Rapid Fire (करेंट अफेयर्स): 31 जुलाई, 2023 | 31 Jul 2023

डोंगरिया कोंध जनजाति

ओडिशा के नियमगिरि की पहाड़ियों में रहने वाले डोंगरिया कोंध जनजाति को वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 में प्रस्तावित संशोधनों के कारण संभावित खतरों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनकी पैतृक भूमि और सांस्कृतिक पहचान की सुरक्षा से संबंधित चिंता बढ़ गई है।

  • डोंगरिया कोंध जनजाति भारत के ओडिशा में 13 विशेष रूप से कमज़ोर जनजातीय समूह (PVTG) में से एक है।
  • प्रस्तावित वन संरक्षण (संशोधन) विधेयक, 2023 वर्ष 1996 में भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित 'वन' की परिभाषा को बदलने का प्रयास करता है।
  • संशोधन के अनुसार, 2023 का वन संरक्षण अधिनियम, केवल भारतीय वन अधिनियम, 1927 और 25 अक्तूबर, 1980 से सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार अधिसूचित 'वन' क्षेत्रों पर लागू होगा।
    • नियमगिरि की लगभग 95% भूमि को सरकारी रिकॉर्ड में 'वन' के रूप में वर्गीकृत नहीं किया गया है।
  • संशोधन संभावित रूप से सरकारी रिकॉर्ड में 'वन' के रूप में वर्गीकृत नहीं की गई भूमि को अन्य उद्देश्यों के लिये स्थानांतरित करने हेतु एक विंडो ओपन कर सकता है, जो नियमगिरि पहाड़ी शृंखला और ओडिशा के अन्य वन क्षेत्रों को प्रभावित कर सकता है।

और पढ़ें… डोंगरिया कोंध जनजाति, वन संरक्षण (संशोधन) विधेयक, 2023, भारत में प्रमुख जनजातियाँ


46,000 वर्ष पुराने कृमि और क्रिप्टोबायोसिस

पाँच वर्ष पूर्व वैज्ञानिकों ने साइबेरिया में दो जमे हुए (Frozen) जीवों, अति सूक्ष्म नेमाटोड (Nematodes) की खोज की और उन्हें पुनर्जीवित किया। PLOS जेनेटिक्स पत्रिका (journal PLOS Genetics) में प्रकाशित एक हालिया अध्ययन में इन प्राचीन जीवों के बारे में महत्त्वपूर्ण निष्कर्ष सामने आए हैं, जिससे पता चलता है कि ये कृमि 46,000 वर्ष पुराने हैं। यह अध्ययन क्रिप्टोबायोसिस (Cryptobiosis) की अविश्वसनीय घटना के संबंध में मूल्यवान अंतर्दृष्टि प्रदान करता है।

  • क्रिप्टोबायोसिस प्रतिकूल पर्यावरणीय परिस्थितियों की प्रतिक्रिया में अत्यधिक निष्क्रियता की स्थिति है। क्रिप्टोबायोटिक अवस्था में:
    • सभी चयापचय प्रक्रियाएँ रुक जाती हैं, जिससे प्रजनन, विकास तथा उपचार रुक जाता है।
    • जीव निष्क्रिय अवस्था में प्रवेश करके चरम स्थितियों में जीवित रह सकते हैं जहाँ वे जीवन और मृत्यु के बीच जीवित रहते हुए अपनी जीवन प्रक्रियाओं को रोक देते हैं।
  • यह अध्ययन नेमाटोड (Nematodes) में प्रलेखित क्रिप्टोबायोसिस अवधि को हज़ारों वर्षों तक महत्त्वपूर्ण रूप से बढ़ा देता है।
    • प्राचीन कृमियों की सुप्त अवस्था में जीवित रहने की उल्लेखनीय क्षमता का विकासवादी अध्ययनों तथा प्रजातियों के अनुकूलन को समझने पर गहरा प्रभाव पड़ता है, जो इस बात पर प्रकाश डालता है कि जंतु, जलवायु परिवर्तन के कारण निवास स्थान में होने वाले बदलावों को किस प्रकार सहन करते हैं।

न्याय विकास पोर्टल

हाल ही में केंद्रीय कानून और न्याय मंत्री ने लोकसभा में एक लिखित जवाब में न्याय विकास पोर्टल पर बहुमूल्य जानकारी प्रदान की।

  • न्याय विकास इसरो के राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग सेंटर की तकनीकी विशेषज्ञता के साथ विकसित एक ऑनलाइन अनुवीक्षण प्रणाली है।
    • न्याय विकास वेब पोर्टल और मोबाइल एप, जो न्याय से संबंधित बुनियादी ढाँचागत परियोजनाओं की प्रभावी और रियल टाइम निगरानी की सुविधा प्रदान करते हैं, को अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का उचित उपयोग करने के प्रयास में वर्ष 2018 में स्थापित किया गया था।
  • भारतीय न्यायपालिका में सुधार के लिये लक्षित अन्य पहलें:

मिशन-LiFE के साथ विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस

सभी क्षेत्रों में प्राकृतिक संसाधनों, जैव विविधता और पारिस्थितिकी को संरक्षित करने के उद्देश्य से प्रत्येक वर्ष 28 जुलाई को विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस मनाया जाता है।

  • राष्ट्रीय प्राणी उद्यान, नई दिल्ली ने विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस को मिशन-LiFE के लक्ष्यों के साथ मनाया।
  • UNFCCC COP26 में भारत के प्रधानमंत्री ने मिशन LiFE की शुरुआत की थी जिसका लक्ष्य वैश्विक जलवायु कार्यवाही में व्यक्तिगत व्यवहार को प्राथमिकता देना है।
    • LiFE का लक्ष्य अपशिष्ट 'उपयोग और निपटान' वाली अर्थव्यवस्था से 'सचेत एवं जान-बूझकर' उपभोग पर आधारित एक स्थायी चक्रीय अर्थव्यवस्था में बदलाव करना है।
  • विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस 2023 की थीम 'वन और आजीविका: लोगों और ग्रह को बनाए रखना' है।

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स्माइल-75 योजना:

हाल ही में सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के राज्य मंत्री ने राज्यसभा में एक लिखित उत्तर के दौरान SMILE-75 पहल पर बहुमूल्य अंतर्दृष्टि प्रदान की।

  • एक छत्र योजना के रूप में "स्माइल - आजीविका और उद्यमों में हाशिये पर रहने वाले व्यक्तियों हेतु सहायता" की उप-योजना भी शामिल है- यह 'भीख मांगने के कार्य में लगे व्यक्तियों के व्यापक पुनर्वास के लिये केंद्र की योजना' है।
  • स्माइल- 75 का उद्देश्य भारतीय शहरों/कस्बों एवं नगरपालिका क्षेत्रों को भिक्षावृत्ति मुक्त बनाने के साथ विभिन्न हितधारकों की समन्वित कार्रवाई के माध्यम से भिक्षावृत्ति के कार्य में लगे व्यक्तियों के व्यापक पुनर्वास के लिये एक रणनीति बनाना है।
  • वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, भारत में 4 लाख से अधिक भिखारी हैं। इस चार्ट में पश्चिम बंगाल शीर्ष पर है, उसके बाद उत्तर प्रदेश तथा बिहार क्रमशः दूसरे और तीसरे नंबर पर हैं।

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