ऑक्टोपस के प्रजनन में हेक्टोकोटिलस की भूमिका | 07 Apr 2026

स्रोत: द हिंदू 

हाल ही में शोधकर्त्ताओं ने पाया कि नर ऑक्टोपस एक विशेष भुजा, हेक्टोकोटिलस, का उपयोग न केवल शुक्राणु स्थानांतरण के लिये करते हैं, बल्कि इसे एक संवेदी अंग के रूप में भी प्रयोग करते हैं, जो स्पर्श के द्वारा मादा को 'स्वाद' के माध्यम से पहचानता है। यह अनुकूलन इसलिये महत्त्वपूर्ण है क्योंकि ऑक्टोपस प्रायः एकाकी होते हैं और बहुत कम ही अपने साथी से मिलते हैं।

  • यह नर ऑक्टोपस को मादा के प्रजनन तंत्र और त्वचा में प्रोजेस्टेरोन का पता लगाकर उनकी पहचान करने में सक्षम बनाता है तथा पूर्ण अंधकार में भी गर्भाधान के लिये अंडाशय (ओविडक्ट) का स्थान निर्धारित करने में सहायता करता है।
  • यह प्रक्रिया CRT1 रिसेप्टर के माध्यम से संचालित होती है, जो प्राचीन न्यूरोट्रांसमीटर रिसेप्टर्स से विकसित हुआ है और अब शिकार की पहचान तथा साथी की पहचान- दोनों कार्य करता है।
  • यह अनुकूलन ऑक्टोपस और स्क्विड जैसे सेफलोपॉड्स में व्यापक रूप से पाया जाता है, जिसमें संवेदी पहचान और शुक्राणु संप्रेषण को एक ही उपांग में एकीकृत किया गया है।
    • सेफलोपॉड्स मोलस्का संघ का एक वर्ग हैं, जिनकी विशेषताएँ मुलायम शरीर, स्पष्ट/प्रमुख सिर, बड़ी आँखें तथा भुजाओं या टेंटाकल्स की एक वलयाकार शृंखला होती है, जिनका उपयोग संचलन, पकड़ने और संवेदन के लिये किया जाता है।
  • ये निष्कर्ष दर्शाते हैं कि प्रोटीनों में आणविक परिवर्तन जटिल व्यवहारों को संचालित कर सकते हैं और समुद्री जैव विविधता में योगदान देते हैं।

Hectocotylus in Octopus Reproduction

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