भारत के प्रमुख बंदरगाहों पर कार्गो की भारी बढ़ोतरी | 07 Apr 2026

स्रोत: पीआईबी

चर्चा में क्यों? 

पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अधीन भारत के प्रमुख बंदरगाहों ने वित्त वर्ष 2025–26 में 915 मिलियन टन कार्गो (कार्गो से तात्पर्य भूमि, जल या वायु द्वारा परिवहन किये जाने वाले सामान से है) का परिवहन किया, जिसमें 7.06% की वृद्धि हुई, जो मैरीटाइम अमृत काल विज़न 2047 के तहत दक्षता लाभ को दर्शाता है।

  • इसके अतिरिक्त कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का एकीकरण परिचालन दक्षता, लॉजिस्टिक्स अनुकूलन और निर्णय लेने को महत्त्वपूर्ण रूप से बढ़ा सकता है, जो भारत के समुद्री परिवर्तन में अगले चरण को चिह्नित करता है।

वित्त वर्ष 2025-26 में बंदरगाह के प्रदर्शन की मुख्य विशेषताएँ क्या हैं?

  • लक्ष्यों को पार करना: प्रमुख बंदरगाहों ने सामूहिक रूप से 915.17 मिलियन टन (MT) कार्गो का अभूतपूर्व परिवहन किया, जो 904 MT के वार्षिक लक्ष्य को सफलतापूर्वक पार कर गया।
  • शीर्ष प्रदर्शनकर्त्ता: शीर्ष प्रदर्शनकर्त्ताओं में दीनदयाल पत्तन प्राधिकरण (160.11 MT), उसके बाद पारादीप पत्तन प्राधिकरण (156.45 MT) और जवाहरलाल नेहरू पत्तन प्राधिकरण (JNPA) (102.01 MT) शामिल थे।
    • विशाखापटनम पत्तन प्राधिकरण, मुंबई पत्तन प्राधिकरण, चेन्नई पत्तन प्राधिकरण और न्यू मंगलोर पत्तन प्राधिकरण ने भी मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया।
  • उच्चतम वृद्धि दर: वृद्धि दर के संदर्भ में गोवा के मोरमुगाओ पत्तन प्राधिकरण ने 15.91% की सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की, उसके बाद कोलकाता डॉक सिस्टम (14.28%) और JNPA (10.74%) का स्थान था।
  • विकास को गति देने वाले कारक:
    • डिजिटल परिवर्तन: IT और स्वचालन द्वारा संचालित स्मार्ट पोर्ट और डिजिटल पहलों को अपनाना, जो परिचालन में प्रमुख दक्षता लाभ प्रदान कर रहा है।
      • राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स पोर्टल (मरीन) और मैरीटाइम सिंगल विंडो एक ही प्लेटफॉर्म से एकीकृत व्यापार सुविधा को सक्षम कर रहे हैं।
      • सागर सेतु प्लेटफॉर्म और ई-समुद्र; एकीकृत समुद्री सेवा पोर्टल सभी समुद्री सेवाओं को एक ही छत के नीचे ला रहा है।
      • वन-नेशन-वन-डॉक्यूमेंट (ONOD) और वन-नेशन-वन-प्रोसेस (ONOP) सुधार: सीमा शुल्क, आप्रवासन और स्वास्थ्य सहित सभी बंदरगाहों में दस्तावेज़ीकरण को मानकीकृत करना और अनावश्यक प्रक्रियाओं को समाप्त करना।
      • जो प्रक्रियाएँ पहले भौतिक रूप से संचालित होती थीं, वे अब पूरी तरह डिजिटल हो गई हैं, जिससे देरी, कागज़ी कार्यवाही और मानवीय त्रुटियाँ कम हो गई हैं।
      • स्मार्ट बंदरगाह अब परिवर्तन के अगले चरण के रूप में AI-संचालित बुद्धिमान बंदरगाहों में विकसित होने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
    • मुख्य वस्तुओं के प्रबंधन में वृद्धि: कोयला, कच्चा तेल, कंटेनर, उर्वरक तथा पेट्रोलियम, तेल और स्नेहक (POL) जैसी प्रमुख वस्तुओं की बढ़ी हुई मात्रा ने कुल कार्गो वृद्धि को प्रोत्साहित किया है।
    • संचालन दक्षता में सुधार: टर्नअराउंड समय में उल्लेखनीय कमी (2013–14 में लगभग 4 दिन से घटकर 2025 में 1 दिन से भी कम) और कारोबार सुगमता में सुधार ने बंदरगाहों के प्रदर्शन को सुदृढ़ किया है।
    • क्षमता विस्तार और आधुनिकीकरण: भारतीय पत्तन अधिनियम, 2025 के अंतर्गत किये गए सुधारों के साथ बंदरगाह अवसंरचना के विस्तार तथा उन्नयन ने कार्गो प्रबंधन क्षमता एवं संचालन दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि की है।

