भारत की अगली पीढ़ी की सुनामी चेतावनी प्रणाली | 10 Feb 2026
भारत सुनामी निगरानी और प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली को सुदृढ़ करने के लिये अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह में ₹300 करोड़ की लागत से एक क्षेत्रीय सेवा केंद्र (RSC) स्थापित करने की योजना बना रहा है।
- स्थान एवं क्षेत्रीय भूमिका: प्रस्तावित क्षेत्रीय सेवा केंद्र (RSC) अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह के स्वराज द्वीप स्थित विजय नगर में स्थापित किया जाएगा और यह श्रीलंका जैसे हिंद महासागर क्षेत्र के देशों को भी सुनामी चेतावनी सेवाएँ प्रदान करेगा।
- वर्तमान प्रणाली की सीमाएँ: भारत की मौजूदा सुनामी चेतावनी प्रणाली मुख्यतः भूकंप-जनित सुनामियों का पता लगाने तक सीमित है, जबकि वैश्विक स्तर पर घटित कुल सुनामियों का लगभग पाँचवाँ हिस्सा समुद्रतलीय भूस्खलन तथा ज्वालामुखीय गतिविधियों जैसी गैर-भूकंपीय घटनाओं का परिणाम है।
- अगली पीढ़ी की क्षमता: उन्नत प्रणाली भूकंपीय तथा गैर-भूकंपीय दोनों प्रकार की सुनामियों का पता लगाने में सक्षम होगी, जिससे हिंद महासागर क्षेत्र में चेतावनियों की गति, सटीकता और विश्वसनीयता में उल्लेखनीय सुधार होगा।
- प्रौद्योगिकी एवं अवसंरचना: इस परियोजना के अंतर्गत टेक्टोनिक सबडक्शन क्षेत्रों में समुद्र-तल के नीचे लगभग 270 किमी. लंबी केबल बिछाई जाएँगी, जिससे ध्वनिक संकेतों का तीव्रता से पता लगाया जा सकेगा तथा सर्फेस बॉय के क्षतिग्रस्त होने या उपग्रह की सीमितता के कारण उत्पन्न डेटा अंतराल को प्रभावी रूप से कम किया जा सकेगा।
- नोडल एजेंसी: इस परियोजना का नेतृत्व भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र (INCOIS) कर रहा है, जो भारतीय सुनामी प्रारंभिक चेतावनी केंद्र (ITEWC) का संचालन करता है।