निष्क्रिय अवस्था (जड़ता की स्थिति) में IVF | 16 Apr 2026

स्रोत: द हिंदू 

दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक महिला के पति—जो एक सैनिक हैं और वर्तमान में निष्क्रिय अवस्था (जड़ता की स्थिति) में है—के जीन का उपयोग करके इन-विट्रो फर्टिलाइज़ेशन (IVF)  प्रक्रिया जारी रखने के उसके अधिकार के पक्ष में फैसला सुनाया है। यह कहते हुए कि उसकी वर्तमान चिकित्सा स्थिति के बावजूद उसकी पूर्व सहमति मान्य बनी हुई है।

  • संवैधानिक अधिकार: सैनिक की पत्नी ने अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) के तहत मातृत्व, गरिमा और प्रजनन स्वायत्तता के अपने अधिकार का आह्वान करते हुए IVF उपचार पुनः शुरू करने के लिये न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया।
  • सहमति पर दिल्ली उच्च न्यायालय का फैसला: न्यायालय ने कहा कि सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (विनियमन) अधिनियम, 2021 के तहत इस अनूठी स्थिति में पत्नी की सहमति को कानूनी रूप से उसके पति की ओर से वैध सहमति के रूप में माना जाएगा।
    • चिकित्सा बोर्ड द्वारा व्यवहार्य शुक्राणु प्राप्त करने की "अत्यल्प" संभावना बताए जाने के बावजूद, न्यायालय ने प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की अनुमति प्रदान की।

इन-विट्रो फर्टिलाइज़ेशन (IVF)

  • यह बाँझपन के इलाज के लिये व्यापक रूप से उपयोग की जाने वाली सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकियों (ART) में से एक है, जहाँ एक महिला के अंडों को प्रयोगशाला में शरीर के बाहर शुक्राणु के साथ निषेचित किया जाता है और परिणामी भ्रूण को गर्भावस्था प्राप्त करने के लिये गर्भाशय में स्थानांतरित किया जाता है।
  • भारत में ART सेवाओं को सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (विनियमन) अधिनियम, 2021 के तहत विनियमित किया जाता है, जो क्लीनिकों, दान और क्रायोप्रिज़र्वेशन के लिये मानक निर्धारित करता है, जबकि केंद्रीय सरकार स्वास्थ्य योजना (CGHS) के तहत पात्रता शर्तों के अधीन IVF चक्रों के लिये प्रतिपूर्ति के माध्यम से वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।

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