गैस की वैश्विक आपूर्ति जोखिमों के आलोक में तापन की वैकल्पिक प्रौद्योगिकियाँ | 14 Mar 2026
चर्चा में क्यों?
अमेरिका और इज़रायल के ईरान के साथ जारी संघर्ष के कारण होर्मुज़ जलडमरूमध्य में जोखिम की स्थिति बढ़ गई है, जो तेल और गैस के परिवहन का महत्त्वपूर्ण वैश्विक मार्ग है। चूँकि भारत अपनी प्राकृतिक गैस का लगभग आधा हिस्सा आयात करता है इसलिये उद्योगों को गैस की आपूर्ति कम होने से विद्युतीकृत ताप और संकेंद्रित सौर तापीय प्रणालियों जैसी वैकल्पिक तापन तकनीकों की आवश्यकता उजागर हुई है।
औद्योगिक अनुप्रयोगों के लिये प्रमुख तापन प्रौद्योगिकियाँ कौन-सी हैं?
संकेंद्रित सौर तापीय (CST) प्रौद्योगिकी
- कार्यप्रणाली: सौर फोटोवोल्टिक (PV) पैनलों के विपरीत, जो सूर्य प्रकाश को विद्युत (इलेक्ट्रॉन) में परिवर्तित करने हेतु अर्द्धचालकों के उपयोग पर आधारित हैं, CST प्रणालियों में सूर्य प्रकाश को एक रिसीवर पर केंद्रित करने के लिये दर्पण या परावर्तक सतहों का उपयोग शामिल है।
- रिसीवर ऊष्मा को ग्रहण करता है और उसे तेल, गलित लवण या प्रावस्था अंतरण सामग्री जैसे थर्मल एनर्जी स्टोरेज (TES) माध्यम में संगृहीत करता है।
- संगृहीत ऊष्मा का उपयोग प्रत्यक्ष रूप से औद्योगिक प्रक्रियाओं के लिये किया जा सकता है, जिससे ऊष्मीय/तापीय ऊर्जा की आवश्यकता वाले क्षेत्रों को कार्बन मुक्त करने में मदद मिलेगी।
- ऊष्मा उत्पादन: इसके अंतर्गत किसी द्रव (जैसे– जल, थर्मल तेल या गलित लवण) को अत्यधिक तापमान (400 डिग्री सेल्सियस तक) पर तापन किया जाता है, जिससे तीव्र ऊष्मा उत्पन्न होती है।
- औद्योगिक अनुप्रयोग: यह वस्त्र उद्योग जैसे उद्योगों के लिये अत्यधिक उपयुक्त है, जहाँ सफाई और विरंजन जैसी प्रक्रियाओं के लिये 100°C और 180°C के बीच तापमान पर भाप की आवश्यकता होती है।
- ग्रिड पर निर्भरता से मुक्ति: CST संबद्ध साइट पर ही ऊष्मीय ऊर्जा उत्पन्न कर सकता है और इसे इंसुलेटेड टैंकों में संगृहीत कर सकता है।
- यह तापीय भंडारण लिथियम-आयन बैटरियों की तुलना में काफी सस्ता होता है और इससे कारखाने राष्ट्रीय ग्रिड से बिजली की आवश्यकता के बिना 24×7 संचालन कर सकते हैं।
- भारत की क्षमता: नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) के अनुसार, भारत में CST की क्षमता 6.4 गीगावाट है।
विद्युतचुंबकीय प्रेरण तापन
- परंपरागत औद्योगिक बॉयलर ईंधन के दहन के साथ एक मध्यवर्ती माध्यम (जैसे– हवा या भाप) का तापन किये जाने पर आधारित हैं, जिसके पश्चात् लक्षित उत्पाद का तापन होता है। इससे भारी मात्रा में ऊष्मा हानि होती है। प्रेरण तापन अथवा इंडक्शन हीटिंग में मध्यवर्ती माध्यम की आवश्यकता नहीं होती, जिससे ऊष्मा प्रत्यक्ष रूप से लक्षित सामग्री के अंदर उत्पन्न होती है।
- कार्यप्रणाली:
- विद्युतचुंबकीय क्षेत्र: तांबे की एक कुंडली से प्रत्यावर्ती विद्युत धारा (AC) प्रवाहित की जाती है, जिससे तेज़ी से परिवर्तनशील चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है।
- भँवर (Eddy) धाराएँ: जब किसी चालक धातु को इस चुंबकीय क्षेत्र के अंदर रखा जाता है, तो यह धातु के भीतर लघु, स्थानस्थ विद्युत धाराएँ उत्पन्न करती है, जिन्हें भँवर धाराएँ कहा जाता है।
