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घरेलू हिंसा: कारण और समाधान | 04 Mar 2020 | सामाजिक न्याय

इस Editorial में The Hindu, The Indian Express, Business Line आदि में प्रकाशित लेखों का विश्लेषण किया गया है। इस लेख में घरेलू हिंसा व उसके कारण और समाधान पर चर्चा की गई है। आवश्यकतानुसार, यथास्थान टीम दृष्टि के इनपुट भी शामिल किये गए हैं।

संदर्भ

“केवल एक थप्पड़, लेकिन नहीं मार सकता” यह वाक्य किसी फिल्म का मात्र एक डायलॉग ही नहीं बल्कि विभिन्न समाजों की बदरंग हकीकत को भी उजागर करता है। घरेलू हिंसा दुनिया के लगभग हर समाज में मौजूद है। इस शब्द को विभिन्न आधारों पर वर्गीकृत किया जा सकता है जिनमें पति या पत्नी, बच्चों या बुजुर्गों तथा ट्रांसजेंडरों के खिलाफ हिंसा के कुछ उदाहरण प्रत्यक्ष रूप से सामने हैं। पीड़ित के खिलाफ हमलावर द्वारा अपनाई जाने वाली विभिन्न प्रकार की गतिविधियों में शारीरिक शोषण, भावनात्मक शोषण, मनोवैज्ञानिक दुर्व्यवहार या वंचितता, आर्थिक शोषण, गाली-गलौज, ताना मारना आदि शामिल हैं। घरेलू हिंसा न केवल विकासशील या अल्प विकसित देशों की समस्या है बल्कि यह विकसित देशों में भी बहुत प्रचलित है। घरेलू हिंसा हमारे छद्म सभ्य समाज का प्रतिबिंब है।

सभ्य समाज में हिंसा का कोई स्थान नहीं है। लेकिन प्रत्येक वर्ष घरेलू हिंसा के जितने मामले सामने आते हैं, वे एक चिंतनीय स्थिति को रेखांकित करते हैं। हमारे देश में घरों के बंद दरवाज़ों के पीछे लोगों को प्रताड़ित किया जा रहा है। यह कार्य ग्रामीण क्षेत्रों, कस्बों, शहरों और महानगरों में भी हो रहा है। घरेलू हिंसा सभी सामाजिक वर्गों, लिंग, नस्ल और आयु समूहों को पार कर एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी के लिये एक विरासत बनती जा रही है। इस आलेख में घरेलू हिंसा के कारणों, समाज और बच्चों पर पड़ने वाले प्रभाव तथा समस्या समाधान के उपाय तलाशने का प्रयास किया जाएगा।

घरेलू हिंसा क्या है?

भारत में घरेलू हिंसा के विभिन्न रूप

भारत में घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 के अनुसार, घरेलू हिंसा के पीड़ित के रूप में महिलाओं के किसी भी रूप तथा 18 वर्ष से कम आयु के बालक एवं बालिका को संरक्षित किया गया है। भारत में घरेलू हिंसा के विभिन्न रूप निम्नलिखित हैं-

घरेलू हिंसा के कारण

घरेलू हिंसा के प्रभाव

समाधान के उपाय

निष्कर्ष

यदि हम सही मायनों में “महिलाओं के विरुद्ध हिंसा से मुक्त भारत” बनाना चाहते हैं, तो वक्त आ चुका है कि हमें एक राष्ट्र के रूप में सामूहिक तौर पर इस विषय पर चर्चा करनी चाहिये। एक अच्छा तरीका यह हो सकता है कि हम राष्ट्रव्यापी, अनवरत तथा समृद्ध सामाजिक अभियान की शुरुआत करें।

प्रश्न- घरेलू हिंसा से आप क्या समझते हैं? इसके कारणों का उल्लेख करते हुए समाधान के उपाय सुझाएँ।