पर्यटन: भारत की नई आर्थिक सीमा | 16 Feb 2026
यह एडिटोरियल 13/02/2026 को द हिंदू के बिज़नेस लाइन में प्रकाशित “Give tourism a boost” शीर्षक वाले लेख पर आधारित है। यह एडिटोरियल इस बात का विश्लेषण करता है कि किस प्रकार पर्यटन भारत में रोज़गार, विकास, विदेशी मुद्रा आय और सॉफ्ट पावर का एक परिवर्तनकारी इंजन बन सकता है, फिर भी यह लगातार अपर्याप्त वित्त पोषण एवं अकुशल कार्यान्वयन का शिकार बना हुआ है। यह पर्यटन की पूर्ण आर्थिक क्षमता को उजागर करने के लिये तदर्थ प्रचार से हटकर क्षमता निर्माण, संवहनीयता और अधोसंरचना पर आधारित सुधारों की ओर बढ़ने की अनुशंसा करता है।
प्रिलिम्स के लिये: PRASHAD योजना, UDAN योजना, राष्ट्रीय डिजिटल पर्यटन मिशन (NDTM), DigiYatra, यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल
मेन्स के लिये: पर्यटन क्षेत्र का महत्त्व, पर्यटन क्षेत्र से जुड़े प्रमुख मुद्दे और आवश्यक उपाय।
पर्यटन भारत की सबसे कम उपयोग की गई विकास-क्षमताओं में से एक है, जो सकल घरेलू उत्पाद में 6.7% का योगदान देता है तथा लगभग 48 मिलियन लोगों को रोज़गार उपलब्ध कराता है। इस क्षेत्र में निवेश किया गया प्रत्येक रुपया, अर्थव्यवस्था के औसत की तुलना में 3.5 गुना अधिक रोज़गार सृजित करता है, जिससे इसकी रोज़गार क्षमता असाधारण रूप से स्पष्ट होती है। हालाँकि भारत के पास 44 यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल हैं, फिर भी यह केवल 10 मिलियन विदेशी पर्यटकों को आकर्षित कर पाता है, जो इसके समकक्ष देशों की तुलना में कहीं कम है। पर्यटन का रणनीतिक विस्तार इसे वर्ष 2035 तक 1 ट्रिलियन डॉलर के सकल घरेलू उत्पाद योगदान और 100 मिलियन रोज़गार वाले क्षेत्र में रूपांतरित कर सकता है।
भारत में पर्यटन क्षेत्र का क्या महत्त्व है?
- आर्थिक विकास का इंजन और GDP गुणक: पर्यटन एक अवकाश गतिविधि से विकसित होकर एक महत्त्वपूर्ण आर्थिक स्तंभ बन गया है, जो एक उच्च गुणक क्षेत्र के रूप में कार्य करता है तथा निर्माण, आतिथ्य और परिवहन उद्योगों में मांग को प्रोत्साहित करता है।
- महामारी के बाद की रिकवरी 'V-आकार' की रही है, जिसमें घरेलू खपत ने इस क्षेत्र को वैश्विक चुनौतियों से बचाया है, जिससे यह 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य का एक समुत्थानशील चालक बन गया है।
- पर्यटन के बढ़ते आर्थिक महत्त्व का प्रमाण विश्व पर्यटन एवं यात्रा परिषद (WTTC) के अनुमानों से मिलता है, जिसमें अनुमान लगाया गया है कि भारत का यात्रा और पर्यटन क्षेत्र वर्ष 2035 में अर्थव्यवस्था में लगभग 42 ट्रिलियन रुपये का योगदान देगा, जो विकास, रोज़गार एवं विदेशी मुद्रा आय के एक प्रमुख चालक के रूप में इसकी क्षमता को रेखांकित करता है।
- रोज़गार सृजन का व्यापक स्रोत: यह क्षेत्र अत्यधिक श्रम-प्रधान और समावेशी है, जो अकुशल लोगों के लिये कम बाधाओं वाली प्रवेश नौकरियाँ प्रदान करता है, साथ ही साथ उच्च मूल्य वाली सेवा भूमिकाओं का भी सृजन करता है।
- यह महिलाओं और ग्रामीण युवाओं को विशिष्ट रूप से सशक्त बनाता है, होमस्टे और गिग-इकोनॉमी भूमिकाओं के माध्यम से कार्यबल को सेवा क्षेत्र में स्थानांतरित करके कृषि में प्रच्छन्न बेरोज़गारी को कम करता है।
- उदाहरण के लिये, पर्यटन क्षेत्र में पहले से ही 48 मिलियन लोग कार्यरत हैं और निवेश किये गए प्रत्येक ₹1 से अर्थव्यवस्था के समग्र औसत की तुलना में 3.5 गुना अधिक रोज़गार सृजित होते हैं।
- विदेशी मुद्रा (फॉरेक्स) स्टेबलाइज़र: देश में आने वाला पर्यटन एक महत्त्वपूर्ण 'अदृश्य निर्यात' के रूप में कार्य करता है, जो ऋण-मुक्त विदेशी मुद्रा लाकर चालू खाता घाटे (CAD) को बहुत हद तक कम करता है।
