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अपशिष्ट प्रबंधन | 24 Dec 2019 | जैवविविधता और पर्यावरण

इस Editorial में The Hindu, The Indian Express, Business Line आदि में प्रकाशित लेखों का विश्लेषण किया गया है। इस लेख में अपशिष्ट प्रबंधन संबंधी विभिन्न महत्त्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा की गई है। आवश्यकतानुसार, यथास्थान टीम दृष्टि के इनपुट भी शामिल किये गए हैं।

संदर्भ

बढ़ते शहरीकरण और उसके प्रभाव से निरंतर बदलती जीवनशैली ने आधुनिक समाज के सम्मुख घरेलू तथा औद्योगिक स्तर पर उत्पन्न होने वाले अपशिष्ट के उचित प्रबंधन की गंभीर चुनौती प्रस्तुत की है। वर्ष-दर-वर्ष न केवल अपशिष्ट की मात्रा में बढ़ोतरी हो रही है, बल्कि प्लास्टिक और पैकेजिंग सामग्री की बढ़ती हिस्सेदारी के साथ ठोस अपशिष्ट के स्वरूप में भी बदलाव नज़र आ रहा है। हालाँकि अपशिष्ट प्रबंधन की बढ़ती समस्या ने देश को इस विषय पर नए सिरे से सोचने को मज़बूर किया है और इस संदर्भ में कई तरह के सराहनीय प्रयास भी किये जा रहे हैं, परंतु इस प्रकार के प्रयास अभी तक देश भर में व्यापक स्तर पर अपशिष्ट प्रबंधन की समस्या से निपटने के लिये अपनी उपयोगिता साबित करने में नाकाम रहे हैं।

अपशिष्ट (Waste) क्या है?

पारिस्थितिकी तंत्र और स्वास्थ्य पर होता है प्रभाव

अपशिष्ट प्रबंधन 

संबंधी कानूनी प्रावधान:
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2016 
Solid Waste Management Rules, 2016

कंस्ट्रक्शन एवं डेमोलिशन अपशिष्ट प्रबंधन नियम
Construction and Demolition (C&D) Waste Management Rules

ई-कचरा प्रबंधन नियम
E-waste (Management) Rules

अपशिष्ट प्रबंधन संबंधी चुनौतियाँ

आगे की राह

प्रश्न :अपशिष्ट प्रबंधन के अर्थ को स्पष्ट करते हुए देश में इससे संबंधी चुनौतियों और सरकार द्वारा इस संदर्भ में किये गए प्रयासों पर चर्चा कीजिये।