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भारत में सिक्किम के विलय की 50वीं वर्षगांठ

  • 30 Apr 2026
  • 66 min read

स्रोत: पीआईबी 

चर्चा में क्यों? 

भारत के प्रधानमंत्री ने गंगटोक में सिक्किम राज्य के 50 वर्ष पूर्ण होने के समापन समारोह में भाग लिया।

  • कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने सिक्किम के प्राकृतिक और जैविक खेती मॉडल की सराहना की, जो पूरे देश के लिये एक आदर्श के रूप में कार्य करता है।

सिक्किम को राज्य का दर्जा मिलने से संबंधित मुख्य तथ्य क्या हैं?

  • चोग्याल वंश: भारत में विलय से पहले सिक्किम एक स्वतंत्र हिमालयी राज्य था, जिस पर नामग्याल वंश का शासन था। इस वंश के शासकों को ‘चोग्याल’ कहा जाता था, जिन्होंने वर्ष 1642 से 1975 तक वंशानुगत राजशाही के रूप में शासन किया। 
  • ब्रिटिश औपनिवेशिक संधियाँ
    • तितालिया संधि (1817): इसने ब्रिटिश अधिकारियों को इस क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण वाणिज्यिक और राजनीतिक लाभ प्रदान किये।
    • तुमलोंग संधि (1861): इसने औपचारिक रूप से सिक्किम को ब्रिटिश भारत का एक संरक्षित राज्य (प्रोटेक्टोरेट) स्थापित किया। 
  • कलकत्ता कन्वेंशन (1890): कलकत्ता संधि (1890): इसमें सिक्किम-तिब्बत सीमा का सीमांकन किया गया था, जिस पर वायसराय लॉर्ड लैंसडाउन और तिब्बत में किंग चीन के इंपीरियल एसोसिएट रेजीडेंट ने हस्ताक्षर किये थे। इसकी पुष्टि ल्हासा कन्वेंशन (1904) द्वारा की गई।
  • “संरक्षित राज्य” (प्रोटेक्टोरेट) का दर्जा (1947–1974): 1947 में भारत की स्वतंत्रता के समय सिक्किम ने तुरंत भारतीय संघ में शामिल होने का निर्णय नहीं लिया।
    • इसके बजाय 1950 की भारत–सिक्किम संधि के तहत सिक्किम एक भारतीय “संरक्षित राज्य” (प्रोटेक्टोरेट) बन गया। इसका अर्थ था कि सिक्किम ने आंतरिक स्वायत्तता बनाए रखी, जबकि भारत सरकार ने उसकी रक्षा, विदेश नीति और संचार की ज़िम्मेदारी संभाली।
  • एक 'सह- राज्य' के रूप में परिवर्तन (1974): 1970 के दशक की शुरुआत तक, सिक्किम में राजनीतिक अशांति बढ़ रही थी, जहाँ स्थानीय आबादी अधिक लोकतांत्रिक अधिकारों और भारत के साथ घनिष्ठ संबंधों की मांग कर रही थी।
    • इसकी प्रतिक्रिया में भारतीय संसद ने वर्ष 1974 में 35वाँ संविधान संशोधन अधिनियम पारित किया। इस संशोधन ने सिक्किम को भारतीय संघ के 'सह- राज्य' का विशिष्ट दर्जा प्रदान किया, ऐसा दर्जा जो न तो इससे पहले और न ही इसके बाद किसी अन्य राज्य को दिया गया।
  • पूर्ण राज्य का दर्जा (1975): सह- राज्य” का दर्जा सिक्किम के लोगों की लोकतांत्रिक आकांक्षाओं को पूरी तरह संतुष्ट नहीं कर पाया। अप्रैल 1975 में सिक्किम के मुख्यमंत्री ने पूर्ण विलय के लिये भारतीय संसद से अपील की।
    • एक विशेष जनमत संग्रह आयोजित किया गया, जिसमें 97% से अधिक मतदाताओं ने चोग्याल राजशाही को समाप्त कर पूर्ण रूप से भारत में शामिल होने का समर्थन किया।
    • इसके परिणामस्वरूप 36वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 1975 पारित किया गया, जिसने 16 मई 1975 को सिक्किम को आधिकारिक रूप से भारतीय संघ का 22वाँ राज्य बना दिया। 
  • विशेष संवैधानिक प्रावधान: सिक्किम के लोगों की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान, इतिहास और भूमि अधिकारों की रक्षा के लिये भारतीय संविधान में अनुच्छेद 371F जोड़ा गया।
    • यह अनुच्छेद पुराने सिक्किमी कानूनों को संरक्षित करता है और यह सुनिश्चित करता है कि गैर-सिक्किमी व्यक्तियों द्वारा भूमि और संपत्ति आसानी से खरीदी न जा सके, जिससे स्थानीय जनसांख्यिकीय संरचना सुरक्षित रहती है।
    • सिक्किम भारत का एकमात्र राज्य है जहाँ पात्र मूल निवासियों को आयकर से छूट प्राप्त है, जो भारतीय संविधान के अनुच्छेद 371F और आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 10(26AAA) के तहत सुनिश्चित की गई है। 
      • यह विशेष दर्जा 1975 के विलय समझौते से उत्पन्न हुआ है, जिसके अनुसार सिक्किम के भीतर अर्जित आय पर निवासियों को आयकर से छूट प्राप्त है।

