आयकर अधिनियम, 2025 | 02 Apr 2026
आयकर अधिनियम, 2025, 1 अप्रैल, 2026 को आधिकारिक रूप से लागू हो गया है, जिसने छह दशक पुराने आयकर अधिनियम, 1961 को प्रतिस्थापित कर दिया है।
- मूल उद्देश्य: माना जाता है कि ये संशोधन छूट संबंधी सीमाओं को वर्तमान लागत संरचनाओं और मुद्रास्फीति के रुझानों के साथ संरेखित करने के लिये डिज़ाइन किये गए हैं, जिसने अनेक विद्यमान सीमाओं को अप्रचलित बना दिया है।
- व्यापक उद्देश्य कर संबंधी प्रशासन व्यवस्था को आधुनिक बनाते हुए वेतनभोगी व्यक्तियों पर कर का बोझ कम करना है।
- परिचालन ढाँचा: केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने नए विधायी प्रावधानों को परिचालन योग्य बनाने के लिये आयकर नियम, 2026 को अधिसूचित किया।
- प्रक्रियागत परिवर्तन (फॉर्म 130 की शुरुआत): मानकीकरण और डिजिटलीकरण के लिये एक बड़े प्रयास में, पारंपरिक फॉर्म 16 [स्रोत पर कर संबंधी कटौती (TDS) प्रमाणपत्र जो एक नियोक्ता द्वारा कर्मचारी को जारी किया जाता है] को रिपोर्टिंग की सटीकता में सुधार के लिये एक नए सिस्टम-जनरेटेड फॉर्म 130 द्वारा प्रतिस्थापित किया जा रहा है।
- कर वर्ष का एकीकरण: वित्तीय वर्ष (FY) और आकलन वर्ष (AY) जैसी अलग-अलग अवधारणाओं को समाप्त कर उन्हें एक संयुक्त ‘कर वर्ष’ में समाहित किया गया है।
- डिजिटल विस्तार: अब अघोषित आय की परिभाषा में वर्चुअल डिजिटल परिसंपत्तियों को स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है और तलाशी व ज़ब्ती के दौरान अधिकारियों को ‘वर्चुअल डिजिटल स्पेस’ (जैसे– सोशल मीडिया और ईमेल सर्वर) तक पहुँच प्रदान की गई है।
- मानकीकृत अनुपालन: इस परिवर्तन में सरलीकृत और पुन: तैयार किये गए कर संबंधी फॉर्म शामिल हैं, जिन्हें फाइलिंग प्रक्रिया को अधिक उपयोगकर्त्ता-अनुकूल और कुशल बनाने के लिये डिज़ाइन किया गया है।
- रणनीतिक दृष्टिकोण: इस सुधार को कर संबंधी प्रशासन में सुधार और विकसित भारत के व्यापक राष्ट्रीय लक्ष्य का समर्थन करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
- आयकर: यह एक प्रत्यक्ष कर है, जो किसी वित्तीय वर्ष के दौरान व्यक्तियों, कंपनियों या अन्य संस्थाओं द्वारा अर्जित आय पर लगाया जाता है। भारत में व्यक्तिगत करदाताओं के लिये इसे प्रगतिशील टैक्स स्लैब के अनुसार लगाया जाता है।
- ये स्लैब नवीन कर व्यवस्था के तहत या लागू छूट और कटौतियों के साथ भिन्न हो सकते हैं।
- केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के अनुसार, वर्ष 2025-26 के लिये भारत का सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह 7.99 लाख करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2024-25 के 8.14 लाख करोड़ रुपये से 1.9% कम है।
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