- जूल तापन: जब ये भँवर धाराएँ प्रवाहित होती हैं, तब धातु का प्राकृतिक विद्युत प्रतिरोध विद्यमान होता है। यह प्रतिरोध विद्युत ऊर्जा को प्रत्यक्ष रूप से भीतर से ऊष्मा में परिवर्तित कर देता है। इस प्रक्रिया को जूल तापन कहते हैं।
- उद्योग के लिये प्रमुख लाभ:
- अद्वितीय दक्षता: चूँकि निकटवर्ती परिवेश में वायु या निकास चिमनियों में कोई ऊष्मा नष्ट नहीं होती है, इसलिये इसकी तापीय दक्षता 90% से अधिक हो सकती है।
- तीव्र और सटीक: इसके अंतर्गत सामग्रियों का द्रुत तापन होता है और अत्यधिक स्थानस्थ ताप की सुविधा मिलती है (ऑटोमोटिव और धातु निर्माण उद्योगों में उपयोगी)।
- शून्य प्रत्यक्ष उत्सर्जन: नवीकरणीय ऊर्जा से संचालित होने पर यह तापन प्रक्रिया के कार्बन फुटप्रिंट को पूर्ण रूप से समाप्त कर देता है।
प्लाज़्मा टॉर्च
- यद्यपि इंडक्शन तकनीक धातुओं के लिये अत्यंत प्रभावी है, किंतु सिरेमिक तथा सीमेंट जैसे भारी उद्योगों में निरंतर अत्यधिक उच्च तापमान (अक्सर 1,000°C से अधिक) की आवश्यकता होती है, जिसे सामान्य विद्युत हीटर प्राप्त नहीं कर पाते।
- इन अत्यधिक तापीय आवश्यकताओं की पूर्ति के लिये प्लाज़्मा आर्क प्रौद्योगिकी गैस ज्वालाओं के स्थान पर एक स्वच्छ विकल्प प्रदान करती है।
- तंत्र:
- विद्युत आर्क का निर्माण: यह प्रक्रिया टॉर्च के भीतर दो इलेक्ट्रोडों के बीच उच्च वोल्टता वाला विद्युत आर्क उत्पन्न करने से प्रारंभ होती है।
- गैस का आयनीकरण: एक कार्यशील गैस (जैसे-आर्गन या नाइट्रोजन) को इस तीव्र इलेक्ट्रिक आर्क के माध्यम से प्रवाहित किया जाता है।
- गैस का प्लाज़्मा में रूपांतरण: अत्यधिक ऊर्जा गैस के परमाणुओं से इलेक्ट्रॉनों को अलग कर देती है, जिससे गैस प्लाज़्मा में परिवर्तित हो जाती है, जिसे सामान्यतः पदार्थ की चौथी अवस्था के रूप में जाना जाता है।
- तापीय ऊर्जा का उत्सर्जन: जब यह अत्यधिक ऊर्जा-संपन्न प्लाज़्मा जेट टॉर्च से बाहर निकलता है, तो यह लक्ष्य पदार्थ पर अत्यधिक मात्रा में तापीय ऊर्जा उत्सर्जित करता है।
- उद्योगों के लिये प्रमुख लाभ:
- अत्यधिक उच्च तापमान: प्लाज़्मा टॉर्च आसानी से 5,000°C से 10,000°C से अधिक तक का कोर तापमान उत्पन्न कर सकते हैं (जो सूर्य की सतह से भी अधिक होता है), जो इन्हें स्मेल्टिंग तथा उन्नत सिरेमिक के लिये अत्यंत उपयुक्त बनाता है।
- नियंत्रित रासायनिक वातावरण: विशिष्ट अक्रिय अथवा अभिक्रियाशील गैसों का उपयोग करके प्लाज़्मा तैयार करने से उद्योग रासायनिक वातावरण को नियंत्रित कर सकते हैं, जिससे ताप प्रक्रिया के दौरान पदार्थों के ऑक्सीकरण अर्थात् ज़ंग लगने से बचाव किया जा सकता है।
- ईंधन का प्रतिस्थापन: यह भारी विनिर्माण में प्रयुक्त अत्यधिक प्रदूषणकारी कोयला अथवा प्राकृतिक गैस भट्ठियों के स्थान पर प्रत्यक्ष विद्युत-आधारित विकल्प प्रदान करता है।
सौर-आधारित औद्योगिक ताप प्रणाली में वैश्विक श्रेष्ठ प्रथाएँ
- ओमान – मीराह परियोजना: यह एक बड़े संकेंद्रित सौर तापीय (CST) प्रौद्योगिकी संयंत्र को गैस-आधारित संचालन के साथ एकीकृत करती है। दिन के समय सौर-आधारित भाप उत्पादन के माध्यम से प्राकृतिक गैस के उपयोग में लगभग 80% तक कमी आई है।
