इंडिया एनर्जी वीक (IEW) 2026 | 31 Jan 2026

स्रोत: पीआईबी

चर्चा में क्यों?

भारत ने गोवा में आयोजित इंडिया एनर्जी वीक (IEW) 2026 का समापन किया, जिसमें वैश्विक स्तर पर ऊर्जा अस्थिरता की स्थितियों के निवारण हेतु भारत की तैयारियों को विश्व-पटल पर रखा गया। इस आयोजन ने एक प्रमुख वैश्विक ऊर्जा शक्ति के रूप में अपनी स्थिति बनाए रखने के लिये पारंपरिक ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित करने और ऊर्जा के स्वच्छ स्रोतों की ओर संक्रमण को गति देने की भारत की दोहरी रणनीति पर बल दिया।

इंडिया एनर्जी वीक 2026 की मुख्य विशेषताएँ क्या हैं?

  • ऊर्जा संवर्द्धन: भारत ने इस बात पर बल दिया कि वैश्विक ऊर्जा संक्रमण मूल रूप से केवल प्रतिस्थापन के बजाय "ऊर्जा संवर्द्धन" के बारे में है, जिसके लिये तेल, गैस, जैव ईंधन, हरित हाइड्रोजन और द्रवीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) में निरंतर निवेश की आवश्यकता है।
    • भारत ने वैश्विक निवेश को आकर्षित करने के लिये ओपन एकरेज लाइसेंसिंग पॉलिसी (OALP) और डिस्कवर्ड स्मॉल फील्ड्स (DSF) बिडिंग राउंड के माध्यम से बड़े बेसिनों को वैश्विक निवेश हेतु खोलने के अपने दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला।
    • वैश्विक उथल-पुथल के बावजूद, कीमतों में अस्थिरता का असर भारतीय उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ा है। तेल विपणन कंपनियों (OMC) के समय पर किये गए हस्तक्षेपों के कारण, भारत ने ईंधन और LPG की वैश्विक स्तर पर सबसे कम कीमतों को बनाए रखा है।
  • भारत-UAE ऊर्जा साझेदारी: IEW, 2026 के दौरान यूएई ने भारत को कच्चे तेल और LPG के एक विश्वसनीय आपूर्तिकर्त्ता के रूप में अपनी भूमिका को मबूत किया, साथ ही चेतावनी दी कि अपर्याप्त निवेश वैश्विक ऊर्जा प्रणाली के लिये सबसे बड़ा जोखिम है।
    • भारत के तेल आयात का चौथा सबसे बड़ा स्रोत संयुक्त अरब अमीरात है, जो रूस, इराक और सऊदी अरब के बाद आता है।
    • UAE भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार और दूसरा सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य भी है, जहाँ वित्त वर्ष 2024–25 में निर्यात 36.63 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक रहा। दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार को वित्त वर्ष 2025 के 100.06 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़ाकर 2032 तक 200 अरब अमेरिकी डॉलर करने का लक्ष्य रखा है।
  • वैश्विक मांग के प्रेरक तत्त्व: सम्मेलन में यह रेखांकित किया गया कि भविष्य की वैश्विक ऊर्जा मांग उभरते बाज़ारों, डिजिटलीकरण और विविध ऊर्जा प्रणालियों के एकीकरण से संचालित होगी, और इन व्यापक प्रवृत्तियों के केंद्र में भारत रहेगा।
  • गोवा के लिये नवीन दृष्टि: मेबान राज्य के रूप में गोवा ने वर्ष 2050 तक 100% नवीकरणीय ऊर्जा प्राप्त करने की अपनी रूपरेखा प्रस्तुत की, जिसमें हरित अर्थव्यवस्था और ब्लू इकोनॉमी (समुद्री संसाधनों के सतत उपयोग) के बीच संतुलन की आवश्यकता पर बल दिया गया।

इंडिया एनर्जी वीक (IEW)

  • पहली बार 2023 में शुरू किया गया, इंडिया एनर्जी वीक (IEW) भारत का प्रमुख वैश्विक ऊर्जा मंच है, जिसे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoP&NG) के संरक्षण में आयोजित किया जाता है। यह एक सुरक्षित, संधारणीय और किफायती ऊर्जा भविष्य को बढ़ावा देने के लिये सरकारों, उद्योग जगत के प्रमुख और नवप्रवर्तकों को एक साथ लाता है।
    • IEM एक तटस्थ अंतर्राष्ट्रीय मंच के रूप में कार्य करता है जो नीतिगत संवाद, निवेश की सुविधा और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देता है।

