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नई राष्ट्रीय सुरक्षा नीति की आवश्यकता | 22 Oct 2021 | विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

यह एडिटोरियल 21/10/2021 को ‘द हिंदू’ में प्रकाशित “The Outlines of A National Security Policy” लेख पर आधारित है। इसमें सामरिक क्षेत्र में साइबर प्रौद्योगिकी को शामिल किये जाने की आवश्यकता और प्रौद्योगिकी युग में भारत के लिये राष्ट्रीय सुरक्षा नीति के बदलते परिप्रेक्ष्यों के संबंध में चर्चा की गई है।

संदर्भ

साइबर को प्रायः भूमि, समुद्र, वायु और अंतरिक्ष क्षेत्र के साथ युद्ध के पाँचवें आयाम के रूप में देखा जाता है। इस बात की संभावना लगातार बढ़ रही है कि साइबर वारफेयर जल्द ही राष्ट्रों के शस्त्रागार का एक नियमित अंग बन जाएगा।

जहाँ तक ​​भारत का प्रश्न है, इंटरनेट उपयोगकर्त्ताओं की संख्या के मामले में यह संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन के बाद विश्व में तीसरे स्थान पर है, लेकिन फिर भी इसकी साइबर सुरक्षा संरचना अभी नवजात अवस्था में ही है।  

विश्व भर में बदलता सैन्य सिद्धांत अब साइबर कमान की स्थापना करने की आवश्यकता पर बल दे रहा है, जो साइबर स्पेस में प्रतिरोधक क्षमता के निर्माण के साथ-साथ रणनीतियों में परिवर्तन को भी परिलक्षित करता है।

साइबर वारफेयर और भारत

आगे की राह

निष्कर्ष

अभ्यास प्रश्न: ‘‘साइबर को प्रायः भूमि, समुद्र, वायु और अंतरिक्ष क्षेत्र के साथ युद्ध के पाँचवें आयाम के रूप में देखा जाता है। हालाँकि, साइबर वारफेयर के सामान्य होने के साथ प्रत्येक राष्ट्र को द्विपक्षीय संघर्षों के लिये अधिक तैयार रहना होगा।’’ टिप्पणी कीजिये।