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मज़दूरों के अधिकारों के कथित उल्लंघन को लेकर CITU ने ILO का रुख किया

  • 29 Apr 2026
  • 18 min read

स्रोत: द हिंदू 

भारतीय ट्रेड यूनियन केंद्र (CITU) ने औपचारिक रूप से अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) में याचिका दायर की है, जिसमें केंद्र सरकार तथा उत्तर प्रदेश सरकार पर नोएडा और ग्रेटर नोएडा में श्रमिकों के मौलिक अधिकारों के व्यवस्थित उल्लंघन का आरोप लगाया गया है।

  • कथित उल्लंघन: यह शिकायत अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) की समिति ऑन फ्रीडम ऑफ एसोसिएशन के समक्ष दायर की गई, जिसमें संगठन की स्वतंत्रता, संघ बनाने के अधिकार, सामूहिक वार्ता और शांतिपूर्ण सभा के अधिकारों के ‘गंभीर, व्यापक और व्यवस्थित’ उल्लंघन का उल्लेख किया गया। 
    • CITU ने अप्रैल 2026 में श्रमिकों की लामबंदी के दौरान सामूहिक गिरफ्तारी, बल प्रयोग और शांतिपूर्ण श्रम विरोध प्रदर्शनों के अपराधीकरण जैसे दमनकारी उपायों का हवाला दिया। 
    • CITU ने पुलिस की ज्यादतियों की स्वतंत्र न्यायिक जाँच, प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध दर्ज आपराधिक मामलों की वापसी और सामूहिक वार्ता तंत्र की पुनर्स्थापना की मांग की है। 
  • आर्थिक कारक: ये विरोध प्रदर्शन वास्तविक मज़दूरी, जीवनयापन की बढ़ती लागत और श्रम संहिताओं को लेकर चिंताओं से प्रेरित थे, जिसमें उत्तर प्रदेश में न्यूनतम मज़दूरी के निर्वाह स्तर से भी नीचे होने का हवाला दिया गया है।  
  • अंतर्राष्ट्रीय मानक: याचिका में ILO से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया है कि भारत ILO कन्वेंशन संख्या 98 और मौलिक सिद्धांतों पर ILO घोषणा का अनुपालन करे।
    • ILO कन्वेंशन संख्या 98 में श्रमिकों, नियोक्ताओं और समाज के लिये सामूहिक वार्ता तंत्र को प्रभावी बनाने हेतु बुनियादी सिद्धांत को निर्धारित किया गया है।
    • वर्ष 1998 में अपनाई गई और वर्ष 2022 में संशोधित, कार्यस्थल पर मौलिक सिद्धांतों और अधिकारों पर ILO घोषणा, कार्यस्थल में बुनियादी मानवीय मूल्यों को बनाए रखने के लिये सरकारों, नियोक्ताओं और श्रमिकों द्वारा की गई एक वैश्विक प्रतिबद्धता है।
      • इसमें बताया गया है कि ILO के सभी सदस्य देश, संबंधित संधियों के अनुसमर्थन की परवाह किये बगैर, सिद्धांतों की पाँच मुख्य श्रेणियों का सम्मान करें और उन्हें बढ़ावा दें।
    • अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के पाँच मूल श्रम मानक निम्नलिखित हैं:
      • संगठित एवं सामूहिक वार्ता के अधिकार पर कन्वेंशन।
      • बलात् श्रम का उन्मूलन पर कन्वेंशन।
      • बलात् श्रम पर कन्वेंशन।
      • भेदभाव (रोजगार और व्यवसाय) पर कन्वेंशन।
      • सुरक्षित और स्वस्थ कार्य वातावरण।

ILO_Conventions

और पढ़ें: श्रमिक प्रदर्शन और श्रम सुधार, अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन 

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