भारत में ऊर्जा सुरक्षा

  • IRENA अक्षय ऊर्जा सांख्यिकी 2025 के अनुसार, भारत वैश्विक स्तर पर सौर ऊर्जा क्षमता में तीसरे, पवन ऊर्जा में चौथे और कुल अक्षय ऊर्जा क्षमता में चौथे स्थान पर है, जो तीव्र स्वच्छ ऊर्जा विस्तार को दर्शाता है।
  • तीसरा सबसे बड़ा शुद्ध ऊर्जा आयातक होने के बावजूद, भारत ने अपनी संचयी स्थापित बिजली क्षमता का 50% गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से प्राप्त कर लिया है, जो वर्ष 2030 के लक्ष्य से पाँच वर्ष पहले हासिल किया गया है।
  • हालाँकि, विश्व आर्थिक मंच के ऊर्जा संक्रमण सूचकांक 2025 में देश वर्ष 2024 की 63वीं रैंक से फिसलकर 118 देशों में 71वें स्थान पर आ गया है।
  • ऊर्जा सुरक्षा पहल: भारत के अक्षय ऊर्जा संक्रमण को प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना और विकेंद्रीकृत सौर अपनाने के लिये प्रधानमंत्री-कुसुम जैसी पहलों, जैव ईंधन पर राष्ट्रीय नीति 2018 (एथनॉल सम्मिश्रण कार्यक्रम (EBP) के तहत 2025 में पेट्रोल में 20% एथनॉल सम्मिश्रण हासिल किया गया), और राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन द्वारा संचालित किया जा रहा है।
    • इन प्रयासों को अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन के माध्यम से सौर कूटनीति, वन सन वन वर्ल्ड वन ग्रिड (OSOWOG), सौर पार्क योजना के तहत विस्तार, परमाणु ऊर्जा मिशन के माध्यम से प्रमुख परमाणु क्षमता प्रयास और ग्लोबल बायोफ्यूल अलायंस जैसी वैश्विक साझेदारियों द्वारा सुदृढ़ किया जा रहा है।
  • अपस्ट्रीम रिफॉर्म:
    • तेलक्षेत्र (विनियमन और विकास) संशोधन अधिनियम, 2025: घरेलू तेल और गैस उत्पादन को सरल नियमों के माध्यम से बढ़ावा देना।
    • पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियम, 2025: नियामक निश्चितता और व्यवसाय को सुगम बनाना।
    • हाइड्रोकार्बन अन्वेषण लाइसेंसिंग नीति (HELP) और ओपन एकडेज लाइसेंसिंग नीति (OALP): घरेलू तेल और गैस अन्वेषण व उत्पादन को बढ़ावा देना।
  • डाउनस्ट्रीम रिफॉर्म: एकीकृत पाइपलाइन टैरिफ (UPT): "वन नेशन, वन गैस ग्रिड" के तहत क्षेत्रीय गैस मूल्य असमानताओं को कम करना।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न 

1. इंडिया एनर्जी वीक (IEW) क्या है?
IEW ऊर्जा सुरक्षा, स्थिरता, निवेश और प्रौद्योगिकी सहयोग पर संवाद के लिये भारत का प्रमुख वैश्विक ऊर्जा मंच है।

2. भारत की ऊर्जा रणनीति में "ऊर्जा संवर्द्धन" का क्या अर्थ है?
यह रणनीति एक ईंधन को दूसरे से बदलने के बजाय, पारंपरिक ईंधन और स्वच्छ ऊर्जा दोनों में निवेश करके कुल ऊर्जा आपूर्ति का विस्तार करने पर बल देती है।

3. भारत ने वैश्विक ऊर्जा मूल्य में होने वाले आघातों से उपभोक्ताओं की रक्षा कैसे की है?
तेल विपणन कंपनियों के समय पर हस्तक्षेप के माध्यम से, भारत ने वैश्विक अस्थिरता के बावजूद ईंधन और एलपीजी की कीमतों को कम बनाए रखा है।

4. नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में भारत की प्रमुख उपलब्धियाँ क्या हैं?
सौर ऊर्जा में भारत तीसरे, पवन ऊर्जा में चौथे, कुल नवीकरणीय क्षमता में चौथे स्थान पर है, और इसने अपने वर्ष 2030 के लक्ष्य से पहले ही 50% गैर-जीवाश्म बिजली उत्पादन क्षमता हासिल कर ली है।

5. ऊर्जा संक्रमण सूचकांक में भारत की रैंकिंग चिंता का विषय क्यों है?
क्षमता वृद्धि के बावजूद, वहनीयता, ग्रिड एकीकरण, भंडारण और समग्र संक्रमण दक्षता में चुनौतियाँ बनी हुई हैं, जो इसकी निम्न वैश्विक रैंकिंग में परिलक्षित होती हैं।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न

प्रिलिम्स:

प्रश्न. भारतीय नवीकरणीय ऊर्जा विकास एजेंसी लिमिटेड (IREDA) के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं? (2015)

  1. यह एक पब्लिक लिमिटेड सरकारी कंपनी है।
  2. यह एक गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी है।

नीचे दिये गए कोड का उपयोग करके सही उत्तर चुनिये:

(a) केवल 1

(b) केवल 2

(c) 1 और 2 दोनों

(d) न तो 1 और न ही 2

उत्तर: (c)


मेंस:

प्रश्न. "वहनीय (ऐफोर्डेबल), विश्वसनीय, धारणीय तथा आधुनिक ऊर्जा तक पहुँच संधारणीय (सस्टेनबल) विकास लक्ष्यों (एस० डी० जी०) को प्राप्त करने के लिये अनिवार्य है।" भारत में इस संबंध में हुई प्रगति पर टिप्पणी कीजिये। (2018)