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भारत ने ATF की परिभाषा का विस्तार किया

  • 24 Apr 2026
  • 17 min read

स्रोत: द हिंदू 

पेट्रोलियम मंत्रालय ने विमानन टरबाइन ईंधन (विपणन का विनियमन) आदेश, 2001 में संशोधन करते हुए विमानन टरबाइन ईंध (ATF) की परिभाषा का विस्तार किया है ताकि इसमें गैर-पेट्रोलियम स्रोतों से प्राप्त संश्लेषित हाइड्रोकार्बन के साथ मिश्रण को शामिल किया जा सके।

  • सतत विमानन ईंधन (SAF) को बढ़ावा: यह सुधार सतत विमानन ईंधन को अपनाने में सक्षम बनाता है, जो कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करते हुए स्वच्छ विमानन को बढ़ावा देता है।
  • उद्देश्य: पेट्रोल में एथेनॉल का मिश्रण करने से, इसका उद्देश्य आयात निर्भरता कम करना और विशेष रूप से पश्चिम एशिया संकट जैसे वैश्विक व्यवधानों के मद्देनज़र ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ाना है।
    • संश्लेषित हाइड्रोकार्बन बायोमास, प्राकृतिक गैस आदि से उत्पादित किये जा सकते हैं; हालाँकि एथेनॉल को सीधे ATF में मिश्रित नहीं किया जा सकता है, इसे पहले उपयुक्त हाइड्रोकार्बन में परिवर्तित किया जाना चाहिये।
  • वैश्विक समन्वय: यह नीति अंतर्राष्ट्रीय विमानन के डीकार्बोनाइज़ेशन प्रयासों के अनुरूप है, जिसमें अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) की अंतर्राष्ट्रीय विमानन के लिये कार्बन ऑफसेटिंग और कटौती योजना (जो 2027 से अनिवार्य होगी) भी शामिल है।
  • मिश्रण लक्ष्य: भारत ने सतत विमानन ईंधन (SAF) के लिये संकेतात्मक मिश्रण लक्ष्य निर्धारित किये हैं—वर्ष 2027 में 1%, 2028 में 2% और 2030 में 5%—जो यूरोपीय संघ, यूनाइटेड किंगडम, संयुक्त राज्य अमेरिका, जापान तथा सिंगापुर जैसे क्षेत्रों की वैश्विक प्रवृत्तियों के अनुरूप हैं।

सतत विमानन ईंधन (SAF)

  • परिचय: सतत विमानन ईंधन (SAF) एक जैव ईंधन है, जो नवीकरणीय कच्चे पदार्थों से बनाया जाता है। यह रासायनिक रूप से पारंपरिक विमानन टरबाइन ईंधन (ATF) के समान होता है और ‘ड्रॉप-इन’ ईंधन के रूप में मौजूदा विमान इंजनों और अवसंरचना के साथ संगत है।
  • कच्चे पदार्थों के स्रोत: इसमें तेल और वसा (उपयोग किया हुआ खाना पकाने का तेल, शैवाल तेल, पशु वसा, तिलहन), नगर ठोस अपशिष्ट, कृषि एवं वानिकी अवशेष (जैसे– बैगास, भूसी), शर्करा तथा स्टार्च शामिल हैं।
  • अल्कोहल-टू-जेट (ATJ) मार्ग: यह इथेनॉल या ब्यूटेनॉल जैसे नवीकरणीय अल्कोहल को हाइड्रोकार्बन-आधारित 'सतत विमानन ईंधन' में परिवर्तित करता है, जिससे वे विमानन उपयोग के लिये उपयुक्त बन जाते हैं।

और पढ़ें: भारत का विमानन उद्योग

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