मसाला बाज़ार में चीन का प्रवेश | 17 Jan 2026
चीन भारत के दो प्रमुख मसाला निर्यात, मिर्च एवं जीरा, की खेती और निर्यात को कम तथा अधिक प्रतिस्पर्द्धात्मक कीमतों पर उपलब्ध करा रहा है, यह बदलता परिदृश्य विश्व के सबसे बड़े मसाला आपूर्तिकर्त्ता के रूप में भारत के लंबे समय से स्थापित प्रभुत्व को चुनौती दे सकता है।
- मिर्च भारत के मसाला निर्यात की रीढ़ है, जो कुल निर्यात मात्रा और मूल्य का 25% से अधिक हिस्सा रखती है। वहीं जीरा उच्च मूल्य एवं सर्वाधिक मांग वाले मसालों में शामिल है, जिसकी पश्चिम एशिया, यूरोप और अमेरिका में विशेष रूप से अधिक मांग है, जहाँ इसका व्यापक उपयोग खाद्य प्रसंस्करण और पाक अनुप्रयोगों में किया जाता है।
- निर्यात प्रदर्शन: वर्ष 2024-25 में भारत ने मसाला निर्यात में मात्रात्मक रूप से उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है। मिर्च पाउडर का निर्यात 35% बढ़कर 80.6 मिलियन कि.ग्रा. हो गया, जबकि कुल मिर्च निर्यात 19% बढ़कर 7 लाख टन से अधिक रहा। इसकी तुलना में वर्ष 2023-24 में वृद्धि दर 15% थी।
- मूल्य दबाव: अधिक निर्यात मात्रा के बावजूद वैश्विक स्तर पर अत्यधिक मूल्य दबाव के कारण मिर्च निर्यात से होने वाली आय में 11% की गिरावट दर्ज की गई। इसके विपरीत, जीरा निर्यात वर्ष 2023-24 के 1.65 लाख टन से बढ़कर वर्ष 2024-25 में 39% की वृद्धि के साथ 2.29 लाख टन तक पहुँच गया।
- चीन की रणनीति: चीन उच्च मांग वाली मिर्च प्रकारों जैसे कि पेपरिका (जो कि अपने रंग और हल्के स्वाद के लिये प्रसिद्ध है) और तेजा मिर्च (यह अधिक तीखेपन और औषधीय उपयोग के लिये प्रसिद्ध है) पर ध्यान केंद्रित करके वैश्विक मसाला बाज़ार में अपनी उपस्थिति मज़बूत कर रहा है। साथ ही, यह कच्ची भारतीय मिर्च का आयात कर उसे देश में प्रसंस्कृत करता है और तैयार उत्पादों को प्रतिस्पर्द्धी कीमतों पर तीसरे देशों के बाज़ारों में पुनः निर्यात करता है।
- भारतीय कृषि पर प्रभाव: भारत एक ही समय में कई प्रकार की चुनौतियों का सामना कर रहा है:
- आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक जैसे प्रमुख मिर्च उत्पादक राज्यों में मिर्च की बुआई का क्षेत्रफल लगभग 35% घट गया है। जीरा की खेती का क्षेत्रफल 7-8% कम हो गया है।
- ये गिरावटें मौसम संबंधी फसल हानि और लगातार कम निर्यात कीमतों के कारण हुई हैं, जिससे किसानों में विशेषकर खरीफ मौसम में मिर्च और जीरा बोने की रुचि कम हो गई है।
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