मलेरिया नियंत्रण के लिये जीन ड्राइव का उपयोग | 20 Apr 2026

स्रोत: द हिंदू 

हालिया एक शोध से यह ज्ञात हुआ है कि जीन ड्राइव तकनीक के माध्यम से विकसित, आनुवंशिकतः रूपांतरित, मच्छर वास्तविक परिस्थितियों में मलेरिया के संचरण को प्रभावी रूप से कम कर सकते हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर मलेरिया नियंत्रण के क्षेत्र में सफलता की संभावना उत्पन्न होती है। 

  • मलेरिया संबंधी चुनौती: मच्छरदानी और दवाओं जैसे हस्तक्षेपों के बावज़ूद, मलेरिया विश्व भर में प्रतिवर्ष 5 लाख से अधिक मौतों का कारण बनता है, जो दवा और कीटनाशक प्रतिरोध से और भी जटिल हो गया है।
    • मलेरिया एक वेक्टर-जनित संक्रामक रोग है, जो प्लाज्मोडियम परजीवी के कारण होता है और संक्रमित मादा एनोफिलीज मच्छरों के काटने से मनुष्यों में फैलता है।
    • परजीवी मच्छर के काटने से रक्तप्रवाह में प्रवेश करता है, परिपक्व होने के लिये यकृत तक जाता है और फिर लाल रक्त कोशिकाओं को संक्रमित करता है, जिससे संचरण चक्र जारी रहता है।
  • जीन ड्राइव: जीन ड्राइव एक आनुवंशिक तकनीक है, जो CRISPR-Cas9 जीन-एडिटिंग टूल का उपयोग करते हुए पारंपरिक वंशानुगति नियमों को दरकिनार कर देती है। वैज्ञानिकों ने ऐसा तंत्र विकसित किया है जिसमें रूपांतरित जीन स्वयं को साझेदार गुणसूत्र पर प्रतिलिपित कर लेता है, जिससे यह 90% से अधिक संतानों को हस्तांतरित हो जाता है।
    • यह विशेषता को पीढ़ियों में तेज़ी से फैलने की अनुमति देता है।
  • दो प्राथमिक आनुवंशिक रणनीतियाँ:
    • संख्या को कम करना: यह दृष्टिकोण मादा मच्छर के विकास या प्रजनन क्षमता के लिये आवश्यक जीन (जैसे– डबलसेक्स जीन) को बाधित करता है, जिससे अंततः स्थानीय मच्छरों की संख्या कम हो जाती है।
    • संख्या में सुधार (प्रतिस्थापन): यह रणनीति मच्छरों को जीवित रखती है, किंतु उन्हें इस तरह इंजीनियर करती है कि वे अपने मध्यांत्र में अणु (जैसे– प्रतिसूक्ष्मजीवी पेप्टाइड्स) उत्पन्न करें। इससे मलेरिया परजीवी का विकास रुक जाता है और यह मनुष्यों तक संचरण नहीं कर पाता।
  • 'ट्रांसमिशन ज़ीरो' सफलता: तंजानिया में हुए अध्ययनों से पता चला है कि आनुवंशिक रूप से संशोधित मच्छर केवल प्रयोगशाला में ही नहीं, बल्कि वास्तविक मानव संक्रमणों से मलेरिया परजीवियों को रोक सकते हैं।
  • चुनौतियाँ और आगे की राह: जीन ड्राइव एक स्टैंडअलोन समाधान नहीं हैं और इन्हें मौजूदा स्वास्थ्य प्रणालियों (टीके, मच्छरदानी, निगरानी) के साथ एकीकृत किया जाना चाहिये।
    • संभावित पारिस्थितिक जोखिमों के कारण, अब तक किसी भी जीन-ड्राइव मच्छर को जंगल में नहीं छोड़ा गया है।
    • भविष्य में तैनात करने के लिये कठोर पारिस्थितिक जोखिम आकलन, मज़बूत नियामक समीक्षा और गहन सामुदायिक जुड़ाव की आवश्यकता होती है।

और पढ़ें: मलेरिया की रोकथाम हेतु नवोन्वेषी रणनीतियाँ