EPM के तहत बाज़ार पहुँच संबंधी दिशा-निर्देश अधिसूचित | 02 Jan 2026

स्रोत: TH

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने भारतीय निर्यातकों के लिये वैश्विक बाज़ार पहुँच बढ़ाने के उद्देश्य से निर्यात संवर्द्धन मिशन (EPM) के तहत बाज़ार पहुँच दिशा-निर्देशों की पहली शृंखला अधिसूचित की है।

  • वित्तीय सहायता: निर्यातकों, विशेष रूप से लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) को व्यापार मेलों, क्रेता-विक्रेता बैठकों (BSM), मेगा रिवर्स क्रेता-विक्रेता बैठकों (RBSM) और व्यापार प्रतिनिधिमंडलों के लिये वित्तीय सहायता प्राप्त होती है।
  • सहायता पर सीमा: प्रत्येक फर्म से अधिकतम दो प्रतिनिधियों को वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी, जिसमें प्रतिभागियों का न्यूनतम प्रतिनिधिमंडल 50 होना चाहिये, जिनमें से कम-से-कम 35% लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) होने चाहिये।
    • फर्म एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम 3 BSM  और MSME अधिकतम 4 BSM के लिये पात्र हैं।

निर्यात संवर्द्धन मिशन (EPM)

  • परिचय: यह एक एकल, डिजिटल रूप से सक्षम व्यापक ढाँचा है जिसका उद्देश्य भारत के निर्यात पारिस्थितिकी तंत्र को मज़बूत करना तथा लघु एवं मध्यम उद्यमों और श्रम-प्रधान क्षेत्रों की वैश्विक प्रतिस्पर्द्धात्मकता को बढ़ाना है।
  • एकीकृत दृष्टिकोण: EPM दो मुख्य उप-योजनाओं के माध्यम से खंडित योजनाओं को एक एकीकृत ढाँचे में विलय करता है:
    • निर्यात प्रोत्साहन: यह लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) को किफायती व्यापार वित्त, ब्याज सब्सिडी, संपार्श्विक सहायता और ऋण संवर्द्धन सहित वित्तीय सहायता प्रदान करता है।
    • निर्यात दिशा: यह गुणवत्ता अनुपालन, ब्रांडिंग, लॉजिस्टिक्स सहायता, व्यापार मेले में भागीदारी और ज़िला स्तरीय क्षमता निर्माण जैसे गैर-वित्तीय सहायक कारकों पर ध्यान केंद्रित करता है।
  • शासन एवं कार्यान्वयन: यह वाणिज्य विभाग, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय, वित्त मंत्रालय, DGFT, निर्यात संवर्द्धन परिषदों और राज्य सरकारों को शामिल करते हुए एक समन्वित संस्थागत ढाँचे पर आधारित है। विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) कार्यान्वयन एजेंसी के रूप में कार्य करता है।

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