समुद्री और अंतरिक्ष जैव प्रौद्योगिकी | 15 Jan 2026

स्रोत: द हिंदू

भारत नीली अर्थव्यवस्था, डीप ओशन मिशन और BioE3 पहल के तहत समुद्री एवं अंतरिक्ष जैव प्रौद्योगिकी पर अपने प्रयासों को तेज़ कर रहा है, जिससे आयात निर्भरता कम हो और अगली पीढ़ी के जैव निर्माण में नेतृत्व स्थापित किया जा सके।

समुद्री जैव प्रौद्योगिकी क्या है?

  • परिचय: इसमें समुद्री सूक्ष्मजीवों, शैवाल और अन्य समुद्री जीवों का अध्ययन तथा अनुप्रयोग शामिल हैं, ताकि जैव-सक्रिय यौगिक, औद्योगिक एंज़ाइम, बायोमटेरियल, खाद्य सामग्री एवं बायोस्टिमुलेंट विकसित किये जा सकें।
    • ये जीव प्राकृतिक रूप से अत्यधिक दबाव, लवणता, कम रोशनी और पोषक तत्त्वों की कमी जैसी परिस्थितियों से अनुकूलित होते हैं, जिससे ये जलवायु-सहनशील जैव निर्माण के लिये अत्यंत मूल्यवान बन जाते हैं।
  • भारत की वर्तमान स्थिति: भारत में सिंचित समुद्री बायोमास (मुख्यतः शैवाल) लगभग 70,000 टन प्रतिवर्ष ही है। भारत अभी भी आगर, कैरेजीनन और एल्जिनेट्स का आयात करता है, जिनका उपयोग खाद्य, फार्मास्यूटिकल, कॉस्मेटिक और चिकित्सकीय उत्पादों में किया जाता है।
  • नीतिगत पहल: 'ब्लू इकोनॉमी' (नीली अर्थव्यवस्था) ढाँचा, 'डीप ओशन मिशन' और 'BioE3' जैसी नीतिगत पहलों का उद्देश्य एकीकृत समुद्री जैव विनिर्माण (Biomanufacturing) को बढ़ावा देना है, जो खेती (Cultivation), निष्कर्षण (Extraction) और अनुवर्ती (Downstream) अनुप्रयोगों को आपस में जोड़ता है।
    • मुख्य अभिनेता में ICAR- केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान (CMFRI), Sea6 Energy और ClimaCrew जैसी निजी कंपनियाँ और राज्य स्तर की पहलें शामिल हैं, जो उच्च मूल्य वाले समुद्री जैव उत्पादों का अन्वेषण कर रही हैं।
  • महत्त्व: भारत के पास 11,000 किमी. से अधिक तटरेखा और 2 मिलियन वर्ग किमी. से अधिक का विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) है, जो इसे विश्व के सबसे समृद्ध समुद्री जैव विविधता भंडारों में से एक तक पहुँच प्रदान करता है।
    • समुद्री जैव निर्माण नए भोजन, रसायन, जैव ईंधन और बायोमटेरियल के स्रोत खोल सकता है, साथ ही भूमि, स्वच्छ जल और कृषि पर दबाव को कम करने में सहायता करता है।

अंतरिक्ष जैव प्रौद्योगिकी (स्पेस बायोटेक्नोलॉजी) क्या है?

  • परिचय: अंतरिक्ष जैव प्रौद्योगिकी यह अध्ययन करती है कि सूक्ष्मजीव, पौधे और मानव जैविक प्रणाली माइक्रोग्रैविटी और विकिरण परिस्थितियों में कैसे प्रतिक्रिया करते हैं। इसके अनुप्रयोगों में शामिल हैं:
    • अंतरिक्ष आधारित भोजन उत्पादन
    • क्लोज़्ड-लूप जीवन समर्थन प्रणाली का पुनर्जनन
    • सामग्रियों के लिये सूक्ष्मजीव जैव निर्माण
    • अंतरिक्ष यात्रियों के स्वास्थ्य प्रबंधन, जिसमें माइक्रोबायोम और प्रोबायोटिक अनुसंधान शामिल हैं।
  • भारत की प्रगति: ISRO का माइक्रोग्रैविटी बायोलॉजी प्रोग्राम सूक्ष्मजीव, शैवाल और जैविक प्रणालियों पर प्रयोग कर रहा है।
    • यह अनुसंधान दीर्घकालिक मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशनों का समर्थन करता है, जिसमें अंतरिक्ष में पोषण, स्वास्थ्य और सततता से जुड़े मुद्दों को संबोधित किया जाता है।
    • निजी क्षेत्र की भागीदारी सीमित है क्योंकि यह क्षेत्र अभी प्रारंभिक और अनुसंधान-प्रधान है।
  • महत्त्व: अंतरिक्ष जैव प्रौद्योगिकी भारत की मानव अंतरिक्ष उड़ान महत्त्वाकांक्षाओं के लिये अत्यंत महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि यह सुरक्षित भोजन उत्पादन, जीवन-समर्थन प्रणाली का पुनर्जनन और दीर्घकालिक अंतरिक्ष यात्रियों के स्वास्थ्य प्रबंधन को सक्षम बनाती है।