भारतीय बंदरगाहों को AI के साथ एकीकृत करना

  • AI परियोजना नियोजन को बेहतर बना सकता है, संचालन संबंधी निर्णयों को अधिक प्रभावी कर सकता है, व्यापार सुगमता को बढ़ा सकता है और ऊर्जा के कुशल उपयोग को सुनिश्चित कर सकता है।
  • भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास के एक पायलट अध्ययन में वी.ओ. चिदंबरनार बंदरगाह पर भीड़भाड़ का पूर्वानुमान लगाने और जस्ट-इन-टाइम बर्थिंग को सक्षम बनाने में AI की उपयोगिता प्रदर्शित हुई, जिससे ईंधन तथा समय की बचत संभव हुई।
  • AI की प्रभावशीलता के लिये बड़े पैमाने पर डेटा आवश्यक होता है। वर्तमान में विक्रेता-आधारित बिखरे हुए सिस्टम के कारण AI को संस्थागत रूप देकर ‘डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर’ (DPI) के रूप में विकसित करना चाहिये, ताकि मानकीकृत डेटा, परस्पर संचालन क्षमता, साझा रजिस्ट्रियाँ और मज़बूत साइबर सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

स्मार्ट पोर्ट्स बनाम AI (थिंकिंग) पोर्ट्स

पहलू

स्मार्ट बंदरगाह

AI (थिंकिंग) पोर्ट्स

दृष्टिकोण और केंद्रबिंदु

प्रौद्योगिकी-आधारित, स्वचालन और संचालन की रीयल-टाइम निगरानी पर केंद्रित।

निर्णय-आधारित, AI का उपयोग करते हुए पूर्वानुमानित अंतर्दृष्टियों और परिणाम-आधारित योजना पर केंद्रित।

कार्यप्रणाली और अनुकूलन

वर्तमान घटनाओं पर प्रतिक्रिया करता है और अलग-अलग प्रणालियों (साइलो) के भीतर अनुकूलन करता है।

भविष्य के परिदृश्यों का पूर्वानुमान लगाता है और एकीकृत प्रणालियों में अनुकूलन करता है।

निर्णय-निर्माण और परिणाम

सीमित निर्णय-समर्थन के साथ डेटा की दृश्यता प्रदान करता है, जिससे गति और दक्षता में सुधार होता है।

AI-आधारित निर्णय क्षमता को सक्षम बनाते हुए अग्रिम और सक्रिय निर्णय लेने में मदद करता है, जिससे बंदरगाह अधिक स्मार्ट और भविष्य के लिये तैयार बनते हैं।