- रुपये के हालिया अवमूल्यन ने भारत को एक लागत-प्रतिस्पर्द्धी गंतव्य बना दिया है, जिससे लक्ज़री, विरासत और स्वास्थ्य संबंधी क्षेत्रों में विदेशी खर्च को और अधिक प्रोत्साहन मिला है।
- भारत ने वैश्विक पर्यटन परिदृश्य में अपनी एक प्रमुख स्थिति स्थापित कर ली है, जो कुल अंतर्राष्ट्रीय आगमन का 1.40% हिस्सा है और वैश्विक पर्यटन राजस्व में 2.02% का योगदान देता है।
- वर्ष 2024 में पर्यटन से भारत की विदेशी मुद्रा आय (FEE) 35.016 बिलियन अमेरिकी डॉलर थी।
- अवसंरचना विकास के लिये उत्प्रेरक: पर्यटन की मांग 'लास्ट-माइल कनेक्टिविटी' के तीव्र उन्नयन को विवश कर रही है, जो हवाई अड्डों, एक्सप्रेसवे और रेलवे पर भारी पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) को उचित ठहराती है।
- इससे एक सकारात्मक चक्र बनता है, जहाँ बेहतर अधोसंरचना अधिक पर्यटकों को आकर्षित करता है, जिससे बदले में सार्वजनिक संपत्तियों के रख-रखाव एवं विस्तार के लिये धन प्राप्त होता है।
- बेहतर कनेक्टिविटी ने UDAN योजना के तहत पर्यटन को बढ़ावा दिया है, जिसने दूरस्थ स्थलों को महानगरों से जोड़ने वाले प्रमुख पर्यटन-विशिष्ट हवाई मार्गों को चालू कर दिया है।
- इसके अलावा, 160 से अधिक वंदे भारत ट्रेनों के शुरू होने से जयपुर, पुरी और वाराणसी जैसे प्रमुख पर्यटन केंद्रों तक यात्रा का समय काफी कम हो गया है, जिससे पर्यटकों की संख्या में वृद्धि हुई है।
- सामाजिक-सांस्कृतिक सॉफ्ट पावर और स्थानीय आर्थिक पुनरुद्धार: सरकार का 'तीर्थयात्रा का पुनरुद्धार' पर ध्यान केंद्रित करने से धार्मिक यात्रा एक मौसमी, कम मूल्य वाली गतिविधि से बदलकर साल भर चलने वाले, उच्च व्यय वाले आर्थिक पारिस्थितिकी तंत्र में परिवर्तित हो गई है।
- इस परिवर्तन से मंदिर वाले शहरों के आसपास नए शहरी केंद्र बन रहे हैं, जिससे अधोसंरचना में सुधार हो रहा है, जिसका लाभ पर्यटकों के अलावा स्थानीय आबादी को भी मिल रहा है।
- PRASHAD योजना के तहत लक्षित धार्मिक पर्यटन का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है, जिसके तहत तीर्थयात्रा के अधोसंरचना को उन्नत करने के लिये 54 परियोजनाओं को मंज़ूरी दी गई है।
- उदाहरण के लिये, अयोध्या राम मंदिर के उद्घाटन से स्थानीय अर्थव्यवस्था में उल्लेखनीय विस्तार हुआ।
- मेडिकल वैल्यू ट्रैवल (MVT) नेतृत्व: भारत कम लागत वाली, उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवा को पारंपरिक स्वास्थ्य प्रणालियों (AYUSH) के साथ मिलाकर स्वयं को 'विश्व की फार्मेसी और अस्पताल' के रूप में स्थापित कर रहा है।
- 'हील इन इंडिया' पहल किफायती सर्जरी और समग्र कायाकल्प की तलाश करने वाले वैश्विक रोगी वर्ग को प्रभावी ढंग से लक्षित करती है।
- भारत में चिकित्सा पर्यटन की बढ़ती भूमिका स्पष्ट है, क्योंकि वर्ष 2023 में चिकित्सा पर्यटन में पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 33% की वृद्धि (इन्वेस्टमेंट इंफॉर्मेशन एंड क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ऑफ इंडिया लिमिटेड) हुई।
- भारत ने 171 देशों के नागरिकों के लिये अपनी ई-मेडिकल और ई-मेडिकल अटेंडेंट वीज़ा सुविधा का विस्तार किया है, जिससे चिकित्सा पर्यटन को काफी बढ़ावा मिला है।
- अग्रणी 'हरित' विकास और पारिस्थितिक प्रबंधन: बड़े पैमाने पर पर्यटन से दूर हटते हुए, भारतीय पर्यटन नीति अब सुभेद्य पारिस्थितिक तंत्रों के संरक्षण के लिये 'वहनीय क्षमता' और संधारणीयता की ओर अग्रसर हो रही है।
- स्वदेश दर्शन 2.0 जैसी पहलें केवल प्रचार-प्रसार के बजाय गंतव्य प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करती हैं और पर्यटकों को ज़िम्मेदार व्यवहार की ओर प्रेरित करने के लिये 'ट्रेवल फॉर लाइफ' मंत्र के माध्यम से उत्तरदायी पर्यटन व्यवहार को बढ़ावा देते हैं।
