मैड काऊ डिज़ीज़ | 25 Feb 2023

ब्राज़ील के उत्तरी राज्य, पारा में मैड काऊ डिज़ीज़ (Mad Cow Disease) का मामला सामने आने के बाद से ब्राज़ील ने चीन को बीफ का निर्यात बंद कर दिया है।

Mad-Cow-Disease

मैड काऊ डिज़ीज़:

  • परिचय: 
    • इसे बोवाइन स्पॉन्जिफॉर्म एन्सेफैलोपैथी के नाम से भी जाना जाता है, यह एक प्रकार का अपक्षयी, संक्रामक, धीरे-धीरे विकसित होने वाला और घातक संक्रमण है जो वयस्क मवेशियों के केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है।
  • कारण: 
    • BSE एक प्रोटीन के कारण होता है जिसे सामान्य रूप से प्रायन (Prion) कहा जाता है, यह कोशिका की सतहों पर पाया जाता है, जब सामान्य प्रियन प्रोटीन एक असामान्य प्रायन प्रोटीन में बदल जाता है जो हानिकारक होता है।
      • ये प्रोटीन परिवर्तित होने के बाद तंत्रिका तंत्र के ऊतकों-मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी को नष्ट कर देते हैं।
    • बीमार गाय का शरीर एक असामान्य प्रायन की उपस्थिति से पूरी तरह अनभिज्ञ होता है। गाय का शरीर उस स्थिति में बीमारी से नहीं लड़ सकता अगर इसकी उपस्थिति से अनभिज्ञ हो।
  • संचरण: 
    • एक गाय द्वारा दूसरी गाय में उसके BSE-संक्रमित भागों से दूषित चारा खाने से संचरित होता है। 
  • लक्षण: 
    • गायों में BSE का एक आम लक्षण असामंजस्य (Incoordination) है। एक बीमार गाय को चलने एवं उठने में परेशानी होती है तथा वह बहुत घबराई हुई या हिंसक भी हो सकती है। 
    • आमतौर पर एक गाय के असामान्य प्रायन (Prion) से संक्रमित होने से लेकर BSE के प्रथम बार लक्षण दिखने तक चार से छह वर्ष लगते हैं। इसे ऊष्मायन अवधि कहा जाता है। ऊष्मायन अवधि के दौरान गाय को देखकर यह बताने का कोई तरीका नहीं है कि उसे BSE है।
    • किसी गाय में एक बार जब लक्षण दिखने शुरू हो जाते हैं, तो वह बीमार और कमज़ोर होती जाती है जब तक कि उसकी मृत्यु नहीं हो जाती, आमतौर पर दो सप्ताह से छह महीने के भीतर।  
  • उपचार: 
    • BSE का कोई इलाज नहीं है और इसे रोकने के लिये कोई टीका भी नहीं है।

स्रोत: हिंदुस्तान टाइम्स