चतुर्भुज सुरक्षा संवाद | 03 Jan 2026

स्रोत: द हिंदू

चतुर्भुज सुरक्षा संवाद (QUAD) देशों अमेरिका, भारत, ऑस्ट्रेलिया और जापान के राजदूतों ने बीजिंग में एक दुर्लभ सार्वजनिक बैठक की, जिसमें उन्होंने अपने संबंधों को ‘स्थिर और मज़बूत’ बताया।

  • परिचय: क्वाड की शुरुआत वर्ष 2004 की हिंद महासागर सुनामी के बाद एक मानवीय समन्वय तंत्र के रूप में हुई थी।
    • वर्ष 2007 में जापान के प्रधानमंत्री शिंज़ो आबे द्वारा मूल रूप से प्रस्तावित यह ढाँचा, वर्ष 2008 में ऑस्ट्रेलिया के पीछे हटने के बाद निष्क्रिय हो गया था, लेकिन वर्ष 2017 में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती आक्रामक सक्रियता की पृष्ठभूमि में इसे पुनर्जीवित किया गया।
    • यह क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग, समुद्री सुरक्षा, अवसंरचना और आपूर्ति शृंखला की सुदृढ़ता पर केंद्रित है, हालाँकि यह कोई औपचारिक सैन्य गठबंधन नहीं है।
  • क्वाड का विज़न: वर्ष 2021 के क्वाड नेताओं के शिखर सम्मेलन में ‘क्वाड की भावना (Spirit of the Quad)’ को अपनाया गया, जिसमें लोकतांत्रिक मूल्यों, विधि के शासन और दबाव/ज़बरदस्ती से मुक्ति पर आधारित एक स्वतंत्र, खुला तथा समावेशी हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति प्रतिबद्धता की पुनः पुष्टि की गई।
  • क्वाड की प्रमुख पहलें:
    • क्वाड एट सी शिप ऑब्ज़र्वर मिशन: क्वाड की विलमिंगटन घोषणा (2024) के तहत शुरू की गई यह पहल हिंद-प्रशांत क्षेत्र में पारस्परिक संचालन क्षमता, समुद्री क्षेत्र जागरूकता और परिचालन समन्वय को बढ़ाने के उद्देश्य से है।
    • मालाबार सैन्य अभ्यास: यह क्वाड देशों की भागीदारी वाला एक प्रमुख वार्षिक बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यास है, जिसका उद्देश्य हिंद-प्रशांत में समुद्री समन्वय, पारस्परिक संचालन क्षमता और तैयारियों को सुदृढ़ करना है।
  • विस्तार की संभावना: ‘क्वाड प्लस’ सहभागिताओं में दक्षिण कोरिया, न्यूज़ीलैंड और वियतनाम जैसे देश शामिल रहे हैं, जो भविष्य में इस समूह के विस्तार की संभावनाओं को दर्शाता है।
  • चीन का विरोध: चीन ने बार-बार क्वाड का विरोध किया है और इसे ‘नाटो जैसी गुटबंदी की राजनीति’ बताया है। साथ ही उसने तीसरे देशों को लक्षित करने वाले सहयोग के विरुद्ध चेतावनी दी है, जो हिंद-प्रशांत गठबंधनों के प्रति चीन की असहजता को रेखांकित करता है।
    • चीन के इन दावों के बावजूद, क्वाड के पास कोई पारस्परिक रक्षा संधि नहीं है। यह सामूहिक सैन्य रक्षा के बजाय रणनीतिक समन्वय, समुद्री सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और नियम-आधारित व्यवस्था पर केंद्रित है।

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