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क्यों बढ़ रहा है भूखमरी का अनुपात | 05 Dec 2018 | विविध

संदर्भ


वर्ष 2003 और 2014 के बीच, लगभग एक दशक तक दुनिया भर में अल्पपोषित लोगों की संख्या में लगातार गिरावट (संख्या के संदर्भ में 961.5 मिलियन से 783.7 मिलियन और कुल आबादी के संदर्भ में 15.1% से 10.7%) देखने को मिली, लेकिन पिछले तीन वर्षों के दौरान यह परिदृश्य पूरी तरह से उलट गया है।

वैश्विक स्थिति

संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO)

कुपोषण क्या है?

कुपोषण का प्रभाव

(टीम दृष्टि इनपुट)

क्या है भारत का रुझान

Food Prices India

संघर्ष और जलवायु

आर्थिक मंदी

चैनिंग के अनुसार, वर्ष 2008-09 की तरह (ग्राफ देखें) खाद्य कीमतों में बढ़ोतरी विक्रेताओं को छोड़कर सभी के लिये नुकसानदेह लेकिन, अच्छी खबर यह है कि उच्च कीमतें उत्पादन को प्रोत्साहित कर सकती हैं, जिससे कृषि आय में वृद्धि होने कि संभावना बनती है और परिणामस्वरूप अकुशल कृषि श्रमिकों की मांग में भी वृद्धि होती है। कुल ग्रामीण मज़दूरी में भी इज़ाफा होगा जिसके परिणामस्वरूप क्रय शक्ति में वृद्धि होगी। स्पष्ट रूप से बढ़ी हुई क्रय शक्ति जहाँ एक ओर भुखमरी की समस्या से निजत दिलाने में सहायक सिद्ध होगी, वहीं दूसरी ओर बेहतर जीवन स्तर एवं स्वास्थ्य संबंधी सतत् विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में भी कारगर होगी।


स्रोत- इंडियन एक्सप्रेस