रैपिड फायर
भारत-जर्मनी रक्षा संबंध सुदृढ़ हुए
- 28 Apr 2026
- 15 min read
भारत के रक्षा मंत्री ने बर्लिन में अपने जर्मन समकक्ष के साथ व्यापक द्विपक्षीय वार्त्ता की, जिसका उद्देश्य भारत-जर्मनी सामरिक रक्षा साझेदारी को सुदृढ़ करना और सैन्य-से-सैन्य सहयोग का विस्तार करना है।
- प्रमुख समझौते: दोनों देशों ने रक्षा औद्योगिक सहयोग रोडमैप पर हस्ताक्षर किये और उसका आदान-प्रदान किया, साथ ही संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना प्रशिक्षण में सहयोग हेतु एक कार्यान्वयन व्यवस्था (Implementing Arrangement) पर भी सहमति व्यक्त की।
- भारत-यूरोपीय संघ सुरक्षा समन्वय: नेताओं ने संयुक्त क्षमताओं के सुदृढ़ीकरण, क्षेत्रीय स्थिरता की सुनिश्चितता तथा व्यापक भारत-जर्मनी सामरिक समन्वय को सुदृढ़ करने हेतु भारत-यूरोपीय संघ सुरक्षा एवं रक्षा साझेदारी को एक महत्त्वपूर्ण ढाँचे के रूप में रेखांकित किया।
- सैन्य अभ्यास एवं स्टाफ वार्त्ताएँ: जर्मनी ने सेवा-स्तर की स्टाफ वार्त्ताओं के संस्थानीकरण का स्वागत किया।
- इसके अतिरिक्त, भारत को जर्मन वायुसेना की भागीदारी अभ्यास 'तरंग शक्ति' में प्राप्त होने की उम्मीद है, जो एक प्रमुख बहुपक्षीय वायु अभ्यास है जिसे वर्ष 2026 के अंत में भारत में आयोजित किया जाना प्रस्तावित है।
भारत-जर्मनी रक्षा संबंध
- वर्ष 2026 में भारत और जर्मनी 75 वर्ष के राजनयिक संबंध (स्थापित 1951) और 25 वर्ष की अपनी सामरिक साझेदारी (स्थापित 2000) पूरी कर रहे हैं।
- भारत-जर्मनी रक्षा सहयोग वर्ष 2006 के रक्षा सहयोग समझौते और उसके 2019 के कार्यान्वयन प्रबंध पर आधारित है, जो नियमित उच्च-स्तरीय रक्षा संवादों द्वारा समर्थित है।
- नौसेना के पोर्ट कॉल और पैसेज अभ्यास के माध्यम से सैन्य संबंध गहरे हुए हैं। वायुसेना सहयोग का विस्तार अभ्यास 'तरंग शक्ति' के माध्यम से हुआ है, जो बढ़ती अंतर-संचालन क्षमता और सामरिक विश्वास को दर्शाता है।
- बढ़ते समुद्री सहयोग को दर्शाते हुए जर्मन नौसेना के अधिकारी अभ्यास MILAN 2024 में पर्यवेक्षक के रूप में शामिल हुए।
|
और पढ़ें: भारत-जर्मनी संबंध |
