LHS 1903 प्रणाली | 16 Feb 2026

स्रोत: द हिंदू

खगोलविदों ने यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) के Cheops अंतरिक्ष टेलीस्कोप का उपयोग करके लाल बौना तारा LHS 1903 के चार ग्रहों वाली अनूठी प्रणाली की खोज की है, जिसमें ग्रहों की व्यवस्था वर्तमान ग्रह निर्माण सिद्धांतों को चुनौती देती है।

  • प्रणाली का अवलोकन: इस तंत्र में चार ग्रह शामिल हैं - दो सुपर-अर्थ (चट्टानी) और दो मिनी-नेपच्यून (गैसीय), जो पृथ्वी से 117 प्रकाशवर्ष दूर स्थित एक लाल बौने तारे की परिक्रमा कर रहे हैं।
  • निर्माण का विरोधाभास: पारंपरिक मॉडल यह सुझाव देते हैं कि चट्टानी ग्रहों (Rocky Planets) का निर्माण तारे के समीप होता है, जबकि गैस जाइंट ग्रह का निर्माण उससे अधिक दूरी पर होता है।
    • हालाँकि LHS 1903 का सबसे बाहरी (चौथा) ग्रह चट्टानी (Rocky) है, जबकि वह अपने गैसीय साथियों (Gaseous Siblings) की तुलना में तारे से अधिक दूरी पर स्थित है।
    • शोधकर्त्ताओं का सुझाव है कि इन ग्रहों का निर्माण एक के बाद एक हुआ, जिससे चौथे ग्रह के बनने से पहले ही उपलब्ध गैस समाप्त हो गई या फिर किसी विनाशकारी घटना के कारण चौथे ग्रह ने अपना वायुमंडल खो दिया, जिससे वह केवल एक चट्टानी बाहरी ग्रह के रूप में रह गया।
  • चट्टानी ग्रह: इन चट्टानी ग्रहों को 'सुपर-अर्थ' के रूप में वर्गीकृत किया गया है, जिनकी संरचना पृथ्वी के समान है लेकिन इनका द्रव्यमान पृथ्वी से दो से दस गुना अधिक है।
  • सब-नेपच्यून पड़ोसी: बीच के दो ग्रह मिनी-नेपच्यून हैं, जो पृथ्वी से बड़े लेकिन नेपच्यून से छोटे हैं और मोटे गैसीय आवरण से विशिष्ट हैं।
  • रहने योग्य होने की संभावना: चौथा ग्रह विशेष वैज्ञानिक रुचि का विषय है क्योंकि इसका अनुमानित सतह का तापमान 60°C है, जो इसे ऐसी श्रेणी में रखता है जहाँ संभावित रूप से जीवन का समर्थन संभव हो सकता है।
  • तारे की विशेषताएँ: मुख्य तारा LHS 1903 एक लाल बौना तारा है, जो सूर्य के द्रव्यमान का लगभग 50% से कम और चमक का बहुत छोटा हिस्सा (अक्सर 5% से भी कम) रखता है, आकाशगंगा (Milky Way) में सबसे सामान्य प्रकार का तारा है।

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