समुद्री और अंतरिक्ष जैव प्रौद्योगिकी में वैश्विक पहलें

देश/क्षेत्र

प्रमुख पहलें

यूरोपीय संघ (EU)

बड़े पैमाने पर समुद्री जैव अन्वेषण (क्षितिज यूरोप/Horizon Europe के अंतर्गत), शैवाल बायोमटेरियल और जैव-सक्रिय यौगिक कार्यक्रम, जो साझा अनुसंधान अवसंरचना द्वारा समर्थित हैं।

चीन

समुद्री शैवाल की जल-खेती का तीव्र विस्तार, जो गहरे समुद्र अन्वेषण और औद्योगिक समुद्री जैव प्रक्रियाकरण के साथ एकीकृत है।

अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया

व्यापक समुद्री और अंतरिक्ष जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान पारिस्थितिक तंत्र।

अमेरिका (NASA), ESA, JAXA, चीन (Tiangong)

प्रोटीन क्रिस्टलीकरण, पौधों की वृद्धि, माइक्रोबायोम, पुनर्योजी चिकित्सा और क्लोज़्ड-लूप जीवन-समर्थन प्रणालियों पर माइक्रोग्रैविटी अनुसंधान।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. ओशन मिशन क्या है?
यह भारत का प्रमुख मिशन है, जिसका उद्देश्य गहरे समुद्र की खोज, मानवयुक्त पनडुब्बियों का संचालन तथा खनिज, ऊर्जा और जैव प्रौद्योगिकी के लिये समुद्री जैव संसाधनों का जैव-अन्वेषण करना है।

2. ब्लू इकोनॉमी फ्रेमवर्क क्या है?
यह भारत का नीतिगत दृष्टिकोण है, जिसका उद्देश्य महासागरीय संसाधनों के सतत उपयोग के माध्यम से आर्थिक वृद्धि, आजीविका, जलवायु लचीलापन तथा समुद्र‑आधारित उद्योगों को बढ़ावा देना है।

3. BioE3 पहल क्या है?
यह भारत की जैव अर्थव्यवस्था विस्तार पहल है, जो उच्च मूल्य वाले जैव विनिर्माण और हरित जैव प्रसंस्करण के माध्यम से अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोज़गार पर केंद्रित है।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न

प्रिलिम्स

प्रश्न. पीड़कों को प्रतिरोध के अतिरिक्त, वे कौन-सी संभावनाएँ हैं जिनके लिये आनुवंशिक रूप से रूपांतरित पादपों का निर्माण किया गया है? (2012)

  1. सूखा सहन करने के लिये उन्हें सक्षम बनाना
  2. उत्पाद में पोषकीय मान बढ़ाना
  3. अंतरिक्ष यानों और अंतरिक्ष स्टेशनों में उन्हें उगने और प्रकाश संश्लेषण करने के लिये सक्षम बनाना
  4. उनकी शेल्फ लाइफ बढ़ाना

निम्नलिखित कूटों के आधार पर सही उत्तर चुनिये:

(a) केवल 1 और 2

(b) केवल 3 और 4

(c) केवल 1, 2 और 4

(d) 1, 2, 3 और 4

उत्तर: (c)


प्रश्न. कवकमूलीय (माइकोराइज़ल) जैव प्रौद्योगिकी को निम्नीकृत स्थलों के पुनर्वासन में उपयोग में लाया गया है, क्योंकि कवकमूल के द्वारा पौधों में: (2013)

  1. सूखे का प्रतिरोध करने एवं अवशोषण क्षेत्र बढ़ाने की क्षमता आ जाती है
  2. pH की अतिसीमाओं को सहन करने की क्षमता आ जाती है
  3. रोगग्रस्तता से प्रतिरोध की क्षमता आ जाती है

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:

(a) केवल 1

(b) केवल 2 और 3

(c) केवल 1 और 3

(d) 1, 2 और 3

उत्तर: (d)