INS अंजदीप | 24 Feb 2026

स्रोत: पीआईबी

भारतीय नौसेना चेन्नई बंदरगाह स्थित पूर्वी नौसेना कमान में अंजदीप, एक स्वदेशी एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट (ASW-SWC) को शामिल करने जा रही है, जिससे महत्त्वपूर्ण तटीय जलक्षेत्रों में जल के भीतर के खतरों का सामना करने की उसकी क्षमताएँ सुदृढ़ होंगी।

  • सामरिक महत्त्व: ASW-SWC परियोजना के तहत अंजदीप को आठ जहाज़ों में तीसरा स्थान प्राप्त है, जो रक्षा में 'आत्मनिर्भर भारत' की दिशा में एक प्रमुख प्रतिनिधित्व को दर्शाता है। इसका निर्माण कोलकाता की गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) द्वारा किया गया है। 
    • यह भारतीय नौसेना के एक दुर्जेय यूनिट 'बिल्डर्स नेवी' में परिवर्तन के रूप में एक महत्त्वपूर्ण परिवर्तन  का प्रतीक है, जो युद्धपोत निर्माण में आत्मनिर्भरता पर बल देता है।
  • प्राथमिक भूमिका एवं उपनाम: इसे एक 'डॉल्फिन हंटर' के रूप में कार्य करने के लिये विकसित/डिज़ाइन किया गया है, जिसका कार्य तटीय क्षेत्रों में दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाना, उन पर नज़र रखना और उन्हें निष्प्रभावी करना है।
  • स्वदेशी हथियार एवं सेंसर: यह युद्धपोत एक अत्याधुनिक स्वदेशी हथियार और सेंसर पैकेज से सुसज्जित है, जिसमें हल माउंटेड सोनार 'अभय', साथ ही लाइटवेट टॉरपीडो और ASW रॉकेट शामिल हैं।
    • अपनी मुख्य ASW (पनडुब्बी-रोधी युद्ध) भूमिका के अतिरिक्त, यह अत्यधिक गतिशील तटीय निगरानी, अल्प तीव्रता समुद्री संचालन (LIMO) और खोज एवं बचाव (SAR) मिशनों को संचालित करने में सक्षम है।
    • इसमें एक उच्च-गति वाली वाटर-जेट प्रणोदन प्रणाली है, जो इसे तीव्र प्रतिक्रिया हेतु 25 नॉट की अधिकतम गति प्राप्त करने में सक्षम बनाती है।
  • अंजदीप द्वीप का महत्त्व: इस पोत का नाम अंजदीप द्वीप (गोवा का भाग) के नाम पर रखा गया है, जो अरब सागर में सामरिक रूप से स्थित है। वास्को-डि-गामा ने भारत की अपनी पहली यात्रा के दौरान, 24 सितंबर, 1498 को इस द्वीप को पुर्तगाली क्राउन क्षेत्र घोषित किया था।

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