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भारत द्वारा भूमिगत कोयला गैसीकरण की शुरुआत

  • 30 Apr 2026
  • 10 min read

स्रोत: पीआईबी 

हाल ही में कोयला मंत्रालय ने चार कोयला खदानों के लिये सफल बोलीदाताओं के साथ कोयला खदान/ब्लॉक उत्पादन एवं विकास समझौतों (CMDPA) पर हस्ताक्षर किये, जो भारत के वाणिज्यिक कोयला खनन ढाँचे में भूमिगत कोयला गैसीकरण (UCG) संबंधी प्रावधानों के पहले समावेश का प्रतीक है।

भूमिगत कोयला गैसीकरण (UCG)

  • परिचय: UCG एक स्व-स्थाने प्रौद्योगिकी है, जो भौतिक खनन के बगैर, कोयले को सीम (seam) के भीतर ही ज़मीन के अंदर संश्लेषित गैस (सिनगैस) में परिवर्तित कर देती है, जिससे अनुपयोगी कोयले का उपयोग संभव हो पाता है।
    • यह प्रक्रिया सिनगैस का उत्पादन करती है, जो मुख्य रूप से हाइड्रोजन, कार्बन मोनोऑक्साइड और मीथेन से बना होता है और इसका उपयोग विभिन्न औद्योगिक उद्देश्यों के लिये किया जा सकता है।
  • अनुप्रयोग: सिनगैस का उपयोग उर्वरक उत्पादन (यूरिया, अमोनिया), पेट्रोकेमिकल्स (मेथनॉल, डाइमिथाइल ईथर - DME) और सिंथेटिक ईंधन के लिये किया जा सकता है, जिससे औद्योगिक मूल्य शृंखला सुदृढ़ होती हैं।
    • यह आयातित प्राकृतिक गैस और नेफ्था पर निर्भरता को कम करता है साथ ही घरेलू विनिर्माण एवं रासायनिक उद्योगों को बढ़ावा देता है।
  • महत्त्व: यह प्रयोग करने योग्य कोयला भंडार का विस्तार करके ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ाता है और पारंपरिक खनन की तुलना में स्वच्छ, अधिक कुशल तरीके से कोयला उपयोग को बढ़ावा देता है।

और पढ़ें... कोयला गैसीकरण 

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