- भारत का सतत पर्यटन की ओर संक्रमण स्वदेश दर्शन 2.0 में परिलक्षित होता है, जिसके तहत गण्डिकोटा और धौलावीरा जैसे 57 स्थलों को ज़िम्मेदार पर्यटन केंद्रों के रूप में विकसित किया जा रहा है।
- उदाहरण के लिये, लक्षद्वीप की इको-रिसॉर्ट परियोजनाएँ सुभेद्य प्रवाल पारिस्थितिक तंत्रों की रक्षा के लिये सौर ऊर्जा के उपयोग और शून्य-अपशिष्ट प्रोटोकॉल को बढ़ावा दे रही हैं।
- सॉफ्ट पावर प्रोजेक्शन और वैश्विक कूटनीति का साधन: पर्यटन सांस्कृतिक कूटनीति के प्रभावी माध्यम के रूप में कार्य करता है, जो रूढ़ियों को तोड़ते हुए विश्व स्तर पर 'ब्रांड इंडिया' की छवि का निर्माण करता है।
- G20 की अध्यक्षता ने भारत की सुरक्षा, विशालता और विविधता को सफलतापूर्वक प्रदर्शित किया, जिससे नकारात्मक यात्रा परामर्शों को चुनौती मिली और गैर-पारंपरिक क्षेत्रों में नए बाज़ार खुले।
- G20 सम्मेलन के बाद भारत की पर्यटन संबंधी सॉफ्ट पावर को बढ़ावा मिला, जिसके चलते वर्ष 2024 के अंत में भारत के लिये वैश्विक यात्रा खोजों में 45% की वृद्धि हुई।
- उदाहरण के लिये, श्रीनगर और अरुणाचल प्रदेश में एक साथ G20 बैठकों की मेज़बानी करने से संप्रभुता पर ज़ोर दिया गया तथा कश्मीर को एक सुरक्षित, विश्व स्तरीय पर्यटन स्थल के रूप में पुनः स्थापित किया गया।
- आर्थिक परिष्कार और उच्च-लाभ मूल्य प्राप्ति को बढ़ावा देना: इस क्षेत्र का महत्त्व इसके मात्रा-आधारित मॉडल से मूल्य-संचालित पारिस्थितिकी तंत्र के परिवर्तन में भी निहित है, जो उन खंडों को लक्षित करता है जो प्रति आगंतुक राजस्व को अधिकतम करते हुए वर्ष भर आर्थिक गतिविधि सुनिश्चित करते हैं।
- 'वेड इन इंडिया' के माध्यम से विवाह उद्योग को संस्थागत रूप देकर, भारत में सक्रिय रूप से 'पूंजी पलायन' को रोका जा रहा है। धनी नागरिकों के विवाहों को घरेलू सीमाओं के भीतर बनाए रखने से एक विशाल स्थानीय मूल्य शृंखला को बढ़ावा मिलता है, जिससे उच्च स्तरीय आतिथ्य सत्कार से लेकर पारंपरिक कारीगरों और आभूषण उद्योग तक के क्षेत्रों को लाभ होता है।
- इसके अलावा, भारत मंडपम (जहाँ इम्पैक्ट AI समिट 2026 आयोजित हुआ) और यशोभूमि जैसे विश्व स्तरीय स्थलों के विकास ने पर्यटन को उच्च स्तरीय व्यापारिक वाणिज्य के लिये एक उत्प्रेरक में बदल दिया है।
- ये केंद्र भारत को वैश्विक MICE बाज़ार के लिये प्रतिस्पर्द्धा करने की अनुमति देते हैं, जो अवकाश यात्रा की तुलना में प्रति व्यक्ति खर्च में काफी अधिक वृद्धि करता है तथा अंतर्राष्ट्रीय B2B साझेदारी को बढ़ावा देता है।
- क्षेत्रीय भीड़भाड़ में कमी और ग्रामीण विकास: पर्यटन विकास के विकेंद्रीकरण का सबसे प्रभावी साधन है, जो होमस्टे और कृषि-पर्यटन के माध्यम से शहरी केंद्रों से ग्रामीण परिधियों तक धन का अंतरण करता है।
- इससे महानगरों पर प्रवासन का दबाव कम होता है और ग्रामीण विरासत को आर्थिक मूल्य देकर संरक्षित किया जाता है, जिससे स्थानीय लोगों को अपनी संस्कृति की रक्षा करने के लिये प्रोत्साहन मिलता है।
- विकेंद्रीकृत पर्यटन को बढ़ावा देने के लिये, मंत्रालय ने सत्र 2024-25 में राज्यों को वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित पर्यटन केंद्रों के विकास के लिये ₹3,295 करोड़ के ब्याज मुक्त ऋण स्वीकृत किये।
- उदाहरण के लिये, वाइब्रेंट विलेजेज़ प्रोग्राम विकास और पर्यटन का लाभ उठाकर सीमावर्ती बस्तियों को आगंतुकों के लिये 'अंतिम गाँवों' से 'प्रथम गाँवों' में रूपांतरित करता है, जिससे आजीविका एवं रणनीतिक दृश्यता को बढ़ावा मिलता है।
भारत में पर्यटन क्षेत्र से जुड़े प्रमुख मुद्दे क्या हैं?
