डॉग स्क्वाड में स्वदेशीकरण की दिशा में असम राइफल्स की पहल | 13 Feb 2026
असम राइफल्स ने वर्ष 2050 तक विदेशी कुत्ता नस्लों को चरणबद्ध तरीके से हटाने की योजना बनाई है। यह निर्णय गृह मंत्रालय (MHA) के 2025 के उस निर्देश के अनुरूप है, जिसमें सशस्त्र बलों के डॉग स्क्वाड में भारतीय नस्लों को शामिल करने पर बल दिया गया है।
- तांगखुल हुई नस्ल: यह उखरुल ज़िले (मणिपुर) की मूल नस्ल है। यह अत्यधिक रोग-प्रतिरोधी है तथा परंपरागत रूप से शिकार के लिये प्रयुक्त होती रही है।
- कोंबई नस्ल: तमिलनाडु की एक स्वदेशी नस्ल, कोंबई को तांगखुल हुई के साथ उपयुक्त साझेदार नस्ल के रूप में चिह्नित किया गया है।
- प्रशिक्षण एवं तैनाती: इन कुत्तों को जोरहाट स्थित असम राइफल्स डॉग ट्रेनिंग सेंटर में प्रशिक्षण दिया जाता है, जो बल की इस प्रकार की एकमात्र प्रशिक्षण सुविधा है। इसके पश्चात इन्हें परिचालन क्षेत्रों में गार्ड तथा ट्रैकर डॉग के रूप में तैनात किया जाता है।
- परिचालन भूमिका: ये कुत्ते विशेष रूप से उत्तर-पूर्व क्षेत्र तथा जम्मू-कश्मीर में हथियार, विस्फोटक और मादक पदार्थों की पहचान एवं खोज में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- वर्तमान बनाम भावी संरचना: वर्तमान में बल द्वारा बेल्जियन मेलिनोइस, जर्मन शेफर्ड तथा लैब्राडोर जैसी नस्लों का उपयोग किया जाता है, किंतु वर्ष 2027 तक स्वदेशी नस्लों की पूर्ण भर्ती तथा वर्ष 2050 तक विदेशी नस्लों के चरणबद्ध प्रतिस्थापन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
असम राइफल्स
- असम राइफल्स एक केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) है तथा भारत का सबसे पुराना अर्द्धसैनिक बल है। यह मुख्यतः उत्तर-पूर्व क्षेत्र में सुरक्षा एवं उग्रवाद-रोधी अभियानों के संचालन तथा भारत-म्याँमार सीमा की निगरानी के लिये उत्तरदायी है।
- इसकी स्थापना वर्ष 1835 में ‘कछार लेवी’ (Cachar Levy) के रूप में हुई थी, जिसे उत्तर-पूर्व में ब्रिटिश चाय बागानों और बस्तियों को जनजातीय हमलों से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से गठित किया गया था।
- यह बल प्रशासनिक रूप से गृह मंत्रालय के अधीन तथा परिचालन (ऑपरेशनल) रूप से रक्षा मंत्रालय के नियंत्रण में कार्य करता है।
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