भारत ने पवन ऊर्जा में रिकॉर्ड वृद्धि हासिल की | 09 Apr 2026
भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान पवन ऊर्जा क्षमता में अब तक की सबसे अधिक वार्षिक वृद्धि 6.05 गीगावाट प्राप्त की, यह वित्त वर्ष 2024-25 में जोड़ी गई क्षमता की तुलना में लगभग 46 प्रतिशत की वृद्धि को भी दर्शाता है, जो देश के तटवर्ती पवन ऊर्जा तैनाती पथ में निर्णायक तेज़ी का संकेत है।
- कुल क्षमता: इस वृद्धि के साथ भारत की कुल स्थापित पवन ऊर्जा क्षमता 56 गीगावाट से अधिक हो गई है, जिससे यह विश्व के प्रमुख पवन ऊर्जा बाज़ारों में शामिल हो गया है।
- वैश्विक स्तर पर शीर्ष तीन पवन ऊर्जा उत्पादक चीन, संयुक्त राज्य अमेरिका और जर्मनी हैं, जबकि भारत विश्व में चौथे स्थान पर है।
- प्रमुख योगदानकर्त्ता राज्य: गुजरात, कर्नाटक और महाराष्ट्र जैसे राज्य प्रमुख योगदानकर्त्ता रहे हैं, जिन्हें पवन-सौर हाइब्रिड परियोजनाओं के विस्तार और ग्रीन एनर्जी ओपन एक्सेस द्वारा समर्थन प्राप्त हुआ है।
- नीतिगत समर्थन: सरकार ने इस क्षेत्र को रियायती सीमा शुल्क, जून 2028 तक अंतर-राज्यीय संचरण प्रणाली (ISTS) शुल्क में छूट, प्रतिस्पर्द्धी बोली तंत्र तथा पवन नवीकरणीय खपत दायित्व (Wind Renewable Consumption Obligation) ढाँचे जैसे उपायों के माध्यम से समर्थन दिया है।
- इस क्षेत्र को बेहतर परियोजना निष्पादन, परिपक्व परियोजना पाइपलाइन तथा राष्ट्रीय पवन ऊर्जा संस्थान से संस्थागत समर्थन का भी लाभ मिला है।
- भविष्य की संभावनाएँ: भारत का पवन ऊर्जा कार्यक्रम 1990 के दशक की शुरुआत में शुरू हुआ और इसने एक सशक्त पारिस्थितिक तंत्र विकसित किया है, जबकि इसकी लगभग 1,164 गीगावाट क्षमता का केवल लगभग 4.5% ही उपयोग किया गया है।
- महत्त्व: पवन ऊर्जा का विस्तार वर्ष 2030 तक लगभग 107 गीगावाट के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिये अत्यंत महत्त्वपूर्ण है और यह भारत के 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य में महत्त्वपूर्ण योगदान देता है।
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