- अधोसंरचना की गंभीर कमी और लास्ट-माइल कनेक्टिविटी: हालाँकि प्रमुख हवाई अड्डे विश्व स्तरीय हैं, लेकिन विरासत स्थलों और दूरस्थ पर्यावरण-पर्यटन केंद्रों तक 'लास्ट-माइल' कनेक्टिविटी अभी भी बाधित है, जिससे यात्रा की थकान बहुत अधिक होती है।
- पहाड़ी मार्गों पर तीव्र हवाई यात्रा और जर्जर सड़क स्थितियों के बीच का अंतर उन उच्च-मूल्य वाले विदेशी पर्यटकों को हतोत्साहित करता है, जो रोमांच की बजाय आराम एवं सुगम व्यवस्था को प्राथमिकता देते हैं।
- हालाँकि वर्ष 2024 में 100 से अधिक नए मार्गों की शुरुआत की गई (जिसमें पूर्वोत्तर में 20 मार्ग शामिल हैं), पहाड़ी क्षेत्रों में 'परिचालनात्मक असंगति' अभी भी बहुत अधिक है, जहाँ मौसम की खराब स्थिति के कारण प्रायः उड़ानें रद्द हो जाती हैं और शिमला या कुल्लू जैसे हवाई अड्डों पर सीमित रात्रि-लैंडिंग सुविधाएँ नियमित समय-सारणी को बाधित करती हैं।
- उदाहरण के लिये, अरुणाचल प्रदेश या नागालैंड की 10-14 दिवसीय 'मुख्य आकर्षण' यात्रा में प्रायः 3-5 दिन विशुद्ध रूप से पारगमन में ही लग जाते हैं।
- अतिपर्यटन और पारिस्थितिक पतन: महामारी के बाद पर्यटन क्षेत्र में आए पुनरुत्थान ने पहाड़ी क्षेत्रों में एक पारिस्थितिक संकट को जन्म दिया है, जहाँ पर्यटकों की भारी भीड़ सुभेद्य पारिस्थितिक तंत्रों की 'वहन क्षमता' से कहीं अधिक हो गई है।
- इस अनियंत्रित जन पर्यटन के कारण भू-अवतलन, जल की कमी और अधोसंरचना के स्खलन जैसी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं, जिससे रमणीय स्थल कंक्रीट की झुग्गियों में परिवर्तित हो जाते हैं तथा दीर्घकालिक स्थिरता को खतरा उत्पन्न हो जाता है।
- अनियंत्रित पर्यटक प्रवाह ने संवेदनशील हिमालयी पारिस्थितिक तंत्रों को उनकी सीमा से परे दबाव उत्पन्न कर दिया है, चार धाम जैसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों पर आगंतुकों की संख्या 2000 के दशक की शुरुआत में सालाना लगभग 1 मिलियन से बढ़कर वर्ष 2023 में 5 मिलियन से अधिक हो गई है, जो वहन क्षमता से कहीं अधिक है तथा जल, अपशिष्ट और ढलानों पर दबाव डाल रही है।
- उदाहरण के लिये, केदारनाथ की वास्तविक स्थायी वहन क्षमता लगभग 9,833 आगंतुक प्रति दिन है, फिर भी वास्तविक संख्या आमतौर पर इससे अधिक हो जाती है, जिससे भूस्खलन, अपशिष्ट संकट और पारिस्थितिक क्षरण होता है।
- कराधान और मूल्य प्रतिस्पर्द्धा का मुद्दा: भारत में उच्च कराधान के कारण यह वियतनाम या थाईलैंड जैसे पड़ोसी देशों की तुलना में एक 'महॅंगा' गंतव्य बन जाता है, जिससे बजट के प्रति सजग अंतर्राष्ट्रीय यात्री इससे दूर हो जाते हैं।
- लक्ज़री होटलों पर लगने वाला 18% GST एक टैरिफ बाधा के रूप में कार्य करता है, जो कमज़ोर रुपये के लाभों को बेअसर कर देता है तथा पैकेज टूर को दक्षिण पूर्व एशियाई प्रतिस्पर्द्धियों की तुलना में काफी अधिक महॅंगा बना देता है।
- सितंबर 2025 में GST के युक्तिकरण से मध्यम श्रेणी के होटलों (₹7,500 और उससे कम) के लिये कर घटकर 5% हो गया, जबकि इस सीमा से ऊपर की लक्ज़री संपत्तियों पर उच्च GST अभी भी लागू है।
- इससे एक तीव्र 'वित्तीय संकट' उत्पन्न होता है, जहाँ कमरे की गुणवत्ता में मामूली वृद्धि के परिणामस्वरूप कर में असमानुपातिक वृद्धि होती है, जिससे भारत के प्रीमियम हेरिटेज और वेलनेस होटल बाली या फुकेत की तुलना में काफी महॅंगे हो जाते हैं।
- सुरक्षा संबंधी धारणाएँ और महिलाओं के खिलाफ अपराध: पुलिस व्यवस्था में सुधार के बावजूद, भारत के बारे में वैश्विक धारणा कि यह 'एकल महिला यात्रियों के लिये असुरक्षित' देश है, एक उच्च-प्रचारित धारणा बनी हुई है, जिसे छिटपुट लेकिन हाई-प्रोफाइल मामलों से बल मिलता है।