सिक्किम: जैविक खेती में अग्रणी राज्य

  • वर्ष 2016 में सिक्किम को भारत (और विश्व) का पहला 100% जैविक राज्य घोषित किया गया। यह यात्रा वर्ष 2003 में एक विधायी प्रस्ताव से शुरू हुई थी, जिसमें रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों को पूरी तरह समाप्त कर जैविक विकल्पों को अपनाया गया।
  • वर्ष 2018 में, सिक्किम के अग्रणी मॉडल ने प्रतिष्ठित UN FAO 'फ्यूचर पॉलिसी गोल्ड अवार्ड' (जिसे अक्सर 'सर्वश्रेष्ठ नीतियों के लिये ऑस्कर' कहा जाता है) जीता, जिससे विश्व को यह सिद्ध हुआ कि जैविक खेती की ओर बड़े पैमाने पर संक्रमण पारिस्थितिक रूप से महत्त्वपूर्ण और आर्थिक रूप से व्यावहारिक दोनों है।

भारत के लिये सिक्किम मॉडल का महत्त्व

  • पारिस्थितिक संतुलन: यह भूजल प्रदूषण को रोकता है, स्थानीय जैव विविधता (वनस्पति, जीव और मधुमक्खियों जैसे महत्त्वपूर्ण परागणकों) की रक्षा करता है और मिट्टी के क्षरण को कम करता है।
  • जलवायु अनुकूलन: जैविक मृदा में जल-धारण क्षमता अधिक होती है और यह कार्बन पृथक्करण में प्रभावी भूमिका निभाती है। इससे कृषि प्रणाली जलवायु परिवर्तन जनित अनिश्चित मौसम और सूखे जैसी स्थितियों का सामना करने में अधिक सक्षम बनती है।
  • स्वास्थ्य लाभ: यह खाद्य शृंखला में जहरीले रासायनिक अवशेषों के जैव-आवर्द्धन के जोखिम को समाप्त करता है, जिससे अत्यधिक रसायनों का प्रयोग करने वाले कृषि क्षेत्रों (जैसे पंजाब) में देखी जाने वाली गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का समाधान होता है।
  • द सिक्किमी प्रीमियम: जैविक प्रमाणीकरण किसानों को घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय बाज़ारों में अपने उत्पादों के लिये प्रीमियम (बेहतर) कीमतें प्राप्त करने की अनुमति देता है, जिससे ग्रामीण आजीविका में सुधार होता है।
  • ईको-टूरिज्म के लिये उत्प्रेरक: '100% जैविक' टैग ने सिक्किम को कल्याणकारी जीवन शैली और ईको-टूरिज्म हेतु एक प्रमुख गंतव्य में बदल दिया है, जिससे फार्म-स्टे के माध्यम से किसानों के लिये आय के माध्यमिक स्रोत तैयार हुए हैं।

