मणिपुर विधानसभा संवैधानिक गतिरोध | 04 Feb 2026

स्रोत: द हिंदी

मणिपुर कांग्रेस अध्यक्ष ने मणिपुर उच्च न्यायालय में याचिका दायर किया है, जिसमें उन्होंने फरवरी 2025 में राष्ट्रपति शासन लगाने से पहले राज्यपाल द्वारा की गई असंवैधानिक कार्रवाई का आरोप लगाया है और संविधान के अनुच्छेद 174 के तहत मणिपुर विधानसभा के विघटन की मांग की है।

  • मामले की पृष्ठभूमि: मणिपुर में 60 सदस्यों वाली विधानसभा है। विधानसभा की आखिरी बैठक 12 अगस्त 2024 को आयोजित की गई थी। 
    • संविधान के अनुच्छेद 174(1) के तहत दो विधानसभा बैठकों के बीच छह महीने से अधिक समय नहीं निकल सकता। इसलिये विधानसभा को 11 फरवरी, 2025 तक बुलाना अनिवार्य था।
    • 9 फरवरी, 2025 को, मुख्यमंत्री के इस्तीफे के बाद, राज्यपाल ने समन आदेश को रद्द कर दिया और सत्र को अमान्य घोषित कर दिया।
    • फलस्वरूप विधानसभा संविधान के अनुच्छेद 174(1) के तहत निर्धारित छह महीने की अवधि के भीतर नहीं बुलाई जा सकी।
  • संवैधानिक बहस: याचिकाकर्त्ता का तर्क है कि विधानसभा सत्र रद्द करने से अनुच्छेद 174(1) को दरकिनार किया गया और अनिवार्य फ्लोर टेस्ट का अवसर छीना गया, जिससे संवैधानिक नैतिकता का उल्लंघन हुआ। इसके कारण बारहवीं मणिपुर विधानसभा संवैधानिक रूप से अस्थिर हो गई है और इसका विघटन आवश्यक है।
    • घटनों की यह शृंखला कथित रूप से राष्ट्रपति शासन लगाने में सहायक रही, जिससे संवैधानिक मशीनरी और राज्यपाल की विवेकाधिकारिता के दुरुपयोग को लेकर गंभीर चिंताएँ उत्पन्न हुई हैं।
  • न्यायिक प्रतिक्रिया: मणिपुर उच्च न्यायालय ने यह देखा कि यह मामला अनुच्छेद 174 की व्याख्या से जुड़ा है और यह एक महत्त्वपूर्ण संवैधानिक प्रश्न प्रस्तुत करता है। इस मामले को डिवीजन बेंच में सूचीबद्ध करने के लिये मुख्य न्यायाधीश के पास भेजा गया।
  • अनुच्छेद 174: यह राज्य विधानमंडल के सत्र, स्थगन और विघटन से संबंधित है। यह यह अनिवार्य करता है कि राज्यपाल हर छह महीने में कम-से-कम एक बार विधानसभा को बुलाएँ, ताकि दो बैठकों के बीच छह महीने से अधिक समय न गुजर सके।
    • यह अनुच्छेद राज्यपाल को विधानसभा का सत्र स्थगित करने या विधानसभा को भंग करने का अधिकार भी प्रदान करता है।

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