- यह 'भय का कारक' विदेशी पर्यटकों को स्वच्छ 'गोल्डन ट्रायंगल' के दायरे में ही सीमित रहने के लिये विवश करता है, जिससे सुरक्षित लेकिन कम ज्ञात ग्रामीण या जनजातीय स्थलों की ओर धन का वितरण बाधित होता है।
- अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों की यात्रा सलाहों में प्रायः 'यौन उत्पीड़न' के जोखिमों को उजागर किया जाता है, जिससे आने वाले एकल-यात्री बाज़ार पर असर पड़ता है।
- हाल ही में फोर्ट कोच्चि पुलिस ने कोच्चि-मुज़िरिस द्विवार्षिक समारोह में भाग लेने आई एक विदेशी महिला के कथित यौन उत्पीड़न के मामले में प्राथमिकी दर्ज की है।
- अपशिष्ट प्रबंधन का गंभीर संकट: 'यूज़ एंड थ्रो (उपयोग करो और फेंक दो)' वाली पर्यटन संस्कृति ने निर्मल परिदृश्यों को अपशिष्ट के ढेर में बदल दिया है जहाँ पहाड़ और समुद्र-तट एकल-उपयोग प्लास्टिक से पटते जा रहे हैं।
- पर्यटन केंद्रों में स्थित स्थानीय नगरपालिकाओं के पास मौसमी अपशिष्ट की अत्यधिक मात्रा को संसाधित करने के लिये राजस्व या तकनीकी क्षमता की कमी होती है, जिससे खुले में अपशिष्ट फेंका जाता है जो उस दृश्य सौंदर्य को ही नष्ट कर देता है जिसे देखने के लिये पर्यटक पैसे देते हैं।
- दूरस्थ क्षेत्रों में स्रोत और प्रसंस्करण संयंत्रों में अपशिष्ट पृथक्करण की कमी के कारण घाटियों और महासागरों में 'पुराना अपशिष्ट' जमा हो जाता है।
- अनियंत्रित पर्यटन की पारिस्थितिक लागत लक्षद्वीप में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है, जहाँ केंद्र शासित प्रदेश के वन और पर्यावरण विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 4,000 टन सूखा अपशिष्ट बिना एकत्र किये पड़ा हुआ है, जबकि इसे मुख्य भूमि पर स्थानांतरित करने का आदेश दिया गया है।
- अपशिष्ट का यह ढेर सुभेद्य प्रवाल पारिस्थितिक तंत्रों के लिये खतरा उत्पन्न करता है, जिससे द्वीप पर्यटन मॉडलों में स्थिरता की कमी उजागर होती है।
- पर्यटन केंद्रों में स्थित स्थानीय नगरपालिकाओं के पास मौसमी अपशिष्ट की अत्यधिक मात्रा को संसाधित करने के लिये राजस्व या तकनीकी क्षमता की कमी होती है, जिससे खुले में अपशिष्ट फेंका जाता है जो उस दृश्य सौंदर्य को ही नष्ट कर देता है जिसे देखने के लिये पर्यटक पैसे देते हैं।
- कौशल अंतर और सेवा गुणवत्ता की कमी: गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण प्राप्त आतिथ्य सत्कार कर्मचारियों की गंभीर कमी है, जिनके पास सौम्य कौशल, विदेशी भाषा प्रवीणता एवं डिजिटल साक्षरता हो।
- हालाँकि उद्योग में 'अनुभव संग्राहकों' की मांग है, लेकिन कार्यबल प्रायः अकुशल अस्थायी श्रमिकों से बना होता है, जिससे सेवा मानकों में गिरावट आती है जो 'अतिथि देवो भव' ब्रांड के वादे को नुकसान पहुँचाता है और बार-बार आने वाले आगंतुकों की दर को कम करता है।
- शानदार लग्ज़री होटल समझौतों के बावजूद, भारत का आतिथ्य सत्कार क्षेत्र कौशल की कमी का सामना कर रहा है, क्योंकि वर्ष 2024 में NCHMCT से संबद्ध होटल प्रबंधन संस्थानों में 8,656 सीटें रिक्त रहीं, जो तेज़ी से हो रहे क्षेत्रीय विस्तार के बीच कमज़ोर व्यावसायिक शिक्षा की मांग को उजागर करती हैं।
- नियामकीय लालफीताशाही और लाइसेंसिंग संबंधी बाधाएँ: वर्तमान में, भारत में यात्रा और पर्यटन क्षेत्र को बहुत हद तक राज्य का विषय माना जाता है।
- भारत में पर्यटन व्यवसाय शुरू करने और चलाने में लाइसेंसों (अग्निशमन, पुलिस, उत्पाद शुल्क, नगरपालिका) का एक जटिल संजाल शामिल होता है, जो राज्य के अनुसार बहुत भिन्न होता है।
- यह 'लाइसेंस राज' नवाचार और छोटे उद्यमियों (SME) को हतोत्साहित करता है, जिससे कई होमस्टे और एडवेंचर ऑपरेटरों को सुरक्षा ऑडिट या बीमा के बिना एक ग्रे मार्केट में काम करने के लिये विवश होना पड़ता है।