- स्पेन – औद्योगिक प्रक्रियाओं के लिये सौर ताप: स्पेन ने प्लग-एंड-प्ले सोलर थर्मल इकाइयाँ विकसित की हैं, जिन्हें आसानी से स्थापित कर मौजूदा औद्योगिक भाप प्रणालियों से जोड़ा जा सकता है।
- डेनमार्क – हीट परचेज़ एग्रीमेंट्स: यहाँ उद्योग बाहरी प्रदाताओं से ताप का क्रय करते हैं, जो संकेंद्रित सौर तापीय (CST) प्रौद्योगिकी या इंडक्शन प्रणालियों का संचालन करते हैं। इस व्यवस्था को बड़े पैमाने की तापीय भंडारण प्रणालियों का समर्थन प्राप्त है, जिनके माध्यम से अतिरिक्त ताप को संगृहीत किया जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. संकेंद्रित सौर तापीय (CST) प्रौद्योगिकी क्या है?
संकेंद्रित सौर तापीय (CST) प्रौद्योगिकी में दर्पणों की सहायता से सूर्य के प्रकाश को एक रिसीवर पर केंद्रित किया जाता है, जिससे उच्च तापमान वाली ऊष्मा उत्पन्न होती है। इस ऊष्मा को थर्मल एनर्जी स्टोरेज (TES) प्रणालियों में संगृहीत कर औद्योगिक अनुप्रयोगों में उपयोग किया जा सकता है।
2. भारत में CST की अनुमानित क्षमता कितनी है?
नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) के अनुसार भारत में CST की अनुमानित क्षमता लगभग 6.4 गीगावाट (GW) है।
3. इंडक्शन हीटिंग कैसे कार्य करती है?
इंडक्शन हीटिंग में प्रत्यावर्ती धारा (AC) के माध्यम से एक चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न किया जाता है, जिससे चालक पदार्थों में एडी करंट प्रेरित होते हैं। ये करंट जूल हीटिंग के माध्यम से ऊष्मा उत्पन्न करते हैं।
4. उद्योगों में प्लाज़्मा टॉर्च का उपयोग किसलिये किया जाता है?
प्लाज़्मा टॉर्च अत्यधिक उच्च तापमान (5,000–10,000°C) उत्पन्न कर सकते हैं, इसलिये इनका उपयोग स्मेल्टिंग (smelting), सिरेमिक निर्माण तथा अन्य उच्च तापमान वाली औद्योगिक प्रक्रियाओं में किया जाता है।
5. भारत के लिये औद्योगिक ऊष्मा का विद्युतीकरण क्यों महत्त्वपूर्ण है?
इससे आयातित जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम होती है, ऊर्जा सुरक्षा सुदृढ़ होती है तथा औद्योगिक डीकार्बोनाइज़ेशन और जलवायु लक्ष्यों की प्राप्ति में सहायता मिलती है।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न
प्रिलिम्स
Q. 'पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना' के बारे में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये :
I. इसका लक्ष्य आवासीय सेक्टर में एक करोड़ घरों की छतों पर सौर पैनल लगाना है।
II. नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय का लक्ष्य छतों पर सौर पैनल लगाने, उनके प्रचालन, अनुरक्षण और मरम्मत करने के विषय में आधार-स्तर पर प्रशिक्षण प्रदान करना है।
III. इसका लक्ष्य, क्षमता निर्माण के स्कीम घटक के अंतर्गत, नए कौशल सिखाकर और कौशल का उन्नयन कर तीन लाख से अधिक कुशल जनशक्ति सृजित करना है।
उपर्युक्त कथनों में कौन-कौन से सही हैं?
(a) केवल I और II
(b) केवल I और III
(c) केवल II और III
(d) I, II और III
उत्तर: (d)
प्रश्न. “सतत विकास लक्ष्यों (SDG) को प्राप्त करने के लिये सस्ती, विश्वसनीय, टिकाऊ और आधुनिक ऊर्जा तक पहुँच अनिवार्य है।” इस संबंध में भारत में हुई प्रगति पर टिप्पणी कीजिये। (2018)