ष 27 में मज़बूत घरेलू मांग के कारण GDP 6.8% से 7.2% के बीच बढ़ने का अनुमान है।
- अनुकूल और नियंत्रित मुद्रास्फीति: दिसंबर 2025 में हेडलाइन मुद्रास्फीति 1.33% रही, जो भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा निर्धारित 2-6% की सीमा से काफी कम है। मूल (अंतर्निहित) मुद्रास्फीति भी कम और स्थिर बनी हुई है और यह संभावना है कि निकट भविष्य में यह लक्ष्य के करीब बनी रहेगी।
- हालिया विकास और प्रोत्साहन: केंद्रीय बजट 2026-27 के विकासोन्मुख राजकोषीय उपायों से खपत बढ़ने की उम्मीद है। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) इन उपायों के प्रभाव का आकलन करने के लिये स्थिर करने की नीति अपना रहा है, क्योंकि पिछली मौद्रिक नीति का असर अभी भी अर्थव्यवस्था में महसूस किया जा रहा है, इस कारण, तत्काल किसी अतिरिक्त मौद्रिक कार्रवाई की आवश्यकता कम हो गई है।
बाहरी जोखिम और अनिश्चितताएँ (सावधानी का औचित्य)
- बढ़ती वैश्विक चुनौतियाँ: भू-राजनीतिक जोखिमों और वैश्विक व्यापार तनावों में वृद्धि स्थिरता के लिये खतरा उत्पन्न कर रही है, जिसके लिये सतर्क निगरानी आवश्यक है।
उदाहरण: मध्य-पूर्व की अस्थिरता (इज़रायल-हमास संघर्ष तथा उससे जुड़ी अमेरिका-ईरान-इज़रायल की गतिशीलताएँ)। - नए व्यापार समझौतों के प्रभाव का आकलन आवश्यक: अमेरिका, यूरोपीय संघ, ओमान और न्यूज़ीलैंड के साथ नए व्यापार समझौते मध्यम अवधि में विकास के लिये सहायक हो सकते हैं, लेकिन उनका पूरा प्रभाव अभी सामने नहीं आया है। यह विराम उनके प्रभाव के मूल्यांकन का अवसर प्रदान करता है।
RBI की मौद्रिक नीति का रुख
- उदार मौद्रिक नीति रुख: यह ऋण को सस्ता बनाकर विकास को प्रोत्साहित करने के लिये ब्याज दरों को कम करने की ओर एक सोची-समझी प्रवृत्ति का संकेत देता है। इसे आमतौर पर तब अपनाया जाता है जब मुद्रास्फीति नियंत्रण में होती है, लेकिन अर्थव्यवस्था को समर्थन की आवश्यकता होती है।
- तटस्थ मौद्रिक नीति रुख: यह एक संतुलित और डेटा पर आधारित स्थिति है जिसमें कोई पूर्व-निर्धारित झुकाव नहीं होता। यह RBI को आने वाले व्यापक आर्थिक आँकड़ों के आधार पर नीतिगत दरों को किसी भी दिशा में समायोजित करने का लचीलापन प्रदान करता है।
- कैलिब्रेटेड टाइटनिंग: यह मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिये नीति में धीरे-धीरे कड़ाई लाने की सतर्क दिशा को दर्शाता है, जिसका अर्थ है कि दरें घटाने की संभावना कम है, जबकि बढ़ोतरी अभी भी संभावित है।
- हॉकिश मौद्रिक नीति रुख: यह नीति मुद्रास्फीति पर नियंत्रण को प्राथमिकता देती है, भले ही इसके कारण आर्थिक वृद्धि धीमी हो और यह अक्सर उच्च ब्याज दरों के माध्यम से लागू की जाती है।
- डोविश मौद्रिक नीति रुख: यह एक ऐसा नीतिगत दृष्टिकोण है जो विकास और रोज़गार को बढ़ावा देने का पक्षधर है, जो आमतौर पर कम ब्याज दरों के माध्यम से किया जाता है, भले ही मुद्रास्फीति (महंगाई) का जोखिम बढ़ा हुआ हो।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) का प्राथमिक दायित्व क्या है?
MPC का प्राथमिक दायित्व नीतिगत रेपो दर निर्धारित करना है, ताकि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित मुद्रास्फीति को 4% के लक्ष्य के आसपास, 2–6% की सहनशीलता सीमा के भीतर बनाए रखा जा सके।
2. RBI की ‘तटस्थ’ मौद्रिक नीति रुख और ‘उदार’ (Accommodative) रुख में क्या अंतर है?
‘तटस्थ’ रुख RBI को प्राप्त होने वाले नवीन आँकड़ों के आधार पर ब्याज दरों में समायोजन के लिये लचीलापन प्रदान करता है, जबकि ‘उदार’ रुख विकास को समर्थन देने हेतु ब्याज दरों में कमी की स्पष्ट प्रवृत्ति का संकेत देता है।
3. फरवरी 2026 की समीक्षा में RBI की MPC को रेपो दर स्थिर रखने में कौन-से प्रमुख घरेलू कारक सहायक रहे?
रेपो दर को स्थिर रखने में वित्त वर्ष 2025–26 की सशक्त एवं ऊर्ध्वगामी संशोधित आर्थिक वृद्धि (7.4%), अनुकूल मुद्रास्फीति (दिसंबर वर्ष 2025 में 1.33%), सुदृढ़ उपभोग तथा पूर्व दर में कटौतियों तथा राजकोषीय उपायों के विलंबित प्रभाव प्रमुख रूप से सहायक रहे।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ)
प्रश्न. यदि आरबीआई प्रसारवादी मौद्रिक नीति का अनुसरण करने का निर्णय लेता है, तो वह निम्नलिखित में से क्या नहीं करेगा? (2020)
- वैधानिक तरलता को घटाकर उसे अनुकूलित करना
- सीमांत स्थायी सुविधा दर को बढ़ाना
- बैंक दर को घटाना तथा रेपो दर को भी घटाना
नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर: (b)
प्रश्न. मौद्रिक नीति समिति (मोनेटरी पॉलिसी कमिटी/एमपीसी) के संबंध में निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं ? (2017)
- यह आरबीआई की मानक (बेंचमार्क) ब्याज दरों का निर्धारण करती है।
- यह एक 12-सदस्यीय निकाय है जिसमें आरबीआई का गवर्नर शामिल है तथा प्रत्येक वर्ष इसका पुनर्गठन किया जाता है।
- यह केंद्रीय वित्त मंत्री की अध्यक्षता में कार्य करती है।
नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:
(a) केवल 1
(b) केवल 1 और 2
(c) केवल 3
(d) केवल 2 और 3
उत्तर: (a)