- खंडित विपणन और ब्रांडिंग: भारत में 'अमेजिंग थाईलैंड' और 'विज़िट सऊदी' जैसी कोई सुसंगत, एकल-खिड़की वाली ब्रांड नैरेटिव का अभाव है, जहाँ राज्य प्रायः सहयोग करने के बजाय एक-दूसरे के साथ प्रतिस्पर्द्धा करते हैं।
- इससे अंतर्राष्ट्रीय पर्यटकों के लिये संदेश भ्रमित हो जाता है, क्योंकि उन्हें अलग-अलग राज्य-अभियान दिखाई देते हैं, परंतु कोई साझा राष्ट्रीय मूल्य-प्रस्ताव या एकीकृत यात्रा-परिपथ नहीं बन पाता। (उदाहरण के लिये, 'केरल: भगवान का अपना देश' बनाम 'मध्य प्रदेश: एम.पी. अजब है, सबसे गजब है!')।
- विविभिन्न राज्य-नीतियाँ और विपणन बजट अंतर-राज्यीय विषयगत परिपथों के निर्माण में बाधा बनते हैं।
- भू-राजनीतिक और सामाजिक अस्थिरता के प्रति संवेदनशीलता: भारत में पर्यटन आंतरिक सामाजिक अशांति और सीमा तनाव के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है, जिसके कारण तत्काल बड़े पैमाने पर यात्रा रद्द करनी पड़ती है तथा यात्रा संबंधी सलाह जारी करनी पड़ती है।
- मणिपुर या जम्मू-कश्मीर जैसे क्षेत्रों में होने वाली घटनाएँ भय का 'व्यापक प्रभाव' उत्पन्न करती हैं, जिससे पर्यटक पूरे क्षेत्रों को छोड़कर चले जाते हैं तथा मौसमी नकदी प्रवाह पर निर्भर स्थानीय अर्थव्यवस्थाएँ तबाह हो जाती हैं।
- मणिपुर में आंतरिक अस्थिरता के प्रति पर्यटन की संवेदनशीलता स्पष्ट है, जहाँ आधिकारिक आँकड़ों (नवंबर 2025) से पता चलता है कि पर्यटकों का आगमन सत्र 2019-20 में 1.79 लाख से गिरकर सत्र 2024-25 में लगभग 17,000 हो जाएगा, जो 90.5% की गिरावट है।
भारत में पर्यटन क्षेत्र की क्षमता को उजागर करने के लिये किन उपायों की आवश्यकता है?
- राष्ट्रीय डिजिटल पर्यटन मिशन (NDTM) के एकीकरण में तेज़ी लाना: यात्रा चक्र में एक निर्बाध डिजिटल लेयर बनाने के लिये 'एकीकृत पर्यटन इंटरफेस' का कार्यान्वयन आवश्यक है, जिसमें UPI, DigiYatra और ONDC को एकीकृत किया जा सके।
- परिवहन, आतिथ्य सत्कार और सरकारी एजेंसियों के बीच डिजिटल डेटा आदान-प्रदान को मानकीकृत करके, भारत अंतर्राष्ट्रीय आगंतुकों के लिये बाधारहित 'वन-क्लिक' यात्रा अनुभव प्रदान कर सकता है।
- यह बैकएंड इंटीग्रेशन AI-संचालित इंटेलिजेंस हब के माध्यम से वास्तविक काल में भीड़ की निगरानी और वैयक्तिकृत यात्रा कार्यक्रम तैयार करने में सक्षम बनाएगा।
- आतिथ्य सत्कार को पूर्ण अवसंरचना का दर्जा देना: बजट और मध्य-बाज़ार खंडों सहित सभी होटल परियोजनाओं को औपचारिक रूप से 'अवसंरचना का दर्जा' प्रदान करने से कम लागत वाले, दीर्घकालिक संस्थागत वित्तपोषण एवं अनुकूल ब्याज दरों का लाभ मिलेगा।
- वर्तमान में, इस दर्जे की कमी टियर-2 और टियर-3 शहरों में पूंजी प्रवाह को प्रतिबंधित करती है, जहाँ क्षेत्रीय विकास की क्षमता सबसे अधिक है लेकिन वित्तीय जोखिम काफी अधिक माने जाते हैं।
- इस कदम से परिसंपत्ति निर्माण की लागत में भारी कमी आएगी, जिससे वैश्विक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश और घरेलू निजी निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा।
- वहन क्षमता आधारित विनियमन का कार्यान्वयन: सुभेद्य पहाड़ी क्षेत्रों और विरासत क्षेत्रों के पारिस्थितिक पतन को रोकने के लिये, वैज्ञानिक वहन क्षमता पर आधारित एक 'स्मार्ट परमिट प्रणाली' को नगरपालिका स्तर पर लागू किया जाना चाहिये।
- IoT सेंसर और रियल टाइम फुटफॉल डेटा का उपयोग करके, अधिकारी किसी गंतव्य के पर्यावरणीय सीमा तक पहुँचने पर प्रवेश शुल्क को गतिशील रूप से समायोजित कर सकते हैं या आगमन को रोक सकते हैं।
