ऑम्निबस SRO फ्रेमवर्क | 27 Mar 2024

स्रोत: द हिंदू 

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने हाल ही में अपनी विनियमित संस्थाओं (Regulated Entities- RE) के लिये स्व-नियामक संगठनों (Self-regulatory Organizations- SRO) को मान्यता देने हेतु ऑम्निबस फ्रेमवर्क को अंतिम रूप देने की घोषणा की है।

  • फ्रेमवर्क का उद्देश्य विनियमित संस्थाओं के बढ़ते संचालन और नवीन प्रौद्योगिकियों को अपनाने के साथ-साथ स्व-नियमन के लिये उद्योग मानकों में सुधार करना है।

नोट:

  • RBI के मौद्रिक नीति वक्तव्य में एक घोषणा के बाद 21 दिसंबर, 2023 को सार्वजनिक टिप्पणियों के लिये प्रारूप फ्रेमवर्क जारी किया गया था।
  • ऑम्निबस फ्रेमवर्क को अंतिम रूप देने के लिये हितधारकों से प्राप्त इनपुट की जाँच की गई।

ऑम्निबस SRO फ्रेमवर्क क्या है?

  • ऑम्निबस फ्रेमवर्क स्व-नियामक संगठनों (SRO) को मान्यता देने के लिये दिशानिर्देशों और विनियमों का एक व्यापक सेट है।
  • ऑम्निबस SRO फ्रेमवर्क क्षेत्र की परवाह किये बिना सभी SRO के लिये सामान्य उद्देश्य, कार्य, पात्रता मानदंड और संचालन मानक निर्धारित करता है।
  • यह RBI द्वारा मान्यता प्राप्त होने के लिये SRO के लिये सदस्यता मानदंड और शर्तें भी स्थापित करता है।
  • यह फ्रेमवर्क न्यूनतम आवश्यकताओं का प्रतिनिधित्व करता है, और मान्यता प्राप्त SRO को अपनी सर्वोत्तम प्रथाओं को विकसित करने के लिये प्रोत्साहित करता है।
  • फ्रेमवर्क के व्यापक मापदंडों के भीतर, SRO को मान्यता देने के लिये आवेदन मांगते समय रिज़र्व बैंक क्षेत्र-विशिष्ट अतिरिक्त शर्तें लगा सकता है।
  • यह विभिन्न क्षेत्रों के लिये भिन्न-भिन्न सेक्टर-विशिष्ट दिशानिर्देश जारी करने की अनुमति देते हुए नियामक निरीक्षण के लिये एक समन्वित तथा एकीकृत दृष्टिकोण की सुविधा प्रदान करता है।
  • इसका उद्देश्य उन क्षेत्रों की अखंडता में विश्वास उत्पन्न करने के लिये SRO के भीतर पारदर्शिता, व्यावसायिकता एवं स्वतंत्रता को बढ़ावा देना है, जिन्हें वे विनियमित करते हैं।

नोट: 

  • RBI द्वारा मान्यता प्राप्त मौजूदा SRO अपने वर्तमान नियमों तथा शर्तों द्वारा शासित होते रहेंगे, जब तक कि फ्रेमवर्क विशेष रूप से उनके लिये विस्तारित नहीं किया जाता है।

 स्व-विनियामक संगठन:

  • SRO विशिष्ट उद्योगों अथवा क्षेत्रों के भीतर स्वयं को विनियमित करने के लिये बनाई गई संस्थाएँ हैं, जो प्राय: सरकारी नियामकों के सहयोग से संपन्न होती हैं।
  • SRO सरकारी नियामकों की देखरेख में कार्य करते हैं, जो इन संगठनों को कुछ नियामक कार्य सौंपते हैं। जबकि नियामक अंतिम अधिकार बनाए रखते हैं, वे अपने संबंधित उद्योगों के भीतर अनुपालन की निगरानी के साथ-साथ लागू करने के लिये SRO पर विश्वास व्यक्त करते हैं।
  • SRO का लक्ष्य अपने उद्योगों के भीतर सर्वोत्तम प्रथाओं के साथ ही नैतिक आचरण को बढ़ावा देना है। वे प्राय: सदस्यों को नियामक आवश्यकताओं को समझने तथा उनका अनुपालन करने में सहायता प्रदान करने हेतु मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और शैक्षिक संसाधन प्रदान करते हैं।
  • ये संगठन अपने सदस्यों के बीच अनुपालन और नैतिक व्यवहार सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उद्योग-विशिष्ट नियमों, मानकों तथा आचार संहिता को विकसित एवं लागू करते हैं।
  • SRO यह सुनिश्चित करने के लिये पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ काम करते हैं कि उनकी नियामक गतिविधियाँ सार्वजनिक हित में संचालित की जाती हैं।

  UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ)  

प्रिलिम्स:

प्रश्न. मौद्रिक नीति समिति (मोनेटरी पाॅलिसी कमिटी/MPC) के संबंध में निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? (2017)

  1. यह RBI की मानक (बेंचमार्क) ब्याज दरों का निर्धारण करती है।
  2. यह एक 12 सदस्यीय निकाय है जिसमें RBI का गवर्नर शामिल है तथा प्रत्येक वर्ष इसका पुनर्गठन किया जाता है।
  3. यह केंद्रीय वित्त मंत्री की अध्यक्षता में कार्य करती है।

नीचे दिये गए कूट का उपयोग कर सही उत्तर चुनिये:

(a) केवल 1
(b) केवल 1 और 2 
(c) केवल 3
(d) केवल 2 और 3

उत्तर: (a)


प्रश्न. यदि आर.बी.आई. प्रसारवादी मौद्रिक नीति का अनुसरण करने का निर्णय लेता है, तो वह निम्नलिखित में से क्या नहीं करेगा? (2020)

  1. वैधानिक तरलता अनुपात को घटाकर उसे अनुकूलित करना 
  2. सीमांत स्थायी सुविधा दर को बढ़ाना 
  3. बैंक दर को घटाना और रेपो दर को भी घटाना

नीचे दिये गए कूट का उपयोग करके सही उत्तर चुनिये:

(a) केवल 1 और
(b) केवल 2
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3

उत्तर: (b)