ODOP योजना के तहत कलाडी का विस्तार | 22 Jan 2026

स्रोत: पीआईबी 

हाल ही में, विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) ने निर्देश दिया कि जम्मू-कश्मीर के उधमपुर के GI-टैग वाले डेयरी उत्पाद 'कलाडी' को 'एक जिला, एक उत्पाद' (ODOP) पहल के तहत वैज्ञानिक रूप से उन्नत किया जाए, साथ ही इसके पारंपरिक स्वाद और पौष्टिक मूल्य को सुरक्षित रखा जाए।

कलाड़ी

  • परिचय: कलाड़ी उधमपुर (जम्मू-कश्मीर) का एक पारंपरिक डेयरी उत्पाद है, जिसे अपने दूधिया स्वाद और लचीली बनावट के कारण "जम्मू का मोज़रेला" कहा जाता है। इसे कच्चे फुल-फैट दूध से बनाया जाता है, जिसमें छाछ के पानी को प्राकृतिक जमाने वाले एजेंट के रूप में उपयोग किया जाता है।
  • GI टैग: GI टैग ने कलाड़ी के आर्थिक मूल्य और स्थानीय आजीविका को बढ़ाया है, मूलतः ग्रामीण युवाओं के लिये रोज़गार के अवसरों को बढ़ावा दिया है।
  • प्रमुख चुनौती: उत्पाद की कम शेल्फ लाइफ, मूलतः बिना प्रशीतन के, इसके बाजार पहुँच को सीमित करती है। सरकार का लक्ष्य वैज्ञानिक सत्यापन के माध्यम से इसे सुधारना है, साथ ही कलाड़ी के स्वाद, बनावट और पोषण संबंधी पहचान को संरक्षित रखते हुए व्यंजन विविधीकरण के अवसर उत्पन्न करना है।
  • वैज्ञानिक सहयोग: CSIR-केंद्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान (CSIR-CFTRI), मैसूर और CSIR-भारतीय एकीकृत चिकित्सा संस्थान (CSIR-IIIM), जम्मू, न्यूट्रीएंट प्रोफाइलिंग, वर्गीकरण, मूल्यवर्द्धन और शेल्फ लाइफ बढ़ाने पर सहयोग करेंगे ताकि कलाड़ी के उत्पादन को बढ़ाने में मदद मिल सके।
  • बाज़ार और निर्यात विस्तार: इस पहल का लक्ष्य कलाड़ी को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाज़ारों में लाना है, जिससे किसानों की आय में सुधार हो और विश्व भर में डोगरा व्यंजनों को प्रदर्शित किया जा सके।

और पढ़ें: 17 से अधिक उत्पादों के लिये GI टैग