- इससे स्थल की 'ब्रांड इक्विटी' की रक्षा होती है और यह सुनिश्चित होता है कि पर्यटन एक निष्कर्षण उद्योग के बजाय एक सतत संसाधन बना रहे।
- विशेषीकृत पर्यटन पुलिस और सुरक्षा प्रकोष्ठों की स्थापना: सुरक्षा एक मनोवैज्ञानिक अवरोध बनी हुई है, इसलिये विदेशी भाषाओं और सॉफ्ट-स्किल आधारित संकट प्रबंधन में प्रशिक्षित समर्पित ‘टूरिस्ट पुलिस’ विंग की राष्ट्रव्यापी तैनाती अनिवार्य है।
- ये इकाइयाँ अधिक भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में दृश्यमान, तकनीक-सक्षम कियोस्क से संचालित होनी चाहिये और एक केंद्रीय 24/7 बहुभाषी आपातकालीन हेल्पलाइन से जुड़ी होनी चाहिये।
- ज़मीनी-स्तर पर सुरक्षा तंत्र को मज़बूत करना वैश्विक यात्रा परामर्शों की नकारात्मक छवि को कम करेगा तथा एकल महिला यात्रियों का विश्वास बढ़ाएगा।
- पर्यटन पर लगने वाले GST का युक्तिकरण और एकरूपता: होटलों और परिवहन के लिये वर्तमान स्तरीय GST संरचना जटिल है और प्रायः भारत को अपने दक्षिण पूर्व एशियाई प्रतिस्पर्द्धियों की तुलना में अधिक महॅंगा बना देती है।
- एक समान, प्रतिस्पर्द्धी 'फ्लैट टूरिज़्म टैक्स' लागू करने या विदेशी पर्यटकों से होने वाली आय को 'डीम्ड एक्सपोर्ट' का दर्जा देने से मूल्य प्रतिस्पर्द्धा में तत्काल वृद्धि होगी।
- इस वित्तीय राहत से ऑपरेटरों को सेवा की गुणवत्ता और संधारणीयता में सुधार के लिये पुनर्निवेश करने की अनुमति मिलेगी, जिससे वैश्विक यात्रियों के लिये एक अधिक मज़बूत एवं मूल्य-पारदर्शी बाज़ार का निर्माण होगा।
- IIM-साझेदारी केंद्रों के माध्यम से विकेंद्रीकृत कौशल विकास: अकादमिक सिद्धांत और उद्योग की मांग के बीच अंतर को न्यूनतम करने के लिये एक 'राष्ट्रीय आतिथ्य संस्थान' (केंद्रीय बजट 2026) की स्थापना की जानी चाहिये, जो टियर-2/3 शहरों में व्यावसायिक प्रशिक्षण पर ध्यान केंद्रित करे।
- IIM जैसे प्रीमियम संस्थानों के साथ साझेदारी करके 'एक्सपीरियंस क्यूरेटर' और 'स्टोरीटेलर गाइड' को प्रशिक्षित करने से, यह क्षेत्र लेन-देन आधारित सेवा से हटकर उच्च मूल्य वाले अनुभवात्मक पर्यटन की ओर बढ़ सकता है।
- धरोहर संरक्षण और डिजिटल कंटेंट क्रिएशन जैसे विशिष्ट क्षेत्रों में प्रतिवर्ष चयनित गाइडों का उन्नयन एक विशिष्ट, दक्ष कार्यबल तैयार करेगा।
- बहुआयामी लास्ट-माइल कनेक्टिविटी: ‘हिंटरलैंड पोटेंशियल’ को साकार करने हेतु क्षेत्रीय हवाई अड्डों को लास्ट-माइल सड़क नेटवर्क से जोड़ने के लिये समर्पित ‘टूरिज़्म ट्रांसपोर्ट फंड’ आवश्यक है, जिसमें उच्च-गुणवत्ता वाली इलेक्ट्रिक बस फ्लीट शामिल हो।
- वंदे भारत स्लीपर नेटवर्क का विस्तार करके बौद्ध सर्किट या डेज़र्ट सर्किट जैसे विशिष्ट पर्यटन मार्गों को शामिल करने से विश्व स्तरीय रेल सुविधा मिलेगी जो घरेलू एवं विदेशी दोनों ही पर्यटकों को आकर्षित करेगी।
- निर्बाध मल्टी-मोडल एकीकरण यह सुनिश्चित करता है कि यात्रा स्वयं ही पर्यटन अनुभव का एक आकर्षक हिस्सा बन जाए।
- 'वेड इन इंडिया' और MIEC इंफ्रास्ट्रक्चर क्लस्टरिंग मॉडल: भारत को समर्पित 'ग्लोबल इवेंट डिस्ट्रिक्ट्स' को सक्रिय रूप से विकसित करना चाहिये, जो एक ही पारिस्थितिकी तंत्र में विशाल कन्वेंशन सेंटर (MIEC), लक्ज़री आतिथ्य और विशेष विवाह स्थलों को संयोजित करते हैं।
- अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों और भव्य विवाह आयोजनों के लिये सिंगल-विंडो स्वीकृतियाँ प्रदान कर भारत वैश्विक वेडिंग बाज़ार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा सकता है।
- यह क्लस्टरिंग मॉडल इवेंट प्लानर्स की लॉजिस्टिक बाधाओं को घटाता है तथा ऑफ-सीज़न में भी उच्च-राजस्व अवसर उत्पन्न करता है।
