जापान की गहन-समुद्री दुर्लभ मृदा खनन पहल | 16 Jan 2026

स्रोत: द हिंदू

जापान ने लगभग 6,000 मीटर की गहराई पर गहन समुद्र (डीप सी) से दुर्लभ मृदा तत्त्वों के निष्कर्षण का विश्व का पहला प्रायोगिक प्रयास शुरू किया है। इसके लिये वह अपने गहन-समुद्री वैज्ञानिक ड्रिलिंग पोत ‘चिक्यू (Chikyu)’ का उपयोग कर रहा है।

  • इस पहल का उद्देश्य जापान की चीन पर भारी निर्भरता को कम करना है, जो विश्व के लगभग दो-तिहाई दुर्लभ मृदा खनन और 90% से अधिक परिष्कृत उत्पादन के लिये ज़िम्मेदार है।
  • मिनामी तोरिशिमा के बारे में: यह परीक्षण मिशन मिनामी तोरिशिमा के पास संचालित किया जा रहा है, जो प्रशांत महासागर में जापान के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) में स्थित एक दूरस्थ द्वीप है।
    • मिनामी तोरिशिमा के आस-पास क्षेत्र में 1,60,00,000 टन से अधिक दुर्लभ मृदा भंडार होने का अनुमान है, जिसमें डिस्प्रोसियम के लिये 730 वर्ष और इट्रियम के लिये 780 वर्ष पर्याप्त भंडार शामिल हैं, जो दोनों इलेक्ट्रिक वाहन, इलेक्ट्रॉनिक्स, पवन टरबाइन एवं रक्षा प्रणालियों हेतु महत्त्वपूर्ण हैं।
  • गहन-समुद्री खनन (Deep Sea Mining): इसमें 200 मीटर से अधिक गहराई वाले समुद्र तल से खनिज भंडार निकालने की प्रक्रिया शामिल है, जो विश्व के समुद्र तल के लगभग दो-तिहाई क्षेत्र को कवर करता है और इसका उपयोग औद्योगिक उद्देश्यों के लिये किया जाता है।
    • यह तीन तरीकों से संचालित होता है- पॉलीमेटैलिक नोड्यूल्स एकत्रित करना, समुद्र तल के सल्फाइड भंडार का खनन करना और कोबाल्ट-समृद्ध परतों को हटाना।
    • पर्यावरण समूह चेतावनी देते हैं कि गहन-समुद्री खनन समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र और जैव विविधता के लिये खतरा है, जबकि अंतर्राष्ट्रीय समुद्रतल प्राधिकरण (ISA) अंतर्राष्ट्रीय जलक्षेत्रों में खनन के लिये वैश्विक नियामक ढाँचे पर काम कर रहा है।
  • दुर्लभ मृदा तत्त्व (Rare Earth Elements- REE): दुर्लभ मृदा तत्त्व 17 धातुओं का समूह हैं, जिन्हें निकालना और परिष्कृत करना कठिन होता है, लेकिन ये इलेक्ट्रिक वाहन की बैटरियाँ, पवन टरबाइन, इलेक्ट्रॉनिक्स, स्मार्टफोन, कंप्यूटर और मिसाइल प्रणालियों के लिये अत्यंत आवश्यक हैं।

Deep_Sea_Mining

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