सिक्किम

  • सामरिक सीमाएँ: पूर्वी हिमालय में स्थित सिक्किम, उत्तर/उत्तर-पूर्व में चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र, दक्षिण-पूर्व में भूटान तथा पश्चिम में नेपाल के साथ अत्यंत संवेदनशील अंतर्राष्ट्रीय सीमाएँ साझा करता है, साथ ही पश्चिम बंगाल के साथ आंतरिक सीमा भी।
  • पर्वत चोटियाँ: यहाँ कंचनजंगा पर्वत स्थित है, जिसे भारत की सबसे ऊँची चोटी और विश्व की तीसरी सबसे ऊँची चोटी होने का गौरव प्राप्त है।
  • नदी तंत्र: राज्य की जल निकासी मुख्यतः तीस्ता नदी (ब्रह्मपुत्र की एक महत्त्वपूर्ण सहायक नदी) और उसकी सहायक नदियों जैसे रंगीत, लोनक और तालुंग के माध्यम से होती है। तीस्ता नदी के जल का विभाजन भारत और बांग्लादेश के बीच एक प्रमुख विवादास्पद राजनयिक मुद्दा बना हुआ है।
  • हिमनद और उच्च-तुंगता वाली झीलें: महत्त्वपूर्ण हिमनद संरचनाओं में ज़ेमू और लोनक हिमनद शामिल हैं। प्रमुख झीलों में गुरुदोंगमार, चांगु (त्सोम्गो) और मेन्मेचो शामिल हैं।
  • महत्त्वपूर्ण पर्वतीय दर्रे: सीमा पारगमन और व्यापार की सुविधा प्रदान करने वाले प्रमुख सामरिक दर्रों में नाथुला, जेलेप ला, डोंगखा ला और चिवाभांजांग दर्रा शामिल हैं।
  • जैव विविधता हॉटस्पॉट: भारत के भौगोलिक क्षेत्र का मात्र 0.2% हिस्सा होने के बावजूद, सिक्किम को वैश्विक स्तर पर पूर्वी हिमालय जैवविविधता हॉटस्पॉट के एक मुख्य घटक के रूप में मान्यता प्राप्त है।
  • वनस्पति और जीव-जंतु: वनस्पति रोडोडेंड्रोन और ओक के लिये प्रसिद्ध है। यहाँ दुर्लभ और लुप्तप्राय जीव-जंतु पाए जाते हैं, विशेष रूप से लाल पांडा (राज्य पशु), तिब्बती मृग, नीली भेड़ और गोरल।
  • संरक्षित क्षेत्र: राज्य का पारिस्थितिक मुकुट कंचनजंगा राष्ट्रीय उद्यान है, जिसे वर्ष 2016 में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल (भारत का पहला 'मिश्रित' स्थल) घोषित किया गया था और वर्ष 2018 में इसे बायोस्फीयर रिज़र्व नामित किया गया था। अन्य उल्लेखनीय अभयारण्यों में पांगोलखा और वार्से रोडोडेंड्रोन वन्यजीव अभयारण्य शामिल हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. सिक्किम भारत का पूर्ण राज्य कब बना?
सिक्किम 16 मई 1975 को 36वें संविधान संशोधन के माध्यम से भारत का 22वाँ राज्य बना।

2. अनुच्छेद 371F का क्या महत्त्व है?
यह सिक्किम को विशेष संरक्षण प्रदान करता है, उसके कानूनों, भूमि अधिकारों और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा करता है।

3. राज्य बनने से पहले सिक्किम की स्थिति क्या थी?
यह एक भारतीय संरक्षित राज्य (1950–1974) और बाद में एक सह- राज्य (1974) था।

4. सिक्किम को भारत की जैविक खेती का अग्रणी क्यों कहा जाता है?
यह वर्ष 2016 में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का उन्मूलन करके विश्व का पहला 100% जैविक राज्य बना

5. सिक्किम के जैविक कृषि मॉडल के क्या लाभ हैं?
यह पारिस्थितिक संतुलन, जलवायु अनुकूलन, बेहतर स्वास्थ्य परिणाम, प्रीमियम मूल्य निर्धारण और इको-पर्यटन के विकास को बढ़ावा देता है।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ) 

प्रिलिम्स

प्रश्न. तीस्ता नदी के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2017)

1. तीस्ता नदी का उद्‍गम वही है जो ब्रह्मपुत्र का है लेकिन यह सिक्किम से होकर बहती है।

2. रंगीत नदी की उत्पति सिक्किम में होती है और यह तीस्ता नदी की एक सहायक नदी है।

3. तीस्ता नदी, भारत एवं बांग्लादेश की सीमा पर बंगाल की खाड़ी में जा मिलती है।

ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा सही है/हैं?

(a) केवल 1 और 3

(b) केवल 2

(c) केवल 2 और 3

(d) 1, 2 और 3

उत्तर: (b)

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