सी ब्रीज़ पर वैश्विक तापन का प्रभाव | 21 Apr 2026

स्रोत: द हिंदू

हाल ही में एक अध्ययन में बताया गया है कि ग्लोबल वार्मिंग वृद्धि तटीय शहरों में समुद्र-भूमि पवन प्रणालियों को कमज़ोर कर रही है, जिससे उनके शीतलन प्रभाव में कमी आ रही है।

  • ग्लोबल वार्मिंग वृद्धि से तात्पर्य पृथ्वी की औसत सतही तापमान में दीर्घकालिक वृद्धि से है, जो मुख्यतः मानव गतिविधियों के कारण होती है, विशेषकर कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) और मीथेन (CH₄) जैसे ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन से।

सी ब्रीज़ 

  • परिचय: सी ब्रीज़ एक स्थानीय पवन प्रणाली है, जो भूमि और समुद्र के बीच गर्म होने के अंतर के कारण उत्पन्न होती है। दिन के समय तापीय अंतर के कारण समुद्र से ठंडी हवा भूमि की ओर बहती है, जबकि रात में यह प्रक्रिया उलट जाती है।
    • इसके विपरीत स्थल पवन एक अपतटीय हवा है जो मुख्यतः रात में या ठंडी परिस्थितियों में चलती है, जब भूमि समुद्र की तुलना में तेज़ी से ठंडी हो जाती है। इससे भूमि पर उच्च दाब बनता है और हवा भूमि से समुद्र की ओर बहती है।
  • मुख्य निष्कर्ष: बढ़ते समुद्री तापमान भूमि–समुद्र के तापीय अंतर को कम कर रहे हैं, जिससे पवन तंत्र कमज़ोर हो रहा है और इसकी आवृत्ति तथा तीव्रता दोनों में कमी आ रही है। परिणामस्वरूप मुंबई और मियामी सहित 18 प्रमुख तटीय महानगरों में समुद्री पवन वाले दिनों की संख्या में लगभग 3% की गिरावट दर्ज की गई है।
    • मध्यम अक्षांश वाले शहर जैसे लंदन, न्यूयॉर्क, शंघाई और ब्यूनस आयर्स में इसमें अधिक तीव्र गिरावट देखी गई है।
  • प्रभाव: कमज़ोर होती पवनें शहरी तापमान में वृद्धि, प्राकृतिक शीतलन में कमी और वायु प्रदूषण में बढ़ोतरी का कारण बन सकती हैं, जिससे स्वास्थ्य और रहने योग्य परिस्थितियाँ प्रभावित होती हैं।
    • वर्ष 2050 तक यदि उत्सर्जन उच्च स्तर पर बना रहता है, तो समुद्री पवनें लगभग 4.5 गुना तेज़ी से कमज़ोर हो सकती हैं।

Land_Vs_Sea_Breeze

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