- पुनर्योजी और खगोल-पर्यटन का मुख्यधारा में समावेश: बुनियादी पर्यावरण-पर्यटन से परे, नीति को 'पुनर्योजी पर्यटन' को प्रोत्साहित करना चाहिये, जहाँ पर्यटन राजस्व का एक हिस्सा अनिवार्य रूप से स्थानीय वन पुनर्स्थापन या सामुदायिक विरासत में पुनर्निवेश किया जाता है।
- 'एस्ट्रो-टूरिज़्म' (लद्दाख/स्पीति में डार्क स्काई रिज़र्व) और पूर्वी घाट में 'ट्रेकिंग ट्रेल्स' जैसे विशिष्ट क्षेत्रों को बढ़ावा देने से भीड़भाड़ वाले महानगरों से कार्बन-सिंक क्षेत्रों की ओर ध्यान आकर्षित किया जा सकता है।
- इससे उत्पाद पोर्टफोलियो में विविधता आती है और पर्यावरण के प्रति जागरूक 'Gen Z' यात्रियों की बढ़ती वैश्विक आबादी को आकर्षित करने में सहायता मिलती है।
- एकल-खिड़की नियामक मंज़ूरी की ओर संक्रमण: पर्यटन क्षेत्र में 'व्यापार सुगमता' वर्तमान में विभिन्न राज्य और केंद्रीय विभागों से अलग-अलग लाइसेंस की आवश्यकता के कारण बाधित है।
- समयबद्ध एवं स्वीकृत स्वीकृतियों के साथ एक डिजिटल 'एकीकृत लाइसेंसिंग पोर्टल' को लागू करने से छोटे उद्यमियों को होमस्टे और एडवेंचर स्पोर्ट्स व्यवसाय कानूनी रूप से शुरू करने में सहायता मिलेगी।
- इन प्रशासनिक संबंधी बाधाओं को दूर करना अनौपचारिक क्षेत्र को औपचारिक रूप देने और देश भर में मानकीकृत सुरक्षा ऑडिट सुनिश्चित करने का सबसे प्रभावी तरीका है।
निष्कर्ष
पर्यटन में भारत के लिये विकास, रोज़गार, विदेशी मुद्रा, क्षेत्रीय संतुलन और सॉफ्ट पावर प्रदान करने की विशिष्ट क्षमता है। हालाँकि, जब तक अवसंरचनात्मक कमियों, पारिस्थितिक सीमाओं, सुरक्षा संबंधी धारणाओं तथा कौशल की कमी जैसे मुद्दों का समाधान नहीं किया जाता, तब तक यह संभावनाएँ साकार नहीं हो पाएंगी। मात्रा-आधारित पर्यटन से मूल्य-आधारित, संधारणीय और डिजिटल रूप से सक्षम पर्यटन की ओर परिवर्तन अनिवार्य है। दूरदर्शिता के साथ प्रबंधन करने पर पर्यटन एक अवकाश क्षेत्र से विकसित होकर भारत के समावेशी और समुत्थानशील विकास मॉडल का एक महत्त्वपूर्ण स्तंभ बन सकता है।
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दृष्टि मेन्स प्रश्न भारत में पर्यटन विकास का इंजन, रोज़गार सृजनकर्ता और सॉफ्ट पावर टूल के रूप में कार्य करने की अपार क्षमता रखता है, फिर भी संरचनात्मक रूप से इसका पूरी तरह से उपयोग नहीं किया गया है। इसके कारणों का विश्लेषण कीजिये और इसकी पूर्ण क्षमता को उजागर करने के उपाय सुझाइये। |
प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1. भारत की अर्थव्यवस्था के लिये पर्यटन क्यों महत्त्वपूर्ण है?
उच्च GDP गुणक, रोज़गार सृजन और विदेशी मुद्रा आय।
प्रश्न 2. भारत की पर्यटन क्षमता को कौन सी चीजें सीमित करती हैं?
अधोसंरचना की कमियाँ, अत्यधिक पर्यटन, सुरक्षा संबंधी चिंताएँ, कौशल की कमी।
प्रश्न 3. पर्यटन ग्रामीण विकास में किस प्रकार सहायक होता है?
होमस्टे, कृषि-पर्यटन और विकेंद्रीकृत आय प्रवाह के माध्यम से।
प्रश्न 4. पर्यटन नीति में संधारणीयता क्यों महत्त्वपूर्ण है?
पारिस्थितिक पतन को रोकने और दीर्घकालिक व्यवहार्यता को बनाए रखने के लिये।
प्रश्न 5. पर्यटन को सॉफ्ट पावर का साधन क्या बनाता है?
सांस्कृतिक कूटनीति, राष्ट्र ब्रांडिंग और वैश्विक धारणा को आकार देना।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ)
मेन्स
प्रश्न 1. पर्वत पारिस्थितिकी तंत्र को विकास पहलों और पर्यटन के ऋणात्मक प्रभाव से किस प्रकार पुनःस्थापित किया जा सकता है? (2019)
प्रश्न 2. पर्यटन की प्रोन्नति के कारण जम्मू और काश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के राज्य अपनी पारिस्थितिक वहन क्षमता की सीमाओं तक पहुँच रहे हैं? समालोचनात्मक मूल्यांकन कीजिये। (2015)