रैपिड फायर
बैड लोन पर RBI के प्रमुख दिशानिर्देश
- 28 Apr 2026
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भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 1 अप्रैल, 2027 से प्रभावी नए दिशानिर्देश जारी किये हैं, जो बैड लोन के वर्गीकरण और वसूली को नियंत्रित करने वाले नियमों को सख्त बनाने, क्रेडिट जोखिम प्रबंधन को मज़बूत करने और ढाँचे को वैश्विक स्तर पर स्वीकृत मानकों के अनुरूप लाने के लिये हैं।
- NPAs.ऋणकर्त्ता के स्तर पर NPA वर्गीकरण: सबसे महत्त्वपूर्ण परिवर्तन यह है कि यदि एकाधिक ऋणों वाले किसी ऋणकर्त्ता का एक ऋण गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (NPA) घोषित किया जाता है, तो उसके सभी ऋणों को अब NPA माना जाएगा।
- NPA वर्गीकरण के लिये मूल मापदंड 90 दिनों की अतिदेयता ही रहेगा।
- सख्त उन्नयन मानदंड: एक NPA ऋणकर्त्ता को केवल तब "मानक परिसंपत्ति" के रूप में उन्नत किया जाएगा, जब केवल डिफॉल्ट वाले ऋण के बजाय सभी ऋण सुविधाओं में ब्याज और मूलधन के संपूर्ण बकाए का पुनर्भुगतान कर दिया गया हो।
- अनिवार्य स्वचालित पहचान: RBI ने बैंकों को NPA की पहचान करने के लिये स्वचालित प्रणालियों को लागू करने का निर्देश दिया है, जिससे पुरानी मैन्युअल टैगिंग प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से समाप्त किया जा सके, सटीकता सुनिश्चित हो सके और मानवीय हस्तक्षेप को रोका जा सके।
- अपेक्षित ऋण हानि (ECL) ढाँचे की ओर बदलाव: RBI पुरानी 'उपगत हानि' पद्धति को एक सख्त अपेक्षित ऋण हानि (ECL) ढाँचे से प्रतिस्थापित कर रहा है।
- ECL तीन चरणों में हानि आवंटन की गणना करता है: निम्न/कोई ऋण जोखिम नहीं, ऋण जोखिम में महत्त्वपूर्ण वृद्धि और ऋण-ह्रास। इसके लिये आवश्यक है कि बैंक किसी ऋण के 90 दिनों से अतिदेय होने से पहले ही संभावित हानियों के लिये प्रावधान करें।
- प्रभावी ब्याज दर (EIR) का अनुप्रयोग: RBI ने ECL की गणना के लिये संविदात्मक ब्याज दर के स्थान पर प्रभावी ब्याज दर (EIR) के उपयोग को अनिवार्य कर दिया है।
- EIR का अनुमान अपेक्षित नकदी प्रवाह पर आधारित होगा, जिसमें संभावित ऋण हानि को छोड़कर सभी संविदात्मक शर्तों पर विचार किया जाएगा।
गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (NPA)
- एक NPA (गैर-निष्पादित परिसंपत्ति) वह ऋण या अग्रिम है जिसने बैंक के लिये आय उत्पन्न करना बंद कर दिया है, आमतौर पर तब जब ब्याज या मूलधन का भुगतान 90 दिनों से अधिक समय तक बकाया रहता है।
- सकल NPA ऐसे डिफॉल्ट ऋणों के कुल मूल्य का प्रतिनिधित्व करते हैं, जबकि शुद्ध NPA बैंकों द्वारा किये गए प्रावधानों को घटाने के बाद वास्तविक बोझ को दर्शाते हैं।
- RBI की 'ट्रेंड्स एंड प्रोग्रेस' रिपोर्ट से पता चलता है कि बैंकों की परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार हुआ है, जिससे सितंबर 2025 तक सकल NPA घटकर 2.1% और शुद्ध NPA 0.5% पर आ गया है।
- बैड बैंक एक विशेष वित्तीय संस्थान है जिसे बैंकों से इन NPA को खरीदने के लिये स्थापित किया गया है, जिससे उनका वित्तीय तनाव कम होता है और वे सामान्य ऋण देने की प्रक्रिया को पुनः शुरू करने में सक्षम होते हैं।
- यह बाद में इन खराब ऋणों का पुनर्गठन कर सकता है या उन्हें निवेशकों को बेच सकता है, जिसका प्राथमिक उद्देश्य लाभ कमाने के बजाय बैंकों की बैलेंस शीट को सही करना है।
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