रैपिड फायर
नीलगिरि में नए प्रागैतिहासिक शैल कला स्थल की खोज
- 29 Apr 2026
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हाल ही में याकाई हेरिटेज ट्रस्ट ने तमिलनाडु के नीलगिरि ज़िले में स्थित ‘ऊर पारे’ नामक एक प्रागैतिहासिक शैल चित्रकला स्थल की खोज की सूचना दी, जिससे इसके सांस्कृतिक और पुरातात्त्विक महत्त्व पर प्रकाश पड़ा।
- स्थान: यह स्थल कोटागिरि क्षेत्र के वेल्लरिकोम्बई गाँव के निकट स्थित है और समुद्र तल से लगभग 1100 मीटर की ऊँचाई पर अवस्थित है। यह शैलाश्रय परंपरागत रूप से स्वदेशी इरुला और कुरुम्बा समुदायों द्वारा, विशेषकर शहद संग्रहण गतिविधियों के दौरान, उपयोग में लाया जाता रहा है।
- संरचना: इस स्थल पर लगभग 30 स्पष्ट रूप से पहचानी जा सकने वाली आकृतियाँ तथा कई धुंधले रूपांकन दर्ज किये गए हैं, जिन्हें लाल गेरू (Red Ochre) से एकरंगी संरचना के रूप में चित्रित किया गया है।
- शैली: इन चित्रों को सूक्ष्म रेखाचित्रों, मोटी रेखाओं से बनी आकृतियों तथा ज्यामितीय मिश्रित रूपों की श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है।
- चित्रण: इस कलाकृति में शंक्वाकार हेडड्रेस/शिरोभूषण वाली मानवाकृतियाँ, दीर्घ मानवीय आकृतियाँ, सीढ़ीनुमा शारीरिक संरचनाएँ तथा पॉइंटेड आयताकार पैटर्न जैसे अनुष्ठानिक प्रतीक शामिल हैं, जो प्रागैतिहासिक अनुष्ठान प्रथाओं और अलौकिक विश्वासों से संबंधों का संकेत देते हैं।
- कालक्रम: पुनःरंगाई और अध्यारोपण के साक्ष्य विभिन्न सांस्कृतिक कालों में बहु-चरणीय कलात्मक गतिविधि की ओर संकेत करते हैं।
- अन्य स्थल: आस-पास के महत्त्वपूर्ण शैल कला स्थलों में एलुथुपरई और थोलिक्किपरई शामिल हैं, जो समान बहु-स्तरीय चित्रकला परंपराओं के लिये जाने जाते हैं।
