ओडिशा दिवस | 02 Apr 2026

स्रोत: पीआईबी

केंद्रीय गृहमंत्री और सहकारिता मंत्री ने ओडिशा दिवस के अवसर पर ओडिशा के लोगों को शुभकामनाएँ दीं।

  • स्थापना और महत्त्व: प्रत्येक वर्ष 1 अप्रैल को मनाया जाने वाला उत्कल दिवस (ओडिशा स्थापना दिवस) वर्ष 1936 में अलग उड़ीसा प्रांत के गठन की स्मृति में मनाया जाता है, जिससे यह ब्रिटिश शासन के दौरान भाषायी आधार पर गठित भारत का पहला राज्य बना।
  • ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य: इस क्षेत्र को प्राचीन काल में कलिंग के नाम से जाना जाता था, जिसे 261 ईसा पूर्व में मौर्य सम्राट अशोक ने जीत लिया था। 
    • बाद में महामेघवाहन वंश के राजा खारवेल ने एक शक्तिशाली राज्य की स्थापना की और इस क्षेत्र की समृद्ध कला और वास्तुकला को बढ़ावा देने का श्रेय उन्हीं को दिया जाता है।
    • गजपति मुकुंद देव ओडिशा के अंतिम हिंदू राजा थे, जिनकी वर्ष 1576 में हार के बाद यह क्षेत्र मुगलों के अधीन आ गया, इसके बाद मराठों और अंततः ब्रिटिश शासन के अधीन चला गया।
  • प्रशासनिक उपेक्षा: ब्रिटिश शासन के दौरान ओडिशा को विभाजित कर बंगाल प्रेसीडेंसी में मिला दिया गया था, जिससे ओड़िया भाषी क्षेत्र बंगाल, मद्रास, मध्य प्रांतों तथा बिहार में बिखर गए। इससे सांस्कृतिक पहचान और प्रशासनिक एकरूपता का ह्रास हुआ।
  • राज्य का दर्जा पाने का आंदोलन: एक अलग ओडिशा प्रांत की मांग की 1928 में एक ब्रिटिश उपसमिति द्वारा जाँच की गई, जिसका नेतृत्व क्लेमेंट एटली ने किया।
    • इसे वर्ष 1930 के गोलमेज़ सम्मेलन में महाराजा कृष्ण चंद्र गजपति द्वारा मज़बूत समर्थन मिला और वर्ष 1932 में सैमुअल ओ'डॉनेल की अध्यक्षता वाले सीमा आयोग ने इसके गठन की सिफारिश की।
    • अलग पहचान के लिये लंबे संघर्ष के बाद ओडिशा प्रांत का अंततः 1 अप्रैल, 1936 को गठन किया गया।
    • यह आंदोलन मुख्यतः अहिंसक रहा, जिसमें याचिकाओं, सम्मेलनों, बौद्धिक प्रयासों और युवाओं की भागीदारी पर बल दिया गया।
    • सर जॉन ऑस्टिन हब्बैक को इस प्रांत का पहला गवर्नर नियुक्त किया गया।
  • मुख्य अग्रदूत: इस आंदोलन का नेतृत्व मधुसूदन दास, गोपबंधु दास, फकीर मोहन सेनापति और पंडित नीलकंठ दास जैसे प्रमुख व्यक्तित्वों ने किया, जबकि उत्कल सम्मिलनी (ओडिशा एसोसिएशन) ने ओड़ियाभाषी क्षेत्रों को एकजुट करने में केंद्रीय भूमिका निभाई।
    • दिसंबर 1903 में कटक में आयोजित इसका पहला सम्मेलन अलग ओडिशा प्रांत की मांग से संबंधित प्रस्ताव पारित करने में अत्यंत महत्त्वपूर्ण था।
  • संवैधानिक विकास: प्रारंभ में इस राज्य का नाम उड़ीसा था, जिसे वर्ष 2011 में 113वें संवैधानिक संशोधन विधेयक, 2010 (जो बाद में 96वें संशोधन अधिनियम के रूप में लागू हुआ) तथा उड़ीसा (नाम परिवर्तन) विधेयक के माध्यम से आधिकारिक रूप से ओडिशा कर दिया गया।

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