संविधान (131वाँ संशोधन) विधेयक, 2026 का पारित न होना | 18 Apr 2026

स्रोत: द हिंदू

लोकसभा संविधान (131वाँ संशोधन) विधेयक, 2026 को पारित करने में विफल रही, जिसका उद्देश्य वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन को सक्षम बनाकर विधायिकाओं में महिलाओं के लिये 33% आरक्षण (जो 106वें संविधान संशोधन, 2023 द्वारा प्रस्तुत किया गया था) के कार्यान्वयन को शीघ्र करना था।

  • संबद्ध विधेयकों का प्रत्याहार: संविधान संशोधन विधेयक के विफल होने के कारण आश्रित वैधानिक विधेयकों, विशेष रूप से केंद्रशासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 तथा परिसीमन विधेयक, 2026 को तत्काल वापस लेना आवश्यक हो गया।
  • विशेष बहुमत की विफलता: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 368 के अनुसार, इस विधेयक को पारित करने के लिये विशेष बहुमत आवश्यक था, अर्थात सदन की कुल सदस्य संख्या का बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वाले  कम-से-कम दो-तिहाई सदस्यों का समर्थन।
    • 528 की कुल सदस्य संख्या वाले सदन में विधेयक को केवल 298 मत प्राप्त हुए, जो आवश्यक 352 के मानक से कम था।
  • परिसीमन और जनगणना का संबंध: इस विधेयक का उद्देश्य वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन को सक्षम बनाकर संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं पर लगे स्थगन को समाप्त करना था, जो 42वें संविधान संशोधन (1976) के तहत वर्ष 1971 की जनगणना के आधार पर लागू किया गया था।
    • इसका उद्देश्य वर्तमान जनसंख्या प्रतिरूपों के अनुरूप प्रतिनिधित्व को समायोजित कर “एक व्यक्ति, एक मत, एक मूल्य” के लोकतांत्रिक सिद्धांत को पुनर्स्थापित करना था।
    • यह स्थगन, जो प्रारंभ में वर्ष 2000 के बाद होने वाली पहली जनगणना तक जारी रहने के लिये निर्धारित था, बाद में 84वें संविधान संशोधन (2001) द्वारा वर्ष 2026 के बाद होने वाली पहली जनगणना तक बढ़ा दिया गया।
  • संघवाद बहस (उत्तर–दक्षिण विभाजन): मुख्य विधायी बाधा राज्यों के बीच जनसांख्यिकीय असमानता थी।
    • विपक्षी दलों का यह तर्क था कि जनसंख्या-आधारित परिसीमन लागू होने पर दक्षिणी राज्यों को उनके सफल जनसंख्या नियंत्रण प्रयासों हेतु नुकसान उठाना पड़ेगा। अतः उन्होंने महिला आरक्षण को परिसीमन की कार्यवाही से पृथक् करने का पुरज़ोर आग्रह किया।
  • नारी शक्ति वंदन अधिनियम (106वाँ संविधान संशोधन, 2023): यह अधिनियम 16 अप्रैल, 2026 को प्रभावी हुआ, जो राज्य विधानसभाओं एवं लोकसभा में महिलाओं हेतु 33% आरक्षण का प्रावधान करता है।
    • चूँकि अनुच्छेद 334A इस आरक्षण को आगामी जनगणना (2027 के उपरांत) के बाद होने वाले परिसीमन से संबद्ध करता है, इसलिये इसका वास्तविक निष्पादन वर्तमान में निलंबित है, जिससे इसके वर्ष 2034 से पूर्व क्रियान्वित होने की संभावना क्षीण है।
    • इसी विलंब को समाप्त कर महिला आरक्षण के लाभ को वर्ष 2029 तक सुनिश्चित करने के ध्येय से लोकसभा में संविधान (131वाँ संशोधन) विधेयक, 2026 तथा अन्य संबद्ध कानूनी प्रस्ताव पेश किये गए थे।

और पढ़ें: परिसीमन और विधानमंडलों में महिला आरक्षण