कल्पक्कम स्थित PFBR ने निर्णायक मोड़ प्राप्त की | 08 Apr 2026

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

हाल ही में तमिलनाडु के कल्पक्कम स्थित स्वदेशी विकसित प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) ने क्रिटिकलिटी हासिल की, जो भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम में महत्त्वपूर्ण प्रगति को दर्शाता है।

  • निर्णायक मोड़ वह अवस्था है जब एक परमाणु रिएक्टर स्व-धारित शृंखला अभिक्रिया प्राप्त कर लेता है, जिससे यह संकेत मिलता है कि रिएक्टर का कोर नियोजित रूप से कार्य कर रहा है और अब विद्युत उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ सकता है।

भारत का तीन-चरणों वाला परमाणु कार्यक्रम

  • परिचय: भारत का परमाणु कार्यक्रम सीमित यूरेनियम और प्रचुर थोरियम संसाधनों के कुशल उपयोग के लिये तीन-चरणीय क्रमिक रणनीति पर आधारित है: PHWRs → फास्ट ब्रीडर रिएक्टर → थोरियम-आधारित रिएक्टर।
  • दबावयुक्त भारी जल रिएक्टर (PHWRs): इनमें प्राकृतिक यूरेनियम को ईंधन के रूप में तथा भारी जल को शीतलक और मॉडरेटर के रूप में उपयोग किया जाता है। ये भारत की वर्तमान परमाणु ऊर्जा क्षमता (8,180 मेगावाट विद्युत) की रीढ़ हैं और कार्यक्रम के प्रथम चरण का प्रतिनिधित्व करते हैं।
    • भारत का लक्ष्य वर्ष 2032 तक 22,400 मेगावाट परमाणु ऊर्जा उत्पादन करना है और फ्लीट-मोड निर्माण के माध्यम से PHWR क्षमता का विस्तार करना है।
  • फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (FBR): फास्ट ब्रीडर रिएक्टर वह रिएक्टर होता है जो जितना ईंधन उपभोग करता है उससे अधिक ईंधन उत्पन्न करता है, क्योंकि यह उर्वर पदार्थ (जैसे– U-238) को विखंडनीय पदार्थ (जैसे– प्लूटोनियम) में परिवर्तित करता है। इसमें MOX ईंधन का उपयोग होता है और यह परमाणु ईंधन की उपलब्धता बढ़ाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
    • FBR प्लूटोनियम उत्पन्न करके और U-233 के उत्पादन को सक्षम करके यूरेनियम-आधारित रिएक्टरों और थोरियम-आधारित रिएक्टरों के बीच एक सेतु के रूप में कार्य करते हैं, जो तीसरे चरण के लिये आवश्यक है।
    • कल्पक्कम में भारत का प्रोटोटाइप 500 MWe FBR उन्नत कमीशनिंग में है। योजना में  समर्पित ईंधन चक्र सुविधा शामिल है।
    • एक बार परिचालन हो जाने पर भारत रूस के बाद वाणिज्यिक FBR चलाने वाला दूसरा देश होगा, जबकि कई देशों ने सुरक्षा चिंताओं के कारण ऐसे कार्यक्रम बंद कर दिये हैं।
  • थोरियम: थोरियम (Th-232), रिएक्टरों में विकिरण के माध्यम से विखंडनीय U-233 में परिवर्तित हो जाता है। यह भारत के विशाल थोरियम भंडार का उपयोग करके दीर्घकालिक ऊर्जा उत्पादन को सक्षम बनाता है।
    • भारत के पास विश्व स्तर पर सबसे बड़े थोरियम भंडारों में से एक है, जो तटीय और अंतर्देशीय रेत में पाए जाते हैं। थोरियम का उपयोग दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा प्राप्त करने और आयातित ईंधन पर निर्भरता कम करने की कुंजी है।
  • रणनीतिक महत्त्व: PFBR की प्रगति भारत के परमाणु कार्यक्रम के दूसरे चरण को सुदृढ़ करती है और विशाल थोरियम भंडार के भविष्य के उपयोग को सक्षम बनाती है, जबकि आयातित यूरेनियम और HALEU जैसे उन्नत ईंधन के साथ PHWR का उपयोग पूर्ण FBR तैनाती की प्रतीक्षा किये बगैर पहले थोरियम उपयोग की अनुमति देता है।
    • भविष्य की योजनाओं में थोरियम-आधारित रिएक्टर, मोल्टन साल्ट रिएक्टर (MSR) और विस्तारित ईंधन पुनर्चक्रण शामिल हैं, जिसका लक्ष्य ऊर्जा स्वतंत्रता और सतत परमाणु विकास है।

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