भारत में बंदरगाह

  • बंदरगाह भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, जो निर्यात-आयात (EXIM) कार्गो का लगभग 95% मात्रा के आधार पर और 70% मूल्य के आधार पर प्रबंधित करते हैं।
  • भारत में 12 प्रमुख बंदरगाह हैं (महाराष्ट्र के वधावन में प्रस्तावित 13वाँ प्रमुख बंदरगाह अभी विकासाधीन है), जो पूर्णतः भारत सरकार के स्वामित्व में हैं और प्रमुख पत्तन प्राधिकरण अधिनियम, 2021 के तहत संचालित होते हैं।
    • इनमें दीनदयाल बंदरगाह, मुंबई बंदरगाह, जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह, मोरमुगाओ बंदरगाह, न्यू मंगलौर बंदरगाह, कोचीन बंदरगाह, वी.ओ. चिदंबरनार बंदरगाह, चेन्नई बंदरगाह, कामराजार बंदरगाह, विशाखापत्तनम बंदरगाह, पारादीप बंदरगाह और श्यामा प्रसाद मुखर्जी बंदरगाह शामिल हैं।
  • भारत में किसी भी प्रमुख बंदरगाह का पूर्ण निजीकरण नहीं किया गया है, क्योंकि भूमि और जलतट (वाटरफ्रंट) का स्वामित्व भारत सरकार के पास ही रहता है। हालाँकि संचालन में निजी भागीदारी मौजूद है, जो लैंडलॉर्ड बंदरगाह/सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत होती है।
  • प्रमुख बंदरगाह का प्रशासन पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय द्वारा किया जाता है, जबकि गैर-प्रमुख बंदरगाह राज्य सरकारों या राज्य समुद्री बोर्डों के अधीन होते हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. मैरीटाइम अमृत काल विज़न 2047 का क्या महत्त्व है?
इसका उद्देश्य बंदरगाह-आधारित विकास, लॉजिस्टिक्स एकीकरण और आधुनिकीकरण के माध्यम से भारत को एक वैश्विक समुद्री शक्ति में परिवर्तित करना है।

2. बंदरगाह सुधारों में ONOD और ONOP क्या हैं?
वन नेशन वन डॉक्यूमेंट (ONOD) और वन नेशन वन प्रोसेस (ONOP) देश के सभी बंदरगाहों में दस्तावेज़ीकरण तथा प्रक्रियाओं का मानकीकरण करते हैं, जिससे दोहराव और विलंब में कमी आती है।

3. AI बंदरगाह संचालन में सुधार कैसे कर सकता है?
AI भीड़भाड़ का पूर्वानुमान, जस्ट-इन-टाइम बर्थिंग, निर्णय-निर्माण और ऊर्जा दक्षता को बढ़ाता है, जिससे समग्र लॉजिस्टिक्स प्रदर्शन में सुधार होता है।

4. भारत के व्यापार में बंदरगाहों की क्या भूमिका है?
बंदरगाह मात्रा के आधार पर लगभग 95% EXIM कार्गो और मूल्य के आधार पर 70% माल का संचालन करते हैं, जिससे वे आर्थिक विकास के लिये अत्यंत महत्त्वपूर्ण हैं।

5. बंदरगाहों में AI अपनाने की एक प्रमुख चुनौती क्या है?
खंडित डेटा प्रणालियाँ और मानकीकरण की कमी, जो पारस्परिक संचालन (इंटरऑपरेबिलिटी) और AI के प्रभावी उपयोग को सीमित करती हैं।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ)

प्रिलिम्स 

प्रश्न: भारत द्वारा चाबहार बंदरगाह विकसित करने का क्या महत्त्व है? (2017)

(a) अफ्रीकी देशों से भारत के व्यापार में अपार वृद्धि होगी।

(b) तेल-उत्पादक अरब देशों से भारत के संबंध सुदृढ़ होंगे।

(c) अफगानिस्तान और मध्य एशिया में पहुँच के लिये भारत को पाकिस्तान पर निर्भर नहीं होना पड़ेगा।

(d) पाकिस्तान, इराक और भारत के बीच गैस पाइपलाइन का संस्थापन सुकर बनाएगा और उसकी सुरक्षा करेगा।

उत्तर: (c)