माइक्रो-एलईडी | 14 Feb 2023

एप्पल (Apple) कथित तौर पर माइक्रो-एलईडी (Micro-LEDs) नामक एक नई डिस्प्ले तकनीक पर काम कर रहा है, जिसे डिस्प्ले उद्योग में अगली बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

  • माइक्रो-एलईडी, स्व-प्रकाशमान डायोड हैं जिनमें ऑर्गेनिक लाइट एमिटिंग डायोड (OLED) डिस्प्ले तकनीक की तुलना में अधिक चमक और बेहतर रंग उत्पन्न होता है।  

माइक्रो-एलईडी (Micro-LEDs): 

  • परिचय:  
    • माइक्रो-एलईडी तकनीक नीलम के उपयोग पर आधारित है, जो अनिश्चित काल तक चमकने की क्षमता के लिये जानी जाती है।  
    • प्रौद्योगिकी में छोटे प्रकाश उत्सर्जक डायोड (LEDs) का उपयोग शामिल है जो अधिक चमक और उच्च-गुणवत्ता वाला डिस्प्ले बनाने के लिये एक साथ संयोजित किये जाते हैं।
    • OLED डिस्प्ले के विपरीत माइक्रो-एलईडी डिस्प्ले अकार्बनिक सामग्री जैसे- गैलियम नाइट्राइड का उपयोग करते हैं।
    • एक माइक्रो-एलईडी एक सेंटीमीटर बाल के 200वें हिस्से जितना छोटा है। इनमें से प्रत्येक माइक्रो-एलईडी अर्द्धचालक है जो विद्युत संकेत प्राप्त करते हैं।
    • एक बार जब ये माइक्रो-एलईडी इकट्ठे हो जाते हैं, तो वे एक मॉड्यूल बनाते हैं। स्क्रीन बनाने के लिये कई मॉड्यूल को जोड़ा जाता है। 
  • लाभ:  
    • बेहतर कलर रिप्रोडक्शन और व्यूइंग एंगल के साथ ब्राइट स्क्रीन।
    • असीमित मापनीयता, क्योंकि माइक्रो-एलईडी डिस्प्ले रेज़ोल्यूशन-फ्री, बेजल-फ्री, रेशियो-फ्री और यहाँ तक कि साइज़-फ्री भी हैं।
    • व्यावहारिक उपयोग के लिये किसी भी रूप में स्क्रीन को स्वतंत्र रूप से आकार देने की क्षमता।
    • सेल्फ इमिसिव माइक्रो-एलईडी जो निजी तौर पर बैकलाइटिंग या कलर फिल्टर की आवश्यकता के बिना लाल, हरे और नीले रंग का उत्सर्जन करते हैं।
  • चुनौतियाँ:  
    • विनिर्माण जटिलता: माइक्रो-एलईडी के निर्माण की प्रक्रिया अत्यधिक जटिल है क्योंकि उच्च गुणवत्ता वाली प्रदर्शन तकनीक के निर्माण हेतु कई कारकों पर सटीक नियंत्रण की आवश्यकता होती है।
    • लागत: माइक्रो-एलईडी डिस्प्ले के निर्माण की लागत वर्तमान में बहुत अधिक है, अतः तकनीक को व्यापक रूप से अपनाने हेतु सस्ती होने में कुछ समय लग सकता है।
    • विद्युत की खपत: माइक्रो-एलईडी को संचालित करने हेतु बहुत अधिक विद्युत की आवश्यकता होती है, जो उन्हें अन्य प्रदर्शन तकनीकों की तुलना में कम ऊर्जा दक्ष बना सकती है।

  UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न  

प्रश्न. सड़क प्रकाश व्यवस्था के संदर्भ में, सोडियम बत्तियाँ एल.ई.डी. बत्तियों से किस प्रकार भिन्न हैं? (2021)

  1. सोडियम बत्तियाँ प्रकाश को 360 डिग्री में उत्पन्न करती हैं लेकिन एल.ई.डी. बत्तियों में ऐसा नहीं होता है।
  2. सड़क की बत्तियों के रूप में, सोडियम बत्तियों की उपयोगिता अवधि अधिक होती है।
  3. सोडियम बत्ती के दृश्य प्रकाश का स्पेक्ट्रम लगभग एकवर्णी होता है जबकि एल.ई.डी. बत्तियाँ सड़क प्रकाश व्यवस्था में सार्थक वर्ण सुविधाएँ (कलर एडवांटेज) प्रदान करते हैं।

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:

(a) केवल 3 
(b) केवल 2
(c) केवल 1 और 3 
(d) 1, 2 और 3

उत्तर: (c)


प्रश्न. कार्बनिक प्रकाश उत्सर्जी डायोड (आर्गेनिक लाइट एमित्तिंग डायोड/ओएलइडी) का उपयोग बहुत से साधनों अंकीय प्रदर्श (डिजिटल डिस्प्ले) सर्जित करने के लिये किया जाता है। द्रव्य क्रिस्टल प्रदर्शों की तुलना में OLED प्रदर्श किस प्रकार लाभकारी है? (2017)

  1. OLED प्रदर्श नम्य प्लास्टिक अवस्तरों पर संविरचित किये जा सकते हैं।
  2. OLEDs के प्रयोग से, वस्त्र में अन्तः स्थापित उपरिवेल्लनीय प्रदर्श रोल्ड-अप डिस्प्ले बनाये जा सकते हैं।
  3. OLEDs के प्रयोग से पारदर्शी प्रदर्श संभव हैं।

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:

(a) केवल 1 और 3
(b) केवल 2
(c) 1, 2 और 3
(d) उपर्युक्त कथनों में से कोई भी सही नहीं है

उत्तर: (c)


प्रश्न. वर्ष 2014 में भौतिक विज्ञान में नोबेल पुरस्कार संयुक्त रूप से अकासाकी, अमानो और नाकामुरा को 1990 के दशक में नीली एलईडी के आविष्कार के लिये प्रदान किया गया था। इस आविष्कार ने मानव के दैनंदिन जीवन को किस प्रकार प्रभावित किया है? (2021)

स्रोत: द हिंदू